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ट्रंप का क्रिप्टो प्लान तेज, अमेरिका की बिटकॉइन रणनीति पर जोर
Sandeep Patel
ट्रंप ने क्लैरिटी एक्ट को आगे बढ़ाने और अमेरिका की बिटकॉइन होल्डिंग बढ़ाने की संभावना जताई, डिजिटल एसेट नीति पर बढ़ा जोर।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी सरकार की नीति को और आगे बढ़ाते हुए अमेरिका को डिजिटल एसेट्स का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया है।
व्हाइट हाउस में क्रिप्टो उद्योग के प्रमुख अधिकारियों और वित्तीय नियामकों के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार बड़ी मात्रा में बिटकॉइन और अन्य डिजिटल एसेट्स खरीदने पर विचार कर सकती है।
हालांकि, उन्होंने किसी नए खरीद कार्यक्रम की घोषणा नहीं की। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि संभावित खरीद कब शुरू होगी या इसके लिए धन की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
बिटकॉइन खरीद का विकल्प
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका द्वारा अधिक बिटकॉइन रखने का मुद्दा प्रशासन के भीतर चर्चा में रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि वह सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के चेयरमैन पॉल एटकिंस और अन्य अधिकारियों की सिफारिशों पर विचार करेंगे।
अगर अमेरिका खुले बाजार से बड़ी मात्रा में बिटकॉइन खरीदता है, तो यह डिजिटल एसेट बाजार में सरकार की भूमिका को काफी बढ़ा सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने 2025 में स्ट्रैटेजिक बिटकॉइन रिजर्व की स्थापना की थी। इसमें शुरुआत में सरकार द्वारा जब्त किए गए बिटकॉइन को शामिल किया गया था।
क्लैरिटी एक्ट पर जोर
बैठक में ट्रंप ने क्रिप्टो उद्योग के लिए स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कांग्रेस से क्लैरिटी एक्ट को आगे बढ़ाने की अपील की। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अलग-अलग डिजिटल एसेट्स को किस श्रेणी में रखा जाए और उन पर SEC या कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) में से किस नियामक का अधिकार हो।
ट्रंप का कहना है कि स्पष्ट नियम अमेरिका को वित्तीय और तकनीकी नवाचार में चीन तथा अन्य देशों से आगे बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
कानून के सामने चुनौतियां
क्लैरिटी एक्ट को अभी अमेरिकी कांग्रेस में कई राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग करता रहा है जिसमें डिजिटल एसेट्स को लेकर नियामकीय स्थिति स्पष्ट हो। SEC और CFTC की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन उद्योग को अधिक निश्चितता दे सकता है।
हालांकि, कुछ डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों ने राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के क्रिप्टो कारोबार से संभावित लाभ को लेकर चिंता जताई है।
यह मुद्दा ट्रंप के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके परिवार से जुड़े कारोबारी हितों में क्रिप्टो से संबंधित गतिविधियां भी रही हैं।
क्रिप्टो नीति में बदलाव
ट्रंप ने बैठक के दौरान अपनी सरकार की क्रिप्टो नीति में बदलाव को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने क्रिप्टो के खिलाफ चल रही “जंग खत्म कर दी है”। यह बयान उस नियामकीय माहौल से अलग रुख दर्शाता है जिसकी क्रिप्टो कंपनियां लंबे समय से आलोचना करती रही हैं।
बैठक में कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रांग, रॉबिनहुड के सीईओ व्लाद टेनेव, क्रैकन के सह-सीईओ अर्जुन सेठी और इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के सीईओ जेफ्री स्प्रेचर समेत उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल हुए।
अमेरिका चाहता क्रिप्टो बढ़त
अमेरिकी सरकार की योजना केवल बिटकॉइन तक सीमित नहीं है। डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियम बनने से क्रिप्टो एक्सचेंज, बैंक, निवेशक और ब्लॉकचेन कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन डिजिटल एसेट्स को अमेरिका की वित्तीय और तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रहा है।
यदि सरकार भविष्य में अपनी बिटकॉइन होल्डिंग बढ़ाती है, तो अमेरिका खुद डिजिटल एसेट बाजार में एक बड़ा संस्थागत भागीदार बन जाएगा।
फिलहाल ऐसी खरीद को लेकर कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा
अब मुख्य नजर अमेरिकी कांग्रेस और क्लैरिटी एक्ट पर रहेगी। प्रस्तावित कानून को आगे बढ़ाने के लिए सांसदों को क्रिप्टो नियमन से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।
निवेशक अमेरिकी सरकार की बिटकॉइन नीति पर भी नजर रखेंगे। यदि भविष्य में बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद की घोषणा होती है, तो इसका क्रिप्टो बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल ट्रंप की नई क्रिप्टो रणनीति दो प्रमुख दिशाओं पर केंद्रित है—डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियम और अमेरिका की बिटकॉइन स्थिति को मजबूत करना। क्या यह नीति वास्तविक बड़े पैमाने की बिटकॉइन खरीद में बदलती है, इसका फैसला आगे प्रशासन और कांग्रेस के कदमों से होगा।
ट्रंप का क्रिप्टो प्लान तेज, अमेरिका की बिटकॉइन रणनीति पर जोर
Sandeep Patel
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी सरकार की नीति को और आगे बढ़ाते हुए अमेरिका को डिजिटल एसेट्स का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया है।
व्हाइट हाउस में क्रिप्टो उद्योग के प्रमुख अधिकारियों और वित्तीय नियामकों के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार बड़ी मात्रा में बिटकॉइन और अन्य डिजिटल एसेट्स खरीदने पर विचार कर सकती है।
हालांकि, उन्होंने किसी नए खरीद कार्यक्रम की घोषणा नहीं की। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि संभावित खरीद कब शुरू होगी या इसके लिए धन की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
बिटकॉइन खरीद का विकल्प
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका द्वारा अधिक बिटकॉइन रखने का मुद्दा प्रशासन के भीतर चर्चा में रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि वह सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के चेयरमैन पॉल एटकिंस और अन्य अधिकारियों की सिफारिशों पर विचार करेंगे।
अगर अमेरिका खुले बाजार से बड़ी मात्रा में बिटकॉइन खरीदता है, तो यह डिजिटल एसेट बाजार में सरकार की भूमिका को काफी बढ़ा सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने 2025 में स्ट्रैटेजिक बिटकॉइन रिजर्व की स्थापना की थी। इसमें शुरुआत में सरकार द्वारा जब्त किए गए बिटकॉइन को शामिल किया गया था।
क्लैरिटी एक्ट पर जोर
बैठक में ट्रंप ने क्रिप्टो उद्योग के लिए स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कांग्रेस से क्लैरिटी एक्ट को आगे बढ़ाने की अपील की। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अलग-अलग डिजिटल एसेट्स को किस श्रेणी में रखा जाए और उन पर SEC या कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) में से किस नियामक का अधिकार हो।
ट्रंप का कहना है कि स्पष्ट नियम अमेरिका को वित्तीय और तकनीकी नवाचार में चीन तथा अन्य देशों से आगे बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
कानून के सामने चुनौतियां
क्लैरिटी एक्ट को अभी अमेरिकी कांग्रेस में कई राजनीतिक और नीतिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग करता रहा है जिसमें डिजिटल एसेट्स को लेकर नियामकीय स्थिति स्पष्ट हो। SEC और CFTC की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन उद्योग को अधिक निश्चितता दे सकता है।
हालांकि, कुछ डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों ने राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के क्रिप्टो कारोबार से संभावित लाभ को लेकर चिंता जताई है।
यह मुद्दा ट्रंप के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके परिवार से जुड़े कारोबारी हितों में क्रिप्टो से संबंधित गतिविधियां भी रही हैं।
क्रिप्टो नीति में बदलाव
ट्रंप ने बैठक के दौरान अपनी सरकार की क्रिप्टो नीति में बदलाव को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने क्रिप्टो के खिलाफ चल रही “जंग खत्म कर दी है”। यह बयान उस नियामकीय माहौल से अलग रुख दर्शाता है जिसकी क्रिप्टो कंपनियां लंबे समय से आलोचना करती रही हैं।
बैठक में कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रांग, रॉबिनहुड के सीईओ व्लाद टेनेव, क्रैकन के सह-सीईओ अर्जुन सेठी और इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के सीईओ जेफ्री स्प्रेचर समेत उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल हुए।
अमेरिका चाहता क्रिप्टो बढ़त
अमेरिकी सरकार की योजना केवल बिटकॉइन तक सीमित नहीं है। डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियम बनने से क्रिप्टो एक्सचेंज, बैंक, निवेशक और ब्लॉकचेन कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन डिजिटल एसेट्स को अमेरिका की वित्तीय और तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रहा है।
यदि सरकार भविष्य में अपनी बिटकॉइन होल्डिंग बढ़ाती है, तो अमेरिका खुद डिजिटल एसेट बाजार में एक बड़ा संस्थागत भागीदार बन जाएगा।
फिलहाल ऐसी खरीद को लेकर कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा
अब मुख्य नजर अमेरिकी कांग्रेस और क्लैरिटी एक्ट पर रहेगी। प्रस्तावित कानून को आगे बढ़ाने के लिए सांसदों को क्रिप्टो नियमन से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।
निवेशक अमेरिकी सरकार की बिटकॉइन नीति पर भी नजर रखेंगे। यदि भविष्य में बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद की घोषणा होती है, तो इसका क्रिप्टो बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल ट्रंप की नई क्रिप्टो रणनीति दो प्रमुख दिशाओं पर केंद्रित है—डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियम और अमेरिका की बिटकॉइन स्थिति को मजबूत करना। क्या यह नीति वास्तविक बड़े पैमाने की बिटकॉइन खरीद में बदलती है, इसका फैसला आगे प्रशासन और कांग्रेस के कदमों से होगा।
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