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नासा का आर्टेमिस II मिशन सफल: 4 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाकर प्रशांत महासागर में सुरक्षित लौटे
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने 11.17 लाख किमी की यात्रा पूरी की, चंद्र मिशन ने भविष्य की मानव लैंडिंग योजनाओं को दी नई दिशा
नासा के NASA के आर्टेमिस II मिशन ने अंतरिक्ष इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। चंद्रमा के करीब जाकर लौटे चार अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंड कर चुके हैं। यह स्प्लैशडाउन 11 अप्रैल की सुबह सैन डिएगो तट के पास हुआ।
मिशन में उपयोग किया गया Orion spacecraft लगभग 11.17 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर पृथ्वी पर वापस लौटा। वापसी के दौरान यान ने अत्यधिक तापमान और गति जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन सभी तकनीकी सिस्टम सफल साबित हुए।
यह मिशन 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च हुआ था और इसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे—रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हेंसन।
वापसी के दौरान अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ
पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय यान की गति लगभग 40,000 से 42,000 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। घर्षण के कारण बाहरी तापमान लगभग 3,000 डिग्री फ़ारेनहाइट तक बढ़ गया, जिससे कैप्सूल के चारों ओर प्लाज़्मा की परत बन गई और कुछ समय के लिए संचार पूरी तरह बंद हो गया।
करीब 22,000 फीट की ऊंचाई पर ड्रोग पैराशूट खुले, जिससे यान की गति नियंत्रित हुई। इसके बाद मुख्य पैराशूट सक्रिय हुए और स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार घटकर सुरक्षित स्तर तक पहुंच गई, जिसके बाद समुद्र में सफल लैंडिंग हुई।
50 वर्षों बाद चंद्रमा के इतने करीब पहुंचे इंसान
यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 1972 के Apollo program के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। इस दौरान अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 4,06,778 किलोमीटर दूर तक गया, जो पहले के कई रिकॉर्ड्स से अधिक है।मिशन के दौरान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी ली गईं, जिनमें दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन जैसी संरचनाएँ शामिल हैं।
वैज्ञानिक महत्व और भविष्य की दिशा
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाले लाइफ सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण करना था। यह जांच भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग को और आगे बढ़ाना है और 2028 तक वहां स्थायी बेस स्थापित करने की योजना पर काम जारी है। यह भविष्य में मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा।
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नासा का आर्टेमिस II मिशन सफल: 4 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाकर प्रशांत महासागर में सुरक्षित लौटे
अंतराष्ट्रीय न्यूज
नासा के NASA के आर्टेमिस II मिशन ने अंतरिक्ष इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। चंद्रमा के करीब जाकर लौटे चार अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंड कर चुके हैं। यह स्प्लैशडाउन 11 अप्रैल की सुबह सैन डिएगो तट के पास हुआ।
मिशन में उपयोग किया गया Orion spacecraft लगभग 11.17 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर पृथ्वी पर वापस लौटा। वापसी के दौरान यान ने अत्यधिक तापमान और गति जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन सभी तकनीकी सिस्टम सफल साबित हुए।
यह मिशन 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च हुआ था और इसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे—रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हेंसन।
वापसी के दौरान अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ
पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय यान की गति लगभग 40,000 से 42,000 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। घर्षण के कारण बाहरी तापमान लगभग 3,000 डिग्री फ़ारेनहाइट तक बढ़ गया, जिससे कैप्सूल के चारों ओर प्लाज़्मा की परत बन गई और कुछ समय के लिए संचार पूरी तरह बंद हो गया।
करीब 22,000 फीट की ऊंचाई पर ड्रोग पैराशूट खुले, जिससे यान की गति नियंत्रित हुई। इसके बाद मुख्य पैराशूट सक्रिय हुए और स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार घटकर सुरक्षित स्तर तक पहुंच गई, जिसके बाद समुद्र में सफल लैंडिंग हुई।
50 वर्षों बाद चंद्रमा के इतने करीब पहुंचे इंसान
यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 1972 के Apollo program के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। इस दौरान अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 4,06,778 किलोमीटर दूर तक गया, जो पहले के कई रिकॉर्ड्स से अधिक है।मिशन के दौरान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी ली गईं, जिनमें दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन जैसी संरचनाएँ शामिल हैं।
वैज्ञानिक महत्व और भविष्य की दिशा
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मानव जीवन को सुरक्षित रखने वाले लाइफ सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण करना था। यह जांच भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।नासा का लक्ष्य आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग को और आगे बढ़ाना है और 2028 तक वहां स्थायी बेस स्थापित करने की योजना पर काम जारी है। यह भविष्य में मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा।
