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अब सड़क पर रेस नहीं चलेगी! लेडार कैमरे करेंगे ‘स्पीड’ का हिसाब
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर, बिलासपुर सहित 5 जिलों में हाईटेक स्पीड कैमरे लगाए गए, 100 मीटर दूरी से वाहन की गति पकड़कर ऑटोमैटिक चालान सिस्टम सक्रिय
छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए लेडार (LIDAR) आधारित स्पीड कैमरों की शुरुआत की है। इस नई तकनीक के जरिए अब तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर सीधे ई-चालान की कार्रवाई होगी, जो वाहन मालिकों को घर बैठे मिल जाएगा।पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के पांच जिलों—रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी—में कुल 7 आधुनिक स्पीड कैमरे लगाए गए हैं।
किन इलाकों में लगाए गए कैमरे
राजधानी रायपुर में मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र को निगरानी के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा बिलासपुर बायपास, अंबिकापुर और जगदलपुर के प्रमुख मार्गों पर भी कैमरे स्थापित किए गए हैं। धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र को भी इस योजना में शामिल किया गया है।इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया गया है।
कैसे काम करती है लेडार तकनीक
लेडार तकनीक आधारित ये कैमरे प्रकाश किरणों के माध्यम से वाहनों की गति और दूरी का सटीक आकलन करते हैं। 100 मीटर तक की दूरी से ये कैमरे तेज रफ्तार वाहनों को ट्रैक कर सकते हैं और एक साथ कई वाहनों की निगरानी करने में सक्षम हैं।
जैसे ही कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, सिस्टम स्वतः उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद ई-चालान जनरेट होकर वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेज दिया जाता है।
रात और खराब मौसम में भी निगरानी
इन कैमरों में नाइट विजन और ऑल-वेदर क्षमता मौजूद है, जिससे रात के समय या खराब मौसम में भी ट्रैफिक की सटीक निगरानी संभव है। इससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल टेस्टिंग, जल्द होगी सख्ती
परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त निगरानी में फिलहाल इन कैमरों की टेस्टिंग की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती चरण में लोगों को जागरूक किया जाएगा, जिसके बाद नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अधिकारियों का बयान
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार, यह पहल सड़क हादसों को कम करने और यातायात नियमों के पालन को सख्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तकनीक का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा।
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अब सड़क पर रेस नहीं चलेगी! लेडार कैमरे करेंगे ‘स्पीड’ का हिसाब
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए लेडार (LIDAR) आधारित स्पीड कैमरों की शुरुआत की है। इस नई तकनीक के जरिए अब तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर सीधे ई-चालान की कार्रवाई होगी, जो वाहन मालिकों को घर बैठे मिल जाएगा।पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के पांच जिलों—रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी—में कुल 7 आधुनिक स्पीड कैमरे लगाए गए हैं।
किन इलाकों में लगाए गए कैमरे
राजधानी रायपुर में मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र को निगरानी के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा बिलासपुर बायपास, अंबिकापुर और जगदलपुर के प्रमुख मार्गों पर भी कैमरे स्थापित किए गए हैं। धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र को भी इस योजना में शामिल किया गया है।इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया गया है।
कैसे काम करती है लेडार तकनीक
लेडार तकनीक आधारित ये कैमरे प्रकाश किरणों के माध्यम से वाहनों की गति और दूरी का सटीक आकलन करते हैं। 100 मीटर तक की दूरी से ये कैमरे तेज रफ्तार वाहनों को ट्रैक कर सकते हैं और एक साथ कई वाहनों की निगरानी करने में सक्षम हैं।
जैसे ही कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, सिस्टम स्वतः उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद ई-चालान जनरेट होकर वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेज दिया जाता है।
रात और खराब मौसम में भी निगरानी
इन कैमरों में नाइट विजन और ऑल-वेदर क्षमता मौजूद है, जिससे रात के समय या खराब मौसम में भी ट्रैफिक की सटीक निगरानी संभव है। इससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल टेस्टिंग, जल्द होगी सख्ती
परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त निगरानी में फिलहाल इन कैमरों की टेस्टिंग की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती चरण में लोगों को जागरूक किया जाएगा, जिसके बाद नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अधिकारियों का बयान
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार, यह पहल सड़क हादसों को कम करने और यातायात नियमों के पालन को सख्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तकनीक का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा।
