PM मोदी बोले- ‘दिमागी नक्सल’ को पहचानें, युवाओं को AI से जोड़ें

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लाल किले से प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए AI ट्रेनिंग और फ्री ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान किया, महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों से तेजी की अपील

नई दिल्ली में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर सरकार का रुख सामने रखा। भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर युवाओं, रोजगार, तकनीक और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी तक कई विषय रहे। प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को लेकर कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सली कमजोर पड़े हैं, लेकिन अब वैचारिक स्तर पर समाज को प्रभावित करने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि उन्हें पहचानकर अलग करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक ऐसे तत्व समाज को भ्रमित करने और युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे बड़ी है और युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना जरूरी है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ आने वाले समय की तकनीकी जरूरतों पर भी काफी जोर दिया। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर उन्होंने युवाओं के लिए बड़ा लक्ष्य सामने रखा। पीएम ने कहा कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI से जुड़ी स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार पहले से ही ‘YUVA AI for ALL’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए एक करोड़ लोगों को बेसिक AI स्किल देने की पहल कर चुकी है, जो कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। लाल किले से की गई घोषणा को इसी दिशा में युवाओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ने के बड़े अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आने वाले वर्षों में AI और दूसरी नई तकनीकें रोजगार और काम करने के तरीके को तेजी से बदलेंगी। ऐसे में युवाओं को सिर्फ पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकी क्षमताओं से लैस करना जरूरी होगा। भाषण में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए भी अहम घोषणा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को पहुंचाने की कोशिश होगी, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। बड़े शहरों में कोचिंग संस्थानों की फीस और रहने का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती रहता है, ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से तैयारी का विकल्प बढ़ाने पर सरकार का जोर है।

प्रधानमंत्री के भाषण का एक अहम हिस्सा महिला आरक्षण को लेकर भी रहा। उन्होंने राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण को लेकर राजनीति से ऊपर उठकर तेजी से आगे बढ़ने की अपील की। महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान पहले ही कानून का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हैं। सरकार की ओर से इस व्यवस्था को 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से लागू करने की बात भी सामने आ चुकी है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की जरूरत का मुद्दा भी इसी संदर्भ में सामने आया। इससे पहले अप्रैल में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी महिला आरक्षण को समयबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया था और जनगणना तथा परिसीमन की प्रक्रिया में तेजी की बात कही गई थी। लाल किले के भाषण में युवाओं को लेकर प्रधानमंत्री का फोकस सिर्फ AI तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, रोजगार के बदलते अवसर और देश के विकास में युवा शक्ति की भूमिका को सामने रखा। AI ट्रेनिंग और फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणाओं का एक बड़ा हिस्सा उन युवाओं को ध्यान में रखता है, जो तकनीकी बदलाव और प्रतियोगी परीक्षाओं दोनों के दौर से गुजर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान भाषण के राजनीतिक और सुरक्षा वाले हिस्से में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में देश ने बड़ी प्रगति की है, लेकिन वैचारिक स्तर पर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली सोच से भी निपटना होगा। उन्होंने युवाओं को ऐसे प्रभावों से दूर रखने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में जोड़ने की बात कही। इस बार स्वतंत्रता दिवस संबोधन में तकनीक, आत्मनिर्भरता और युवाओं के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी एक साथ जोड़कर रखा गया। प्रधानमंत्री ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई लक्ष्य गिनाए और कहा कि इसके लिए युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता और देश की आर्थिक ताकत को साथ लेकर चलना होगा। AI के क्षेत्र में पहले से चल रही सरकारी पहलों के बीच एक करोड़ युवाओं की ट्रेनिंग का लक्ष्य अब आने वाले एक साल के कार्यक्रमों में खास महत्व रखता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा से शिक्षा और रोजगार की तैयारी से जुड़ा एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है। महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील और ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर प्रधानमंत्री की टिप्पणी ने भाषण के दो अलग-अलग हिस्सों को राजनीतिक रूप से भी खास बना दिया।

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15 Aug 2026 By Priyanka

PM मोदी बोले- ‘दिमागी नक्सल’ को पहचानें, युवाओं को AI से जोड़ें

भारत

नई दिल्ली में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर सरकार का रुख सामने रखा। भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर युवाओं, रोजगार, तकनीक और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी तक कई विषय रहे। प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को लेकर कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सली कमजोर पड़े हैं, लेकिन अब वैचारिक स्तर पर समाज को प्रभावित करने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि उन्हें पहचानकर अलग करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक ऐसे तत्व समाज को भ्रमित करने और युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे बड़ी है और युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना जरूरी है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ आने वाले समय की तकनीकी जरूरतों पर भी काफी जोर दिया। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर उन्होंने युवाओं के लिए बड़ा लक्ष्य सामने रखा। पीएम ने कहा कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI से जुड़ी स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार पहले से ही ‘YUVA AI for ALL’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए एक करोड़ लोगों को बेसिक AI स्किल देने की पहल कर चुकी है, जो कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। लाल किले से की गई घोषणा को इसी दिशा में युवाओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ने के बड़े अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आने वाले वर्षों में AI और दूसरी नई तकनीकें रोजगार और काम करने के तरीके को तेजी से बदलेंगी। ऐसे में युवाओं को सिर्फ पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकी क्षमताओं से लैस करना जरूरी होगा। भाषण में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए भी अहम घोषणा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसका सीधा फायदा उन छात्रों को पहुंचाने की कोशिश होगी, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। बड़े शहरों में कोचिंग संस्थानों की फीस और रहने का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती रहता है, ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से तैयारी का विकल्प बढ़ाने पर सरकार का जोर है।

प्रधानमंत्री के भाषण का एक अहम हिस्सा महिला आरक्षण को लेकर भी रहा। उन्होंने राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण को लेकर राजनीति से ऊपर उठकर तेजी से आगे बढ़ने की अपील की। महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान पहले ही कानून का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हैं। सरकार की ओर से इस व्यवस्था को 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से लागू करने की बात भी सामने आ चुकी है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में मोदी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की जरूरत का मुद्दा भी इसी संदर्भ में सामने आया। इससे पहले अप्रैल में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी महिला आरक्षण को समयबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया था और जनगणना तथा परिसीमन की प्रक्रिया में तेजी की बात कही गई थी। लाल किले के भाषण में युवाओं को लेकर प्रधानमंत्री का फोकस सिर्फ AI तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, रोजगार के बदलते अवसर और देश के विकास में युवा शक्ति की भूमिका को सामने रखा। AI ट्रेनिंग और फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणाओं का एक बड़ा हिस्सा उन युवाओं को ध्यान में रखता है, जो तकनीकी बदलाव और प्रतियोगी परीक्षाओं दोनों के दौर से गुजर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान भाषण के राजनीतिक और सुरक्षा वाले हिस्से में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में देश ने बड़ी प्रगति की है, लेकिन वैचारिक स्तर पर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली सोच से भी निपटना होगा। उन्होंने युवाओं को ऐसे प्रभावों से दूर रखने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में जोड़ने की बात कही। इस बार स्वतंत्रता दिवस संबोधन में तकनीक, आत्मनिर्भरता और युवाओं के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी एक साथ जोड़कर रखा गया। प्रधानमंत्री ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई लक्ष्य गिनाए और कहा कि इसके लिए युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता और देश की आर्थिक ताकत को साथ लेकर चलना होगा। AI के क्षेत्र में पहले से चल रही सरकारी पहलों के बीच एक करोड़ युवाओं की ट्रेनिंग का लक्ष्य अब आने वाले एक साल के कार्यक्रमों में खास महत्व रखता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा से शिक्षा और रोजगार की तैयारी से जुड़ा एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है। महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील और ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर प्रधानमंत्री की टिप्पणी ने भाषण के दो अलग-अलग हिस्सों को राजनीतिक रूप से भी खास बना दिया।

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