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इमरान खान अस्पताल ट्रांसफर याचिका पर पाक SC की रजिस्ट्री ने लगाई आपत्ति
Sandeep Patel
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इमरान खान के अस्पताल ट्रांसफर आदेश के खिलाफ सरकार की पुनर्विचार याचिका प्रक्रियात्मक खामियों के चलते लौटा दी।
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने के आदेश के खिलाफ दायर सरकार की पुनर्विचार याचिका लौटा दी है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ प्रक्रियात्मक कमियों और दस्तावेजों से जुड़ी आपत्तियां दर्ज की हैं।
यह याचिका इस्लामाबाद के चीफ कमिश्नर की ओर से 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, दस्तावेजों की कमी और पेपर बुक के अधूरे होने जैसी खामियां सामने आईं।
याचिका लौटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया है। संबंधित अधिकारी आपत्तियों को दूर करने के बाद याचिका दोबारा दाखिल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 18 अगस्त को अधिकारियों को इमरान खान को अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था।
अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और खान के निजी चिकित्सक को शामिल करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी निर्देश दिया था।
आदेश के तहत निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी व्यवस्थाओं के अनुसार खान को 16 सितंबर तक अस्पताल में रहने की अनुमति दी गई थी।
यह आदेश जेल में खान की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक उनकी पहुंच को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच आया था।
सरकार ने आदेश को चुनौती दी
शहबाज शरीफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की। इस मामले में इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल नावेद हयात मलिक के माध्यम से याचिका दायर की गई।
सरकार ने तर्क दिया कि अदालत का अंतरिम आदेश खान को उनके द्वारा मांगी गई राहत लगभग अंतिम रूप से देने के समान है।
सरकार ने निजी अस्पताल में किसी कैदी के इलाज को लेकर भी सवाल उठाए। उसका कहना है कि जेल नियमों के तहत सभी कैदियों के लिए चिकित्सा उपचार की निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए।
रजिस्ट्री ने बताईं खामियां
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पुनर्विचार याचिका में दाखिल दस्तावेजों से जुड़ी कमियां बताईं।
इनमें कागजी कार्रवाई की कमी और अधूरी पेपर बुक जैसी प्रक्रियात्मक आपत्तियां शामिल हैं।
रजिस्ट्री की कार्रवाई को अदालत द्वारा सरकार की दलीलों पर फैसला नहीं माना जा सकता। सरकार आपत्तियों को दूर करके याचिका फिर से दाखिल कर सकती है।
इसलिए इमरान खान के अस्पताल ट्रांसफर को लेकर कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।
इमरान की सेहत पर नजर
जेल में बंद इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति लंबे समय से पाकिस्तान में राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
पूर्व प्रधानमंत्री 2023 से हिरासत में हैं और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में बने हुए हैं। उनके परिवार और पार्टी ने कई बार विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा और बेहतर इलाज की मांग की है।
खान के समर्थकों ने सरकार पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सरकार का कहना है कि वह खान के जरूरी इलाज के खिलाफ नहीं है, लेकिन अदालत द्वारा निर्धारित निजी अस्पताल में स्थानांतरण की व्यवस्था पर उसकी आपत्ति है।
निजी अस्पताल बना विवाद का केंद्र
इस मामले में इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भी विवाद का प्रमुख केंद्र बन गया है।
सरकार का तर्क है कि किसी कैदी को निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देने से जेल नियमों के तहत जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, सरकार को आशंका है कि इससे अन्य कैदी भी समान राहत की मांग कर सकते हैं।
सरकार चाहती है कि खान का इलाज निर्धारित जेल और चिकित्सा प्रक्रियाओं के तहत हो।
इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश में खान को चिकित्सकीय जांच और इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था।
PTI की नजर मामले पर
रजिस्ट्री के ताजा कदम पर PTI और इमरान खान के समर्थकों की नजर बनी हुई है।
खान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ चल रहे कई कानूनी मामलों के कारण उनकी चिकित्सा और जेल में रहने की परिस्थितियां लगातार राजनीतिक विवाद का विषय रही हैं।
अस्पताल स्थानांतरण में किसी भी देरी का असर केवल कानूनी प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
कानूनी रास्ता अभी खुला
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा याचिका लौटाए जाने के बाद सरकार के पास इसे दोबारा दाखिल करने का विकल्प मौजूद है।
सरकार आपत्तियों को दूर करने के बाद पुनर्विचार याचिका फिर से पेश कर सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं और सरकार की दलीलों की merits पर विचार किया जाए या नहीं।
फिलहाल इमरान खान का इलाज, जेल में उनकी चिकित्सा सुविधा और अदालत से मिली राहत के मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। अब शहबाज शरीफ सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई यह तय करेगी कि इमरान खान अस्पताल ट्रांसफर मामले में उसकी चुनौती सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वास्तविक न्यायिक सुनवाई तक पहुंचती है या नहीं।
इमरान खान अस्पताल ट्रांसफर याचिका पर पाक SC की रजिस्ट्री ने लगाई आपत्ति
Sandeep Patel
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने के आदेश के खिलाफ दायर सरकार की पुनर्विचार याचिका लौटा दी है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ प्रक्रियात्मक कमियों और दस्तावेजों से जुड़ी आपत्तियां दर्ज की हैं।
यह याचिका इस्लामाबाद के चीफ कमिश्नर की ओर से 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, दस्तावेजों की कमी और पेपर बुक के अधूरे होने जैसी खामियां सामने आईं।
याचिका लौटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया है। संबंधित अधिकारी आपत्तियों को दूर करने के बाद याचिका दोबारा दाखिल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 18 अगस्त को अधिकारियों को इमरान खान को अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था।
अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और खान के निजी चिकित्सक को शामिल करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी निर्देश दिया था।
आदेश के तहत निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी व्यवस्थाओं के अनुसार खान को 16 सितंबर तक अस्पताल में रहने की अनुमति दी गई थी।
यह आदेश जेल में खान की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक उनकी पहुंच को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच आया था।
सरकार ने आदेश को चुनौती दी
शहबाज शरीफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की। इस मामले में इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल नावेद हयात मलिक के माध्यम से याचिका दायर की गई।
सरकार ने तर्क दिया कि अदालत का अंतरिम आदेश खान को उनके द्वारा मांगी गई राहत लगभग अंतिम रूप से देने के समान है।
सरकार ने निजी अस्पताल में किसी कैदी के इलाज को लेकर भी सवाल उठाए। उसका कहना है कि जेल नियमों के तहत सभी कैदियों के लिए चिकित्सा उपचार की निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए।
रजिस्ट्री ने बताईं खामियां
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पुनर्विचार याचिका में दाखिल दस्तावेजों से जुड़ी कमियां बताईं।
इनमें कागजी कार्रवाई की कमी और अधूरी पेपर बुक जैसी प्रक्रियात्मक आपत्तियां शामिल हैं।
रजिस्ट्री की कार्रवाई को अदालत द्वारा सरकार की दलीलों पर फैसला नहीं माना जा सकता। सरकार आपत्तियों को दूर करके याचिका फिर से दाखिल कर सकती है।
इसलिए इमरान खान के अस्पताल ट्रांसफर को लेकर कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।
इमरान की सेहत पर नजर
जेल में बंद इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति लंबे समय से पाकिस्तान में राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
पूर्व प्रधानमंत्री 2023 से हिरासत में हैं और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में बने हुए हैं। उनके परिवार और पार्टी ने कई बार विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा और बेहतर इलाज की मांग की है।
खान के समर्थकों ने सरकार पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सरकार का कहना है कि वह खान के जरूरी इलाज के खिलाफ नहीं है, लेकिन अदालत द्वारा निर्धारित निजी अस्पताल में स्थानांतरण की व्यवस्था पर उसकी आपत्ति है।
निजी अस्पताल बना विवाद का केंद्र
इस मामले में इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भी विवाद का प्रमुख केंद्र बन गया है।
सरकार का तर्क है कि किसी कैदी को निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देने से जेल नियमों के तहत जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, सरकार को आशंका है कि इससे अन्य कैदी भी समान राहत की मांग कर सकते हैं।
सरकार चाहती है कि खान का इलाज निर्धारित जेल और चिकित्सा प्रक्रियाओं के तहत हो।
इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश में खान को चिकित्सकीय जांच और इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया था।
PTI की नजर मामले पर
रजिस्ट्री के ताजा कदम पर PTI और इमरान खान के समर्थकों की नजर बनी हुई है।
खान की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ चल रहे कई कानूनी मामलों के कारण उनकी चिकित्सा और जेल में रहने की परिस्थितियां लगातार राजनीतिक विवाद का विषय रही हैं।
अस्पताल स्थानांतरण में किसी भी देरी का असर केवल कानूनी प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
कानूनी रास्ता अभी खुला
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा याचिका लौटाए जाने के बाद सरकार के पास इसे दोबारा दाखिल करने का विकल्प मौजूद है।
सरकार आपत्तियों को दूर करने के बाद पुनर्विचार याचिका फिर से पेश कर सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं और सरकार की दलीलों की merits पर विचार किया जाए या नहीं।
फिलहाल इमरान खान का इलाज, जेल में उनकी चिकित्सा सुविधा और अदालत से मिली राहत के मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। अब शहबाज शरीफ सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई यह तय करेगी कि इमरान खान अस्पताल ट्रांसफर मामले में उसकी चुनौती सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वास्तविक न्यायिक सुनवाई तक पहुंचती है या नहीं।
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