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NEET-UG पेपरलीक केस: सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, याचिका में की गई NTA को हटाने की मांग
नेशनल डेस्क
NEET-UG पेपरलीक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिका में NTA हटाने, नई संस्था बनाने और CBI जांच की मांग की गई है। परीक्षा दोबारा कराने पर जोर।
NEET-UG पेपर लीक का मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में परीक्षा कराने वाली संस्था, National Testing Agency (NTA) को हटाने की मांग की गई है और इसके स्थान पर एक नई स्वतंत्र संस्था बनाने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका Federation of All India Medical Association (FAIMA) द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसमें पूरे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर पहले से ही पूरे देश में विवाद और छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है।
याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि केवल जांच या छोटे सुधार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरी प्रणाली को बदलने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि NTA को या तो पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए या इसमें व्यापक स्तर पर संरचनात्मक परिवर्तन किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, एक नई हाई-टेक और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग (NEIC) का नाम दिया जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक यह नई संस्था स्थापित नहीं होती, तब तक परीक्षा की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की जानी चाहिए, जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हों। इस समिति में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल करने की भी मांग की गई है ताकि पेपर की सुरक्षा और तकनीकी जांच को मजबूत किया जा सके।
इसके अलावा, याचिका में NEET-UG 2026 परीक्षा को फिर से कराने की अपील भी की गई है। ये कहा गया है कि पुनः परीक्षा कराने की प्रक्रिया कोर्ट की नजर में होनी चाहिए और प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए डिजिटल लॉक सिस्टम को अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए पूरी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी CBT मोड में आयोजित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि पेपर की आवाजाही को खत्म किया जा सके और लीक का जोखिम कम हो सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं और इन्हें केवल तकनीकी सुधारों से नहीं, बल्कि पूरे ढांचे को बदलकर ही ठीक किया जा सकता है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब राजस्थान में पेपर लीक की शिकायतों के बाद परीक्षा को लेकर कार्रवाई शुरू की गई। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था, जिससे पूरे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू परीक्षा में शामिल किए गए, जिससे मामला और गंभीर बन गया।
NEET-UG परीक्षा में इस बार करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था, और पेपर लीक की खबर ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फिलहाल, केंद्र और परीक्षा एजेंसियों की तरफ से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस और नाराजगी साफ नजर आ रही है। अगले दिनों में यह मामला और बड़ा हो सकता है, क्योंकि इसमें सिस्टम सुधार और परीक्षा फिर से कराने की मांग सीधे तौर पर रखी गई है।
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NEET-UG पेपरलीक केस: सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, याचिका में की गई NTA को हटाने की मांग
नेशनल डेस्क
NEET-UG पेपर लीक का मामला अब देश की सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में परीक्षा कराने वाली संस्था, National Testing Agency (NTA) को हटाने की मांग की गई है और इसके स्थान पर एक नई स्वतंत्र संस्था बनाने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका Federation of All India Medical Association (FAIMA) द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसमें पूरे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर पहले से ही पूरे देश में विवाद और छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है।
याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि केवल जांच या छोटे सुधार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरी प्रणाली को बदलने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि NTA को या तो पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए या इसमें व्यापक स्तर पर संरचनात्मक परिवर्तन किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, एक नई हाई-टेक और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग (NEIC) का नाम दिया जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक यह नई संस्था स्थापित नहीं होती, तब तक परीक्षा की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा की जानी चाहिए, जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हों। इस समिति में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल करने की भी मांग की गई है ताकि पेपर की सुरक्षा और तकनीकी जांच को मजबूत किया जा सके।
इसके अलावा, याचिका में NEET-UG 2026 परीक्षा को फिर से कराने की अपील भी की गई है। ये कहा गया है कि पुनः परीक्षा कराने की प्रक्रिया कोर्ट की नजर में होनी चाहिए और प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए डिजिटल लॉक सिस्टम को अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए पूरी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित यानी CBT मोड में आयोजित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि पेपर की आवाजाही को खत्म किया जा सके और लीक का जोखिम कम हो सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं और इन्हें केवल तकनीकी सुधारों से नहीं, बल्कि पूरे ढांचे को बदलकर ही ठीक किया जा सकता है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब राजस्थान में पेपर लीक की शिकायतों के बाद परीक्षा को लेकर कार्रवाई शुरू की गई। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था, जिससे पूरे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू परीक्षा में शामिल किए गए, जिससे मामला और गंभीर बन गया।
NEET-UG परीक्षा में इस बार करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था, और पेपर लीक की खबर ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फिलहाल, केंद्र और परीक्षा एजेंसियों की तरफ से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस और नाराजगी साफ नजर आ रही है। अगले दिनों में यह मामला और बड़ा हो सकता है, क्योंकि इसमें सिस्टम सुधार और परीक्षा फिर से कराने की मांग सीधे तौर पर रखी गई है।
