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कोई प्लान नहीं बना? 15-16 अगस्त को MP और छत्तीसगढ़ में ऐसे बिताएं वीकेंड
Digital Desk
देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम, मानसून ड्राइव, परिवार के साथ क्वालिटी टाइम या सुकून भरा रविवार—दो दिन की छुट्टी के लिए तैयार प्लान, जिससे आपका वीकेंड बेकार नहीं जाएगा
15 अगस्त: छुट्टी शुरू होते ही अक्सर सोच बड़ी होती है और दिन देर से उठने, टीवी देखने और यह तय करने में निकल जाता है कि आखिर जाएं कहां। इस स्वतंत्रता दिवस वाले वीकेंड को थोड़ा अलग बनाया जा सकता है। इसके लिए महंगी बुकिंग या लंबी यात्रा जरूरी नहीं है। बस अपने मूड के हिसाब से कोई एक जगह चुनिए और दिन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लीजिए। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए 15 अगस्त शनिवार और 16 अगस्त रविवार को छुट्टी के इन दो दिनों में घूमने, परिवार के साथ समय बिताने और आसपास की जगहों को देखने के कई विकल्प हैं। आज का दिन देशभक्ति और स्थानीय संस्कृति के नाम किया जा सकता है, जबकि रविवार को छोटी मानसून ड्राइव या एक दिन की ऐतिहासिक यात्रा रखी जा सकती है।
15 अगस्त: देशभक्ति के साथ घूमना और स्थानीय स्वाद
सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक: परिवार के साथ मनाएं स्वतंत्रता दिवस
अगर सुबह की परेड या आसपास का ध्वजारोहण कार्यक्रम छूट गया है तो दिन को सिर्फ एक और छुट्टी की तरह न बिताएं। परिवार के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह की झलकियां देख सकते हैं और बच्चों को आजादी से जुड़ी कोई ऐसी कहानी सुना सकते हैं, जो आपके परिवार, शहर या गांव से जुड़ी हो। घर के बुजुर्गों से यह भी पूछा जा सकता है कि उनके बचपन के समय स्कूल, सड़क, यात्रा और संचार की सुविधाएं कैसी थीं। उनकी बातें मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेना भी एक अच्छा तरीका है। कुछ साल बाद परिवार के इतिहास से जुड़ी यह छोटी रिकॉर्डिंग काफी खास हो सकती है।
परिवार के साथ तिरंगे रंग का साधारण खाना बनाया जा सकता है। संविधान की प्रस्तावना पढ़ी जा सकती है या परिवार का हर सदस्य यह बता सकता है कि उसे मिली कौन-सी आजादी सबसे महत्वपूर्ण लगती है और उसके साथ कौन-सी जिम्मेदारी आती है। भोपाल में लाल परेड ग्राउंड पर सुबह 9 बजे राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसमें परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। जो लोग मौके पर नहीं पहुंच सके, वे आधिकारिक माध्यमों से कार्यक्रम की जानकारी और झलकियां देख सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट जानकारी को आगे बढ़ाने से बचना बेहतर रहेगा।
दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक: संग्रहालय और संस्कृति के साथ समय बिताएं
मानसून में दोपहर का समय संग्रहालय, ऐतिहासिक इमारत या आराम से बैठकर लंच करने के लिए बेहतर हो सकता है। भोपाल में मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय या शौर्य स्मारक में से किसी एक जगह का चुनाव किया जा सकता है। एक दिन में सभी जगह देखने की कोशिश न करें। किसी एक स्थान पर दो घंटे आराम से बिताएं और बच्चों को अपनी पसंद की प्रदर्शनी देखने दें।
इंदौर में राजवाड़ा के आसपास पुराने शहर की गलियों और विरासत को देखा जा सकता है। इसके बाद पुराने शहर में खाना खाया जा सकता है। केंद्रीय संग्रहालय भी एक विकल्प है। छुट्टी के दिन भीड़ और बारिश के कारण यात्रा का समय बढ़ सकता है, इसलिए कार्यक्रम को बहुत ज्यादा न भरें।
रायपुर में महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके बाद किसी कैफे, किताबों की दुकान या स्थानीय हस्तशिल्प बाजार का रुख किया जा सकता है। किसी भी जगह जाने से पहले उसके खुलने का समय और प्रवेश व्यवस्था जरूर जांच लें।
शाम 4 से 6.30 बजे तक: मानसून का मजा लें, लेकिन पानी से दूरी रखें
भोपाल में अपर लेक के आसपास घूमना, बोट क्लब क्षेत्र में सैर, शाहपुरा झील का चक्कर या शहर के हरियाली वाले हिस्सों में ड्राइव की जा सकती है। इंदौर में रीजनल पार्क या विरासत और खानपान से जुड़ा छोटा पैदल भ्रमण किया जा सकता है। बारिश में झरने की तरफ जल्दबाजी में जाने के बजाय सुरक्षित जगह पर समय बिताना बेहतर होगा। रायपुर में तेलीबांधा झील या पुरखौती मुक्तांगन का विकल्प चुना जा सकता है। हालांकि मौसम और प्रवेश व्यवस्था पहले देखना जरूरी है। मानसून में झरने और उफनती नदियां देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं, लेकिन फिसलन, अचानक बढ़ता पानी और तेज बहाव खतरनाक हो सकता है। निर्धारित स्थानों से ही पानी देखें। नाले या नदी पार करने, बैरिकेडिंग के आगे जाने या सड़क किनारे सिर्फ फोटो लेने के लिए वाहन खड़ा करने से बचें।
शाम 7 बजे के बाद: रात के खाने में स्थानीय स्वाद जोड़ें
शाम का कार्यक्रम घर से निकलने से पहले तय कर लेना बेहतर है, वरना ट्रैफिक और भीड़ में पूरा समय निकल सकता है। भोपाल में पुराने शहर के खानपान का स्वाद लिया जा सकता है या झील किनारे परिवार के साथ डिनर किया जा सकता है। इंदौर में पहले आराम से खाना खाएं और उसके बाद सराफा में कुछ चुनिंदा स्ट्रीट फूड का स्वाद लें। हर दुकान पर जाने की जरूरत नहीं है। रायपुर में सायाजी रायपुर का ‘चौपाटी क्रेविंग्स’ स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 7 से 23 अगस्त तक चल रहा है। परिवार या दोस्तों के साथ यहां का विकल्प भी रखा जा सकता है। भीड़ को देखते हुए पहले से जानकारी लेना या आरक्षण करना बेहतर रहेगा। अगर बाहर जाने का मन नहीं है तो घर पर परिवार के साथ फिल्म नाइट रख सकते हैं। ‘स्वदेस’, ‘लक्ष्य’, ‘सरदार उधम’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘राजी’ या ‘गांधी’ जैसी फिल्मों के जरिए बच्चों के साथ देश और इतिहास पर बातचीत भी की जा सकती है। फिल्म बच्चों की उम्र के हिसाब से चुनें।
16 अगस्त: रविवार को प्रकृति, विरासत और आराम
सुबह 6.30 से 9.30 बजे तक: भीड़ से पहले निकलें
रविवार की सुबह बाहर घूमने के लिए सबसे अच्छा समय हो सकता है। सुबह जल्दी निकलने पर ट्रैफिक भी कम मिलता है और मौसम भी अपेक्षाकृत बेहतर रहता है। भोपाल में झील किनारे सैर या मौसम और प्रवेश व्यवस्था ठीक रहने पर वन विहार का कार्यक्रम बनाया जा सकता है। पानी और बारिश से बचने की तैयारी रखें। वन्यजीवों को खाना न खिलाएं और प्लास्टिक या खाने का कचरा पीछे न छोड़ें। इंदौर में शहर की सुबह की सैर, किसी पार्क या मौसम सही होने पर रालामंडल का विकल्प रखा जा सकता है। अगर जमीन ज्यादा गीली है तो ट्रैकिंग का कार्यक्रम बदलकर नाश्ता और संग्रहालय किया जा सकता है। रायपुर में सुबह की सैर, एनर्जी पार्क, पुरखौती मुक्तांगन या नंदन वन जंगल सफारी का विकल्प चुना जा सकता है। सफारी या किसी दूसरे स्थल के लिए पहले से टिकट और संचालन की स्थिति देख लें। जरूरी यह नहीं कि एक दिन में पांच जगह देख ली जाएं। एक अच्छी सैर, अच्छा नाश्ता और बिना भागदौड़ के बिताया गया समय रविवार को ज्यादा यादगार बना सकता है।
सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक: एक दिन की यात्रा चुनें, तीन नहीं
भोपाल से: सांची, भीमबेटका, भोजपुर या जगदीशपुर में से कोई एक जगह चुनी जा सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार सांची भोपाल से करीब 48-49 किलोमीटर, भीमबेटका करीब 45 किलोमीटर और भोजपुर लगभग 29 किलोमीटर दूर है। सांची इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और बुजुर्गों के लिए अच्छा विकल्प है। भीमबेटका परिवार के साथ प्राचीन मानव सभ्यता और शैलचित्र देखने के लिए उपयुक्त है। भोजपुर कम दूरी में धार्मिक और ऐतिहासिक अनुभव देता है।
इंदौर से: वास्तुकला और मानसून के खूबसूरत नजारे के लिए मांडू या किले, घाट और हथकरघा परंपरा के लिए महेश्वर जा सकते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार मांडू इंदौर से करीब 95-99 किलोमीटर दूर है। सुबह जल्दी निकलें, सड़क की स्थिति देखें और देर से निकलकर दोनों जगहों को एक ही दिन में कवर करने की कोशिश न करें।
रायपुर से: शहर का विरासत भ्रमण, पुरातत्व और मंदिरों के लिए सिरपुर या लंबी ड्राइव के लिए गंगरेल चुना जा सकता है। छत्तीसगढ़ पर्यटन के अनुसार गंगरेल रायपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर है और मानसून में लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। निर्धारित पर्यटन क्षेत्र में ही रहें और किसी भी जल गतिविधि के संचालन की स्थिति पहले पता कर लें।
शाम 6 से 8 बजे तक: रविवार की शाम हल्की रखें
घर लौटने का समय ऐसा रखें कि सोमवार की शुरुआत थकान के साथ न हो। शाम को परिवार के साथ ‘80 साल का भारत’ थीम पर एक छोटा-सा काम किया जा सकता है। परिवार की पांच ऐसी तस्वीरें चुनें, जो पीढ़ियों के बीच बदलाव दिखाती हों। किसी स्थानीय कारीगर, हथकरघा विक्रेता या छोटे कारोबार से एक सामान खरीदें। सत्यापित स्थानीय संस्था के जरिए किताबें, स्कूल सामग्री या भोजन दान किया जा सकता है। बच्चों से एक कागज पर लिखवाएं—‘25 साल बाद मैं भारत को कैसा देखना चाहता हूं।’ इन पन्नों को संभालकर रखें और किसी आने वाले स्वतंत्रता दिवस पर दोबारा पढ़ें।
चार तैयार प्लान
बच्चों वाले परिवार के लिए: आज संग्रहालय, फिर जल्दी डिनर और देशभक्ति फिल्म। रविवार को सांची, भीमबेटका, सिरपुर या किसी स्थानीय प्रकृति केंद्र का दौरा और शाम को परिवार के साथ यादों का छोटा प्रोजेक्ट।
दोस्तों या कपल के लिए: आज देर से लंच, फिर झील या विरासत क्षेत्र में सैर और स्थानीय खानपान। रविवार को सुबह मानसून ड्राइव, एक ऐतिहासिक जगह और अंधेरा होने से पहले वापसी।
बुजुर्गों के लिए: आज आराम से लंच, संग्रहालय या मंदिर और फिर परिवार के साथ चाय और पुरानी यादों की बातचीत। रविवार को भोजपुर या किसी नजदीकी मंदिर जैसी छोटी धार्मिक यात्रा और जल्दी वापसी।
अगर बारिश ने प्लान बिगाड़ दिया: साथ मिलकर क्षेत्रीय खाना बनाएं, संग्रहालय खुला हो तो वहां जाएं, घर पर फिल्म और पारिवारिक प्रश्नोत्तरी रखें। रविवार को किताबों की दुकान या पुस्तकालय जाएं, इनडोर खेल खेलें, परिवार का इतिहास रिकॉर्ड करें और जल्दी डिनर करें।
घर से निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
• जगह के खुलने का समय, टिकट और पार्किंग की जानकारी सीधे संबंधित स्थल से जांच लें।
• छाता, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और पूरी तरह चार्ज मोबाइल साथ रखें।
• बाहर जाने से पहले सड़क और बारिश से जुड़े अलर्ट देख लें।
• जलभराव वाले अंडरपास, उफनते पुल-पुलिया, झरनों के किनारे और बंद जंगल मार्गों से दूर रहें।
• राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें और कागज या प्लास्टिक के झंडे सड़कों पर न छोड़ें।
सबसे अच्छा लंबा वीकेंड जरूरी नहीं कि वही हो जिसमें सबसे ज्यादा किलोमीटर की यात्रा की जाए। बेहतर वीकेंड वह है जिसमें परिवार के साथ कोई याद बन जाए, स्थानीय कारोबार या कारीगर को थोड़ा फायदा मिले और हर कोई सुरक्षित घर लौटे।
कोई प्लान नहीं बना? 15-16 अगस्त को MP और छत्तीसगढ़ में ऐसे बिताएं वीकेंड
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15 अगस्त: छुट्टी शुरू होते ही अक्सर सोच बड़ी होती है और दिन देर से उठने, टीवी देखने और यह तय करने में निकल जाता है कि आखिर जाएं कहां। इस स्वतंत्रता दिवस वाले वीकेंड को थोड़ा अलग बनाया जा सकता है। इसके लिए महंगी बुकिंग या लंबी यात्रा जरूरी नहीं है। बस अपने मूड के हिसाब से कोई एक जगह चुनिए और दिन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लीजिए। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए 15 अगस्त शनिवार और 16 अगस्त रविवार को छुट्टी के इन दो दिनों में घूमने, परिवार के साथ समय बिताने और आसपास की जगहों को देखने के कई विकल्प हैं। आज का दिन देशभक्ति और स्थानीय संस्कृति के नाम किया जा सकता है, जबकि रविवार को छोटी मानसून ड्राइव या एक दिन की ऐतिहासिक यात्रा रखी जा सकती है।
15 अगस्त: देशभक्ति के साथ घूमना और स्थानीय स्वाद
सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक: परिवार के साथ मनाएं स्वतंत्रता दिवस
अगर सुबह की परेड या आसपास का ध्वजारोहण कार्यक्रम छूट गया है तो दिन को सिर्फ एक और छुट्टी की तरह न बिताएं। परिवार के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह की झलकियां देख सकते हैं और बच्चों को आजादी से जुड़ी कोई ऐसी कहानी सुना सकते हैं, जो आपके परिवार, शहर या गांव से जुड़ी हो। घर के बुजुर्गों से यह भी पूछा जा सकता है कि उनके बचपन के समय स्कूल, सड़क, यात्रा और संचार की सुविधाएं कैसी थीं। उनकी बातें मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेना भी एक अच्छा तरीका है। कुछ साल बाद परिवार के इतिहास से जुड़ी यह छोटी रिकॉर्डिंग काफी खास हो सकती है।
परिवार के साथ तिरंगे रंग का साधारण खाना बनाया जा सकता है। संविधान की प्रस्तावना पढ़ी जा सकती है या परिवार का हर सदस्य यह बता सकता है कि उसे मिली कौन-सी आजादी सबसे महत्वपूर्ण लगती है और उसके साथ कौन-सी जिम्मेदारी आती है। भोपाल में लाल परेड ग्राउंड पर सुबह 9 बजे राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसमें परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। जो लोग मौके पर नहीं पहुंच सके, वे आधिकारिक माध्यमों से कार्यक्रम की जानकारी और झलकियां देख सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट जानकारी को आगे बढ़ाने से बचना बेहतर रहेगा।
दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक: संग्रहालय और संस्कृति के साथ समय बिताएं
मानसून में दोपहर का समय संग्रहालय, ऐतिहासिक इमारत या आराम से बैठकर लंच करने के लिए बेहतर हो सकता है। भोपाल में मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय या शौर्य स्मारक में से किसी एक जगह का चुनाव किया जा सकता है। एक दिन में सभी जगह देखने की कोशिश न करें। किसी एक स्थान पर दो घंटे आराम से बिताएं और बच्चों को अपनी पसंद की प्रदर्शनी देखने दें।
इंदौर में राजवाड़ा के आसपास पुराने शहर की गलियों और विरासत को देखा जा सकता है। इसके बाद पुराने शहर में खाना खाया जा सकता है। केंद्रीय संग्रहालय भी एक विकल्प है। छुट्टी के दिन भीड़ और बारिश के कारण यात्रा का समय बढ़ सकता है, इसलिए कार्यक्रम को बहुत ज्यादा न भरें।
रायपुर में महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके बाद किसी कैफे, किताबों की दुकान या स्थानीय हस्तशिल्प बाजार का रुख किया जा सकता है। किसी भी जगह जाने से पहले उसके खुलने का समय और प्रवेश व्यवस्था जरूर जांच लें।
शाम 4 से 6.30 बजे तक: मानसून का मजा लें, लेकिन पानी से दूरी रखें
भोपाल में अपर लेक के आसपास घूमना, बोट क्लब क्षेत्र में सैर, शाहपुरा झील का चक्कर या शहर के हरियाली वाले हिस्सों में ड्राइव की जा सकती है। इंदौर में रीजनल पार्क या विरासत और खानपान से जुड़ा छोटा पैदल भ्रमण किया जा सकता है। बारिश में झरने की तरफ जल्दबाजी में जाने के बजाय सुरक्षित जगह पर समय बिताना बेहतर होगा। रायपुर में तेलीबांधा झील या पुरखौती मुक्तांगन का विकल्प चुना जा सकता है। हालांकि मौसम और प्रवेश व्यवस्था पहले देखना जरूरी है। मानसून में झरने और उफनती नदियां देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं, लेकिन फिसलन, अचानक बढ़ता पानी और तेज बहाव खतरनाक हो सकता है। निर्धारित स्थानों से ही पानी देखें। नाले या नदी पार करने, बैरिकेडिंग के आगे जाने या सड़क किनारे सिर्फ फोटो लेने के लिए वाहन खड़ा करने से बचें।
शाम 7 बजे के बाद: रात के खाने में स्थानीय स्वाद जोड़ें
शाम का कार्यक्रम घर से निकलने से पहले तय कर लेना बेहतर है, वरना ट्रैफिक और भीड़ में पूरा समय निकल सकता है। भोपाल में पुराने शहर के खानपान का स्वाद लिया जा सकता है या झील किनारे परिवार के साथ डिनर किया जा सकता है। इंदौर में पहले आराम से खाना खाएं और उसके बाद सराफा में कुछ चुनिंदा स्ट्रीट फूड का स्वाद लें। हर दुकान पर जाने की जरूरत नहीं है। रायपुर में सायाजी रायपुर का ‘चौपाटी क्रेविंग्स’ स्ट्रीट फूड फेस्टिवल 7 से 23 अगस्त तक चल रहा है। परिवार या दोस्तों के साथ यहां का विकल्प भी रखा जा सकता है। भीड़ को देखते हुए पहले से जानकारी लेना या आरक्षण करना बेहतर रहेगा। अगर बाहर जाने का मन नहीं है तो घर पर परिवार के साथ फिल्म नाइट रख सकते हैं। ‘स्वदेस’, ‘लक्ष्य’, ‘सरदार उधम’, ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, ‘राजी’ या ‘गांधी’ जैसी फिल्मों के जरिए बच्चों के साथ देश और इतिहास पर बातचीत भी की जा सकती है। फिल्म बच्चों की उम्र के हिसाब से चुनें।
16 अगस्त: रविवार को प्रकृति, विरासत और आराम
सुबह 6.30 से 9.30 बजे तक: भीड़ से पहले निकलें
रविवार की सुबह बाहर घूमने के लिए सबसे अच्छा समय हो सकता है। सुबह जल्दी निकलने पर ट्रैफिक भी कम मिलता है और मौसम भी अपेक्षाकृत बेहतर रहता है। भोपाल में झील किनारे सैर या मौसम और प्रवेश व्यवस्था ठीक रहने पर वन विहार का कार्यक्रम बनाया जा सकता है। पानी और बारिश से बचने की तैयारी रखें। वन्यजीवों को खाना न खिलाएं और प्लास्टिक या खाने का कचरा पीछे न छोड़ें। इंदौर में शहर की सुबह की सैर, किसी पार्क या मौसम सही होने पर रालामंडल का विकल्प रखा जा सकता है। अगर जमीन ज्यादा गीली है तो ट्रैकिंग का कार्यक्रम बदलकर नाश्ता और संग्रहालय किया जा सकता है। रायपुर में सुबह की सैर, एनर्जी पार्क, पुरखौती मुक्तांगन या नंदन वन जंगल सफारी का विकल्प चुना जा सकता है। सफारी या किसी दूसरे स्थल के लिए पहले से टिकट और संचालन की स्थिति देख लें। जरूरी यह नहीं कि एक दिन में पांच जगह देख ली जाएं। एक अच्छी सैर, अच्छा नाश्ता और बिना भागदौड़ के बिताया गया समय रविवार को ज्यादा यादगार बना सकता है।
सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक: एक दिन की यात्रा चुनें, तीन नहीं
भोपाल से: सांची, भीमबेटका, भोजपुर या जगदीशपुर में से कोई एक जगह चुनी जा सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार सांची भोपाल से करीब 48-49 किलोमीटर, भीमबेटका करीब 45 किलोमीटर और भोजपुर लगभग 29 किलोमीटर दूर है। सांची इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और बुजुर्गों के लिए अच्छा विकल्प है। भीमबेटका परिवार के साथ प्राचीन मानव सभ्यता और शैलचित्र देखने के लिए उपयुक्त है। भोजपुर कम दूरी में धार्मिक और ऐतिहासिक अनुभव देता है।
इंदौर से: वास्तुकला और मानसून के खूबसूरत नजारे के लिए मांडू या किले, घाट और हथकरघा परंपरा के लिए महेश्वर जा सकते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार मांडू इंदौर से करीब 95-99 किलोमीटर दूर है। सुबह जल्दी निकलें, सड़क की स्थिति देखें और देर से निकलकर दोनों जगहों को एक ही दिन में कवर करने की कोशिश न करें।
रायपुर से: शहर का विरासत भ्रमण, पुरातत्व और मंदिरों के लिए सिरपुर या लंबी ड्राइव के लिए गंगरेल चुना जा सकता है। छत्तीसगढ़ पर्यटन के अनुसार गंगरेल रायपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर है और मानसून में लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। निर्धारित पर्यटन क्षेत्र में ही रहें और किसी भी जल गतिविधि के संचालन की स्थिति पहले पता कर लें।
शाम 6 से 8 बजे तक: रविवार की शाम हल्की रखें
घर लौटने का समय ऐसा रखें कि सोमवार की शुरुआत थकान के साथ न हो। शाम को परिवार के साथ ‘80 साल का भारत’ थीम पर एक छोटा-सा काम किया जा सकता है। परिवार की पांच ऐसी तस्वीरें चुनें, जो पीढ़ियों के बीच बदलाव दिखाती हों। किसी स्थानीय कारीगर, हथकरघा विक्रेता या छोटे कारोबार से एक सामान खरीदें। सत्यापित स्थानीय संस्था के जरिए किताबें, स्कूल सामग्री या भोजन दान किया जा सकता है। बच्चों से एक कागज पर लिखवाएं—‘25 साल बाद मैं भारत को कैसा देखना चाहता हूं।’ इन पन्नों को संभालकर रखें और किसी आने वाले स्वतंत्रता दिवस पर दोबारा पढ़ें।
चार तैयार प्लान
बच्चों वाले परिवार के लिए: आज संग्रहालय, फिर जल्दी डिनर और देशभक्ति फिल्म। रविवार को सांची, भीमबेटका, सिरपुर या किसी स्थानीय प्रकृति केंद्र का दौरा और शाम को परिवार के साथ यादों का छोटा प्रोजेक्ट।
दोस्तों या कपल के लिए: आज देर से लंच, फिर झील या विरासत क्षेत्र में सैर और स्थानीय खानपान। रविवार को सुबह मानसून ड्राइव, एक ऐतिहासिक जगह और अंधेरा होने से पहले वापसी।
बुजुर्गों के लिए: आज आराम से लंच, संग्रहालय या मंदिर और फिर परिवार के साथ चाय और पुरानी यादों की बातचीत। रविवार को भोजपुर या किसी नजदीकी मंदिर जैसी छोटी धार्मिक यात्रा और जल्दी वापसी।
अगर बारिश ने प्लान बिगाड़ दिया: साथ मिलकर क्षेत्रीय खाना बनाएं, संग्रहालय खुला हो तो वहां जाएं, घर पर फिल्म और पारिवारिक प्रश्नोत्तरी रखें। रविवार को किताबों की दुकान या पुस्तकालय जाएं, इनडोर खेल खेलें, परिवार का इतिहास रिकॉर्ड करें और जल्दी डिनर करें।
घर से निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
• जगह के खुलने का समय, टिकट और पार्किंग की जानकारी सीधे संबंधित स्थल से जांच लें।
• छाता, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और पूरी तरह चार्ज मोबाइल साथ रखें।
• बाहर जाने से पहले सड़क और बारिश से जुड़े अलर्ट देख लें।
• जलभराव वाले अंडरपास, उफनते पुल-पुलिया, झरनों के किनारे और बंद जंगल मार्गों से दूर रहें।
• राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें और कागज या प्लास्टिक के झंडे सड़कों पर न छोड़ें।
सबसे अच्छा लंबा वीकेंड जरूरी नहीं कि वही हो जिसमें सबसे ज्यादा किलोमीटर की यात्रा की जाए। बेहतर वीकेंड वह है जिसमें परिवार के साथ कोई याद बन जाए, स्थानीय कारोबार या कारीगर को थोड़ा फायदा मिले और हर कोई सुरक्षित घर लौटे।
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