ईरान ने ओमान से अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर के बावजूद होर्मुज बंद रखा

Sandeep Patel

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ईरान ने ओमान के साथ अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को सैन्य रूप से बंद बताया है। जानें सात मील के कॉरिडोर और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ अस्थायी समुद्री कॉरिडोर पर सहमति को होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना नहीं माना जा सकता। प्रस्तावित मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों को सीमित आवाजाही की अनुमति मिल सकती है, जबकि सैन्य जहाजों पर रोक रहेगी ईरान और ओमान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी नौवहन कॉरिडोर और माइन-क्लीयरेंस योजना पर बातचीत की है। लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि यह व्यवस्था जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के बराबर नहीं है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि सैन्य दृष्टि से होर्मुज अभी भी बंद है। उनके मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था केवल वाणिज्यिक जहाजों की नियंत्रित आवाजाही के लिए है।

होर्मुज अभी क्यों बंद?

ग़रीबाबादी के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच बनी समझ को जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि होर्मुज तत्काल पूरी तरह नहीं खुलेगा। यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा सैन्य और राजनयिक तनाव जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि व्यापक परिस्थितियों और अमेरिकी कदमों में बदलाव के बिना सामान्य नौवहन बहाल करना संभव नहीं होगा।

सात मील का कॉरिडोर

ईरान और ओमान ने एक अस्थायी संयुक्त नौवहन कॉरिडोर बनाने पर चर्चा की है। ईरानी पक्ष के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग करीब सात मील चौड़ा होगा। फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरानी क्षेत्रीय जल से गुजरेंगे, जबकि बाहर निकलने वाले मार्ग का एक हिस्सा ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर जाएगा। हालांकि, दोनों दिशाओं में ईरानी जल क्षेत्र शामिल रहेगा। यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है। दोनों देश आगे तकनीकी बातचीत के जरिए स्थायी नौवहन मार्ग और जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

सैन्य जहाजों पर रोक

प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू सैन्य जहाजों को कॉरिडोर से बाहर रखना है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अस्थायी मार्ग वाणिज्यिक जहाजों के लिए होगा और सैन्य जहाजों को इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे स्पष्ट है कि तेहरान व्यावसायिक नौवहन और सैन्य गतिविधियों को अलग-अलग रखना चाहता है। इस प्रतिबंध का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि होर्मुज मौजूदा ईरान-अमेरिका टकराव में एक प्रमुख रणनीतिक बिंदु बना हुआ है।

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माइन क्लीयरेंस पर काम

ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त परियोजना पर भी सहमति जताई है। दोनों देशों के संयुक्त बयान के अनुसार, अस्थायी कॉरिडोर के साथ माइन-क्लीयरेंस का काम सुरक्षित नौवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके बाद तकनीकी स्तर पर स्थायी कॉरिडोर, ट्रैफिक मैनेजमेंट, सूचना साझा करने और सुरक्षा सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया है कि अमेरिकी बलों ने मुख्य शिपिंग लेन में मौजूद सभी माइंस हटा दी हैं। हालांकि, क्षेत्रीय नौवहन व्यवस्था को लेकर ईरान और अमेरिका के दावों में अंतर बना हुआ है।

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30 से 60 दिन की बातचीत

ईरान ने संकेत दिया है कि स्थायी समुद्री मार्ग को लेकर बातचीत में 30 से 60 दिन लग सकते हैं। ग़रीबाबादी के अनुसार, अस्थायी व्यवस्था मौजूदा परिस्थितियों में सीमित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए है, जबकि बाद की बातचीत में पुराने ट्रैफिक सिस्टम की जगह नया स्थायी ढांचा तैयार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय अधिकार, माइन-क्लीयरेंस, जहाजों की निगरानी और अन्य खाड़ी देशों के हित जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।

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तेल बाजार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। युद्ध शुरू होने से पहले वैश्विक तेल और LNG की करीब एक-पांचवीं खेप इस मार्ग से गुजरती थी। संघर्ष के बाद से अधिकांश नौवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 26 अगस्त को उपलब्ध शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। मंगलवार को केवल पांच कमोडिटी जहाजों के गुजरने की प्रारंभिक जानकारी मिली, जबकि 10 दिनों का औसत करीब 15 जहाज प्रतिदिन था। यदि अस्थायी कॉरिडोर सुरक्षित रूप से काम करना शुरू करता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता कुछ कम हो सकती है। लेकिन फिलहाल इसे सामान्य नौवहन की बहाली नहीं माना जा रहा है।

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