- Hindi News
- देश विदेश
- खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने PM मोदी को न्योता, 4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने PM मोदी को न्योता, 4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम
Digital Desk
तेहरान में राजकीय जनाजे की तैयारियां तेज, करीब 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद; भारत की भागीदारी पर सस्पेंस
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का आधिकारिक न्योता भेजा गया है। यह समारोह 4 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम में तेहरान, कुम और मशहद में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बना सकता है।
इससे पहले यह कार्यक्रम 4 मार्च को आयोजित होना था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब हालात सामान्य होने के बाद इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है। ईरान प्रशासन इस आयोजन को बेहद व्यापक स्तर पर करने की तैयारी में जुटा है, जिसमें सुरक्षा से लेकर भीड़ प्रबंधन तक के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।भारत की ओर से इस कार्यक्रम में कौन शामिल होगा, इस पर अभी संशय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण जरूर भेजा गया है, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी जब ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का निधन हुआ था, तब भारत ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
ईरान में यह परंपरा रही है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के अंतिम संस्कार में विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। खामेनेई का अंतिम संस्कार भी इसी परंपरा के तहत आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन का आकार और सुरक्षा चुनौती कहीं अधिक बड़ी बताई जा रही है। युद्ध के हालात और हालिया तनावों के कारण प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। खामेनेई के दफन स्थल को लेकर भी धार्मिक और रणनीतिक दृष्टि से विशेष तैयारी की गई है। उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा, जो शिया इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। मशहद न केवल ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, बल्कि शिया समुदाय के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र भी है।
अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार को तीन दिन तक सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को सौंपी गई है, जो सुरक्षा और प्रबंधन दोनों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजन को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर तब जब लाखों लोगों के जुटने की संभावना हो। ईरान के इतिहास में इससे पहले 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। वह जनाजा आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है, जिसमें भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति भी बन गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने PM मोदी को न्योता, 4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम
Digital Desk
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का आधिकारिक न्योता भेजा गया है। यह समारोह 4 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम में तेहरान, कुम और मशहद में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बना सकता है।
इससे पहले यह कार्यक्रम 4 मार्च को आयोजित होना था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब हालात सामान्य होने के बाद इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है। ईरान प्रशासन इस आयोजन को बेहद व्यापक स्तर पर करने की तैयारी में जुटा है, जिसमें सुरक्षा से लेकर भीड़ प्रबंधन तक के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।भारत की ओर से इस कार्यक्रम में कौन शामिल होगा, इस पर अभी संशय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण जरूर भेजा गया है, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी जब ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का निधन हुआ था, तब भारत ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
ईरान में यह परंपरा रही है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के अंतिम संस्कार में विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। खामेनेई का अंतिम संस्कार भी इसी परंपरा के तहत आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन का आकार और सुरक्षा चुनौती कहीं अधिक बड़ी बताई जा रही है। युद्ध के हालात और हालिया तनावों के कारण प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। खामेनेई के दफन स्थल को लेकर भी धार्मिक और रणनीतिक दृष्टि से विशेष तैयारी की गई है। उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा, जो शिया इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। मशहद न केवल ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, बल्कि शिया समुदाय के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र भी है।
अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार को तीन दिन तक सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को सौंपी गई है, जो सुरक्षा और प्रबंधन दोनों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजन को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर तब जब लाखों लोगों के जुटने की संभावना हो। ईरान के इतिहास में इससे पहले 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। वह जनाजा आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है, जिसमें भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति भी बन गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
