अमेरिका ने लॉन्च किया आर्टेमिस-II: 1972 के बाद पहली बार इंसान चांद के करीब

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चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिन में चंद्रमा का चक्कर काटकर लौटेंगे, मिशन का उद्देश्य जीवन समर्थन प्रणाली की जांच

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ‘आर्टेमिस-II’ मिशन लॉन्च किया। इस ऐतिहासिक उड़ान में चार अंतरिक्ष यात्री ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) और ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर चांद के पास पहुंचेंगे। यह पहला मौका है जब 1972 के ‘अपोलो-17’ मिशन के बाद कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार करके चंद्रमा के करीब जाएगा। मिशन की कुल अवधि 10 दिन है, जिसमें यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेंगे।

लॉन्चिंग से ठीक एक घंटे पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में तकनीकी खराबी के कारण कुछ मिनटों के लिए चिंता पैदा हुई। यह सिस्टम एस्ट्रोनॉट्स को इमरजेंसी में रॉकेट से सुरक्षित बाहर निकालने का काम करता है। इंजीनियरों ने समस्या को तुरंत हल किया और क्रू को उड़ान के लिए हरी झंडी दी गई। कमांडर रीड वाइजमैन ने कहा, “हम पूरी मानवता की खातिर जा रहे हैं।”

उड़ान के 51 मिनट बाद ओरियन कैप्सूल का सिग्नल अस्थायी रूप से टूट गया, जिससे क्रू का जवाब मिशन कंट्रोल तक नहीं पहुंच पाया। हालांकि, नासा ने समस्या तुरंत हल कर दी और संचार बहाल हो गया। इसके अलावा, लॉन्च के कुछ समय बाद ओरियन के इकलौते टॉयलेट में खराबी आई, जिसे मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच ने ठीक कर दिया।

मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री हैं: कमांडर रीड वाइजमैन, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच, कनाडाई मिशन स्पेशलिस्ट जेरेमी हैनसन और पायलट विक्टर ग्लोवर। विक्टर ग्लोवर चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। क्रिस्टीना कोच इस मिशन में महिला के तौर पर चांद के निकट पहुंचने वाली पहली महिला होंगी।

आर्टेमिस-II मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जाँच करना है। यान चांद की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन यह भविष्य के मानवयुक्त चंद्रमा मिशनों की तैयारी के लिए जरूरी है। मिशन के दौरान क्रू 6,85,000 मील (लगभग 11 लाख किलोमीटर) की दूरी तय करेंगे और चंद्रमा के दूसरी तरफ से अद्वितीय तस्वीरें भेजी जाएंगी।

ओरियन स्पेसक्राफ्ट अपोलो के मुकाबले अधिक आरामदायक और आधुनिक है। इसका व्यास 16.5 फीट है, जिसमें अधिक जगह, उन्नत कंप्यूटिंग पावर, सौर पैनल, एक्सरसाइज मशीनें और उच्च तकनीक वाला टॉयलेट शामिल है। यह आंशिक रूप से पुन: उपयोग योग्य है और भविष्य के मिशनों के लिए पांच और कैप्सूल तैयार किए जा रहे हैं।

नासा का अगला कदम ‘आर्टेमिस-III’ होगा, जिसमें इंसान चांद पर कदम रखेंगे। यदि सब कुछ योजना अनुसार हुआ, तो 2028 में ‘आर्टेमिस-IV’ के माध्यम से इंसान चांद की सतह पर स्थायी रूप से उतरेंगे।

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02 Apr 2026 By ANKITA

अमेरिका ने लॉन्च किया आर्टेमिस-II: 1972 के बाद पहली बार इंसान चांद के करीब

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ‘आर्टेमिस-II’ मिशन लॉन्च किया। इस ऐतिहासिक उड़ान में चार अंतरिक्ष यात्री ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) और ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर चांद के पास पहुंचेंगे। यह पहला मौका है जब 1972 के ‘अपोलो-17’ मिशन के बाद कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार करके चंद्रमा के करीब जाएगा। मिशन की कुल अवधि 10 दिन है, जिसमें यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेंगे।

लॉन्चिंग से ठीक एक घंटे पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में तकनीकी खराबी के कारण कुछ मिनटों के लिए चिंता पैदा हुई। यह सिस्टम एस्ट्रोनॉट्स को इमरजेंसी में रॉकेट से सुरक्षित बाहर निकालने का काम करता है। इंजीनियरों ने समस्या को तुरंत हल किया और क्रू को उड़ान के लिए हरी झंडी दी गई। कमांडर रीड वाइजमैन ने कहा, “हम पूरी मानवता की खातिर जा रहे हैं।”

उड़ान के 51 मिनट बाद ओरियन कैप्सूल का सिग्नल अस्थायी रूप से टूट गया, जिससे क्रू का जवाब मिशन कंट्रोल तक नहीं पहुंच पाया। हालांकि, नासा ने समस्या तुरंत हल कर दी और संचार बहाल हो गया। इसके अलावा, लॉन्च के कुछ समय बाद ओरियन के इकलौते टॉयलेट में खराबी आई, जिसे मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच ने ठीक कर दिया।

मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री हैं: कमांडर रीड वाइजमैन, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच, कनाडाई मिशन स्पेशलिस्ट जेरेमी हैनसन और पायलट विक्टर ग्लोवर। विक्टर ग्लोवर चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। क्रिस्टीना कोच इस मिशन में महिला के तौर पर चांद के निकट पहुंचने वाली पहली महिला होंगी।

आर्टेमिस-II मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जाँच करना है। यान चांद की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन यह भविष्य के मानवयुक्त चंद्रमा मिशनों की तैयारी के लिए जरूरी है। मिशन के दौरान क्रू 6,85,000 मील (लगभग 11 लाख किलोमीटर) की दूरी तय करेंगे और चंद्रमा के दूसरी तरफ से अद्वितीय तस्वीरें भेजी जाएंगी।

ओरियन स्पेसक्राफ्ट अपोलो के मुकाबले अधिक आरामदायक और आधुनिक है। इसका व्यास 16.5 फीट है, जिसमें अधिक जगह, उन्नत कंप्यूटिंग पावर, सौर पैनल, एक्सरसाइज मशीनें और उच्च तकनीक वाला टॉयलेट शामिल है। यह आंशिक रूप से पुन: उपयोग योग्य है और भविष्य के मिशनों के लिए पांच और कैप्सूल तैयार किए जा रहे हैं।

नासा का अगला कदम ‘आर्टेमिस-III’ होगा, जिसमें इंसान चांद पर कदम रखेंगे। यदि सब कुछ योजना अनुसार हुआ, तो 2028 में ‘आर्टेमिस-IV’ के माध्यम से इंसान चांद की सतह पर स्थायी रूप से उतरेंगे।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nasas-artemis-ii-mission-successfully-launches-humans-near-the-moon-for/article-49913

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