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Parliament Monsoon Session: विपक्ष के हंगामे से संसद ठप, पेपर लीक बिल पेश करने की तैयारी
Digital Desk
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित, बिहार मतदाता सूची और अन्य मुद्दों पर विपक्ष का विरोध; सरकार आज सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में
संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के विरोध और नारेबाजी के चलते पहले दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करने का फैसला लिया गया। इस बीच केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेश करेंगे।
सुबह 11 बजे संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की और विपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें जनता से जुड़े सवालों का जवाब सरकार देती है और इसे सुचारू रूप से चलना चाहिए।
हालांकि विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। स्थिति सामान्य न होने पर लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। बाद में जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो हंगामा फिर जारी रहा, जिसके बाद अध्यक्ष ने पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।
राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। उपसभापति हरिवंश ने बताया कि उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर करीब 30 स्थगन प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए उन्होंने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन पर चर्चा की मांग को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए इस पर तत्काल चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसके बावजूद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। पहले राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई, लेकिन दोबारा बैठक शुरू होने पर भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। लगातार हंगामे के कारण अंततः राज्यसभा की कार्यवाही भी पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच राज्यसभा में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 के कार्यान्वयन से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर दिया। हालांकि विपक्ष के शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
लोकसभा में भी कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद विपक्ष ने बिहार में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व से जुड़े पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा की मांग उठाई। अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विरोध कर रहे सदस्यों से सदन चलने देने का अनुरोध किया। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी कहा कि अनुसूचित जनजातियों से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा का विषय है और विपक्ष को इसे बाधित नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद विरोध जारी रहा और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यह विधेयक हाल के वर्षों में सामने आए विभिन्न परीक्षा पेपर लीक मामलों को देखते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर उपयोग, नकल और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, संगठित गिरोहों के खिलाफ कड़े प्रावधान और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कई अहम बदलाव शामिल किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का विश्वास मजबूत करना है।
संसद का मानसून सत्र इस बार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों के कारण पहले से ही चर्चा में है। सरकार शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल सुरक्षा और विभिन्न प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा कराना चाहती है, जबकि विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने से महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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Parliament Monsoon Session: विपक्ष के हंगामे से संसद ठप, पेपर लीक बिल पेश करने की तैयारी
Digital Desk
संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के विरोध और नारेबाजी के चलते पहले दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करने का फैसला लिया गया। इस बीच केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेश करेंगे।
सुबह 11 बजे संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने की कोशिश की और विपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें जनता से जुड़े सवालों का जवाब सरकार देती है और इसे सुचारू रूप से चलना चाहिए।
हालांकि विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। स्थिति सामान्य न होने पर लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। बाद में जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो हंगामा फिर जारी रहा, जिसके बाद अध्यक्ष ने पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।
राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला। उपसभापति हरिवंश ने बताया कि उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर करीब 30 स्थगन प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए उन्होंने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन पर चर्चा की मांग को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए इस पर तत्काल चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसके बावजूद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। पहले राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई, लेकिन दोबारा बैठक शुरू होने पर भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। लगातार हंगामे के कारण अंततः राज्यसभा की कार्यवाही भी पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच राज्यसभा में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023 के कार्यान्वयन से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर दिया। हालांकि विपक्ष के शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
लोकसभा में भी कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद विपक्ष ने बिहार में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व से जुड़े पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा की मांग उठाई। अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विरोध कर रहे सदस्यों से सदन चलने देने का अनुरोध किया। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी कहा कि अनुसूचित जनजातियों से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा का विषय है और विपक्ष को इसे बाधित नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद विरोध जारी रहा और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यह विधेयक हाल के वर्षों में सामने आए विभिन्न परीक्षा पेपर लीक मामलों को देखते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर उपयोग, नकल और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, संगठित गिरोहों के खिलाफ कड़े प्रावधान और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कई अहम बदलाव शामिल किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का विश्वास मजबूत करना है।
संसद का मानसून सत्र इस बार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों के कारण पहले से ही चर्चा में है। सरकार शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल सुरक्षा और विभिन्न प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा कराना चाहती है, जबकि विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने से महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
