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झारखंड में JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएं रद्द, छात्रों की मांग मानी
Digital Desk
झारखंड सरकार ने छात्र आंदोलन के बाद JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएं रद्द कर दीं। 2014 से भर्ती परीक्षाओं की जांच और सुधार समिति के आदेश दिए गए।
छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2014 से अब तक TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए हैं।
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 17 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL द्वारा आयोजित सभी संबंधित भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं पर कार्रवाई का फैसला किया गया।
सरकार ने विवाद को केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री ने 2014 से TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया है। इसके साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक अलग समिति गठित करने की घोषणा भी की गई है।
कैबिनेट ने मांगें मानीं
यह फैसला छात्रों के 24 दिन से जारी आंदोलन के बीच आया। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थी लगातार विरोध कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चल रही CID और SIT जांच में शुरुआती स्तर पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसके बाद कैबिनेट ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया।
2014 से होगी जांच
सरकार ने जांच का दायरा मौजूदा विवाद से आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, CID 2014 से TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं की जांच करेगी।
इसके अलावा कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अलग समिति बनाए जाने की भी रिपोर्ट है। इससे पिछले वर्षों में हुई भर्ती प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
छात्र आंदोलन का असर
JSSC-CGL रद्द करने की मांग लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शामिल थी। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले के बाद 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
छात्र संगठनों ने परीक्षा रद्द करने को अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी अब भी जांच की स्वतंत्रता और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की घोषणा की है।
समिति परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उपाय सुझाएगी। इसमें परीक्षा संचालन, तकनीकी व्यवस्था, एजेंसियों की भूमिका और निगरानी तंत्र जैसे पहलुओं की समीक्षा हो सकती है।
चयनित अभ्यर्थियों की चिंता
परीक्षाएं रद्द होने के बाद उन अभ्यर्थियों के सामने भी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिन्होंने संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर परीक्षा पास की या नियुक्ति हासिल की थी।
सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का क्या होगा और नई परीक्षाओं की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। रद्द की गई परीक्षाओं के लिए नई तारीख, पाठ्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी आधिकारिक दिशा-निर्देश का इंतजार रहेगा।
CBI जांच की मांग कायम
सरकार के फैसले से छात्रों की कई प्रमुख मांगें पूरी हुई हैं, लेकिन CBI जांच की मांग को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने भर्ती विवाद की स्वतंत्र जांच की मांग जारी रखी है।
इस बीच परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों की ओर से भी अलग प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। इससे सरकार के सामने पारदर्शिता के साथ-साथ प्रभावित उम्मीदवारों के हितों को संतुलित करने की चुनौती रहेगी।
अब आगे क्या होगा
अब झारखंड सरकार के सामने तीन प्रमुख काम हैं—2014 से जुड़ी परीक्षाओं की जांच पूरी करना, भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत सुधार लागू करना और रद्द परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था तैयार करना। JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों को नई परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया का स्पष्ट कार्यक्रम मिलने का इंतजार रहेगा। जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि कथित अनियमितताओं के लिए किन लोगों या संस्थाओं की जिम्मेदारी तय होती है।
झारखंड में JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएं रद्द, छात्रों की मांग मानी
Digital Desk
छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2014 से अब तक TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए हैं।
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 17 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL द्वारा आयोजित सभी संबंधित भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं पर कार्रवाई का फैसला किया गया।
सरकार ने विवाद को केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री ने 2014 से TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया है। इसके साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक अलग समिति गठित करने की घोषणा भी की गई है।
कैबिनेट ने मांगें मानीं
यह फैसला छात्रों के 24 दिन से जारी आंदोलन के बीच आया। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थी लगातार विरोध कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चल रही CID और SIT जांच में शुरुआती स्तर पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसके बाद कैबिनेट ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया।
2014 से होगी जांच
सरकार ने जांच का दायरा मौजूदा विवाद से आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, CID 2014 से TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं की जांच करेगी।
इसके अलावा कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अलग समिति बनाए जाने की भी रिपोर्ट है। इससे पिछले वर्षों में हुई भर्ती प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
छात्र आंदोलन का असर
JSSC-CGL रद्द करने की मांग लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शामिल थी। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले के बाद 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
छात्र संगठनों ने परीक्षा रद्द करने को अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी अब भी जांच की स्वतंत्रता और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की घोषणा की है।
समिति परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उपाय सुझाएगी। इसमें परीक्षा संचालन, तकनीकी व्यवस्था, एजेंसियों की भूमिका और निगरानी तंत्र जैसे पहलुओं की समीक्षा हो सकती है।
चयनित अभ्यर्थियों की चिंता
परीक्षाएं रद्द होने के बाद उन अभ्यर्थियों के सामने भी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिन्होंने संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर परीक्षा पास की या नियुक्ति हासिल की थी।
सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का क्या होगा और नई परीक्षाओं की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी। रद्द की गई परीक्षाओं के लिए नई तारीख, पाठ्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी आधिकारिक दिशा-निर्देश का इंतजार रहेगा।
CBI जांच की मांग कायम
सरकार के फैसले से छात्रों की कई प्रमुख मांगें पूरी हुई हैं, लेकिन CBI जांच की मांग को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने भर्ती विवाद की स्वतंत्र जांच की मांग जारी रखी है।
इस बीच परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों की ओर से भी अलग प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। इससे सरकार के सामने पारदर्शिता के साथ-साथ प्रभावित उम्मीदवारों के हितों को संतुलित करने की चुनौती रहेगी।
अब आगे क्या होगा
अब झारखंड सरकार के सामने तीन प्रमुख काम हैं—2014 से जुड़ी परीक्षाओं की जांच पूरी करना, भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत सुधार लागू करना और रद्द परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था तैयार करना। JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों को नई परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया का स्पष्ट कार्यक्रम मिलने का इंतजार रहेगा। जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि कथित अनियमितताओं के लिए किन लोगों या संस्थाओं की जिम्मेदारी तय होती है।
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