जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अंशुल चौबे और देव-ऋषि की सुरमयी प्रस्तुति ‘मैं ही कृष्ण, मैं ही राम’

Digital Desk

आध्यात्मिक रैप और कथक के संगम से गीता के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अनूठी पहल

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भारतीय आध्यात्मिक दर्शन, आधुनिक संगीत और शास्त्रीय कला के अनूठे संगम के रूप में ‘मैं ही कृष्ण, मैं ही राम’ संगीत प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना है। यह आध्यात्मिक रैप श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन और उसके गहरे संदेश को समकालीन संगीत शैली के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का रचनात्मक प्रयास है।

गीत के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, कर्म, आत्म-खोज और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों को आधुनिक संगीत की अभिव्यक्ति में प्रस्तुत किया गया है। जन्माष्टमी जैसे पावन अवसर पर यह प्रस्तुति भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का विशेष प्रयास है।

इस गीत का संगीत वीडियो एक युवा कथक कलाकार की प्रेरणादायी यात्रा को दर्शाता है। कहानी गंडा बंधन की पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा से शुरू होकर साधना, अनुशासन, समर्पण और निरंतर संघर्ष के माध्यम से कला में निपुणता तथा आत्म-खोज की यात्रा को सामने लाती है। यह कहानी केवल नृत्य की नहीं, बल्कि जुनून, उद्देश्य, धैर्य, भक्ति और आंतरिक परिवर्तन की कहानी है।

गीत में आध्यात्मिक रैप को कथक की शास्त्रीय अभिव्यक्ति के साथ जोड़ा गया है। इस अनूठे प्रयोग के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और शास्त्रीय परंपराएं आधुनिक संगीत और कहानी कहने के तरीकों के साथ भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की जा सकती हैं।

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‘मैं ही कृष्ण, मैं ही राम’ का संगीत देवेश धाबलिया एवं ऋषि शर्मा (देव-ऋषि) ने दिया है, जबकि गीत एवं रैप प्रस्तुति अंशुल चौबे की है। संगीत वीडियो का निर्देशन महिमा अग्रवाल ने किया है। देवेश धबालिया, ऋषि शर्मा और अंशुल चौबे स्वतंत्र संगीतकार हैं तथा उनकी रचनाएं भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक जीवन के अनुभवों से प्रेरित हैं।

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परियोजना का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं को आत्म-खोज, अनुशासन, भक्ति, उद्देश्य, आंतरिक शक्ति और भारतीय सांस्कृतिक गौरव जैसे मूल्यों से जोड़ना है। यह पहल यह संदेश भी देती है कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं को आधुनिक मंच और समकालीन संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।

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इस परियोजना के जरिए कलाकारों का प्रयास है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक अभिव्यक्ति के साथ जोड़कर ऐसा संगीत तैयार किया जाए, जो दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ उन्हें सोचने, जुड़ने और अपनी जड़ों को समझने के लिए प्रेरित करे।

▶️ संगीत प्रस्तुति यहां देखें: https://youtu.be/cOQ3_TvtUhQ

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