भारत-अमेरिका ने हिंद महासागर सुरक्षा, कनेक्टिविटी पर की चर्चा

Sandeep Patel

On

भारत और अमेरिका ने IOSV के तहत हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा की

भारत और अमेरिका ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। इंडियन ओशन स्ट्रैटेजिक वेंचर (IOSV) के तहत समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को प्रमुख क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया। भारत और अमेरिका ने हिंद महासागर क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत की है। इसमें समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक बुनियादी ढांचा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी प्रमुख मुद्दे रहे। यह चर्चा भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एलिसन एम. हूकर के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान हुई। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों पक्षों ने इंडियन ओशन स्ट्रैटेजिक वेंचर (IOSV) के तहत सहयोग के अवसरों पर चर्चा की और हिंद महासागर क्षेत्र के साझेदार देशों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखने पर जोर दिया।

मिस्री-हूकर ने IOSV पर की बात

विक्रम मिस्री और एलिसन हूकर ने IOSV के माध्यम से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। रणधीर जायसवाल के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर में दोनों देशों के बीच ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना था, जहां व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत किया जा सके। यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को क्षेत्रीय स्तर पर ठोस सहयोग में बदलने के प्रयासों का हिस्सा है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय पहलों के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं पर भी विचार किया।

समुद्री सुरक्षा पर जोर

बातचीत में समुद्री सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। हिंद महासागर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को इस क्षेत्र के देशों के लिए सुरक्षा और विकास के प्रमुख साझेदार के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया है। भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में समुद्री सूचना साझा करना, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और क्षेत्रीय साझेदारों की क्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ताजा बातचीत में किसी नए विशिष्ट सुरक्षा समझौते की घोषणा नहीं की गई। दोनों देश पहले भी स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर जोर देते रहे हैं।

रणनीतिक बुनियादी ढांचा

बातचीत में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया। भारत और अमेरिका ऐसे बुनियादी ढांचा और तकनीकी सहयोग के अवसर तलाश रहे हैं, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर करने के साथ आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बना सकें। हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच बुनियादी ढांचे का महत्व और बढ़ गया है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

Also Read:  पाकिस्तान के बड़े शहर बिजली संकट में, कराची में 12 घंटे तक कटौती; सड़कों पर उतरे लोग

अंडरसी केबल पर सहयोग

कनेक्टिविटी भी चर्चा का प्रमुख हिस्सा रही। भारत और अमेरिका ने अंडरसी केबल नेटवर्क से जुड़े संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की है। इसमें विश्वसनीय कंपनियों के जरिए केबलों के रखरखाव, मरम्मत और वित्तपोषण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अंडरसी केबल दुनिया के बड़े हिस्से के डिजिटल संचार के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे नेटवर्क को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग से हिंद महासागर, पश्चिम एशिया और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल संचार नेटवर्क की मजबूती बढ़ सकती है। दोनों देश तकनीक, ऊर्जा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी संभावित साझेदारी तलाश रहे हैं।

Also Read:  रेडट्रैक कूरियर डिलीवरी हब फ्रेंचाइज़ी: 550+ ब्रांड्स के साथ कम तनाव में कमाईका अवसर

साझेदार देशों की प्राथमिकता

भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि IOSV के तहत सहयोग में हिंद महासागर क्षेत्र के साझेदार देशों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। यह भारत के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को किसी एक बड़ी शक्ति के प्रभुत्व के बजाय साझेदार देशों की जरूरतों के आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। हिंद महासागर के अलग-अलग देशों की आर्थिक, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जरूरतें अलग हैं। भारत इन देशों के साथ क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग, कनेक्टिविटी और विकास साझेदारी के माध्यम से संबंध मजबूत करता रहा है। अमेरिका ने भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाई है।

Also Read:  सीरियाई सेना में विलय के समझौते के बाद कुर्द नेतृत्व वाली SDF का स्वतंत्र सैन्य रोल खत्म

IOSV क्या है?

इंडियन ओशन स्ट्रैटेजिक वेंचर (IOSV) की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में हुई बातचीत के बाद हुई थी। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करना है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी, निवेश और वाणिज्य शामिल हैं। इस ढांचे के तहत दोनों देश क्षेत्रीय साझेदारों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर समन्वय विकसित करना चाहते हैं। मिस्री और हूकर की ताजा बातचीत IOSV को राजनीतिक घोषणा से आगे ले जाकर व्यावहारिक सहयोग में बदलने की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।

व्यापक रणनीतिक साझेदारी

IOSV के तहत चर्चा भारत-अमेरिका के व्यापक रणनीतिक संबंधों का भी हिस्सा है। दोनों देश रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। वैश्विक व्यापार मार्गों और रणनीतिक संसाधनों तक पहुंच के कारण हिंद महासागर इन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे मध्य पूर्व, अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका देती है। वॉशिंगटन के लिए भारत के साथ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

आगे क्या होगा

मिस्री और हूकर की बातचीत के बाद भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच IOSV के तहत विशिष्ट परियोजनाओं और व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्रों पर आगे चर्चा होने की संभावना है। निकट भविष्य में समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी और रणनीतिक बुनियादी ढांचा प्राथमिक क्षेत्र बने रह सकते हैं। इसके बाद तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार संभव है। क्षेत्रीय साझेदारों की प्राथमिकताओं पर जोर यह संकेत देता है कि भारत और अमेरिका हिंद महासागर के देशों की आर्थिक और सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप सहयोग विकसित करने की कोशिश करेंगे।

भारत के लिए IOSV हिंद महासागर में एक प्रमुख सुरक्षा और विकास साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने का अतिरिक्त मंच है। अमेरिका के लिए भारत के साथ गहरा सहयोग व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति और महत्वपूर्ण समुद्री एवं बुनियादी ढांचा मुद्दों पर समन्वय को मजबूत कर सकता है।

Recommended for You

दैनिक जागरण से जुड़ें:

देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

नवीनतम समाचार

बिजली कर्मचारियों की मांगों पर सरकार के फैसलों का महासंघ ने जताया आभार, संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग दोहराई

मध्यप्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ ने कर्मचारी हित में लिए गए फैसलों के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव...
मध्य प्रदेश 
बिजली कर्मचारियों की मांगों पर सरकार के फैसलों का महासंघ ने जताया आभार, संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग दोहराई

एमएसएमई संशोधन विधेयक: पहचान से परे, छोटे कारोबारों के विकास पर ज़ोर साहिल तनेजा, मुख्य व्यवसाय अधिकारी, नामदेव फिनवेस्ट

उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की संख्या अब 9.16 करोड़ से भी अधिक हो गई...
देश विदेश 
एमएसएमई संशोधन विधेयक: पहचान से परे, छोटे कारोबारों के विकास पर ज़ोर  साहिल तनेजा, मुख्य व्यवसाय अधिकारी, नामदेव फिनवेस्ट

जंगल बचाने से लेकर गांव संवारने तक, सतपुड़ा में आईसीआईसीआई फाउंडेशन की संरक्षण मुहिम से जंगल, वन्यजीव और गांव—तीनों को संबल

बैंक की सीएसआर शाखा आईसीआईसीआई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ ने नर्मदापुरम जिले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और उसके आसपास वन्यजीवों...
मध्य प्रदेश 
जंगल बचाने से लेकर गांव संवारने तक, सतपुड़ा में आईसीआईसीआई फाउंडेशन की संरक्षण मुहिम से जंगल, वन्यजीव और गांव—तीनों को संबल

चीनी खरीद पर लिमिट, Blinkit-Swiggy से 2 से 5 किलो तक ही ऑर्डर; दाम ₹65 के पार

रक्षाबंधन से पहले बढ़ी मांग और कीमतों के बीच ऑनलाइन-ऑफलाइन स्टोर्स ने खरीद सीमित की; सरकार ने 10 लाख टन...
बिजनेस 
चीनी खरीद पर लिमिट, Blinkit-Swiggy से 2 से 5 किलो तक ही ऑर्डर; दाम ₹65 के पार

बिजनेस