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पावरग्रिड ने भिवाड़ी में लॉन्च किया भारत का पहला सिंथेटिक एस्टर ऑयल-फिल्ड पावर ट्रांसफार्मर
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315 MVA क्षमता वाला ट्रांसफार्मर ग्रीन और फायर-सेफ तकनीक की दिशा में बड़ा कदम, ट्रांसमिशन सेक्टर में नई मिसाल
देश के बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र में एक अहम तकनीकी उपलब्धि दर्ज करते हुए पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) ने राजस्थान के भिवाड़ी सब-स्टेशन पर भारत का पहला 315 MVA, 400/220/33 केवी सिंथेटिक एस्टर ऑयल-फिल्ड पावर ट्रांसफार्मर चालू किया है। यह पहल न केवल उच्च क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देती है, बल्कि पर्यावरण-सुरक्षित और अग्नि-रोधी तकनीक को भी बढ़ावा देती है।
इस अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर का उद्घाटन पावरग्रिड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आर.के. त्यागी ने किया। कार्यक्रम में कंपनी के शीर्ष प्रबंधन, निदेशक मंडल के सदस्य और कॉर्पोरेट कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इसे देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
नया ट्रांसफार्मर पारंपरिक मिनरल ऑयल की जगह सिंथेटिक एस्टर इंसुलेटिंग ऑयल पर आधारित है। यह ऑयल बायोडिग्रेडेबल होने के साथ-साथ आग के जोखिम को काफी हद तक कम करता है, जिससे घनी आबादी या औद्योगिक क्षेत्रों के पास स्थित सब-स्टेशनों में सुरक्षा स्तर बढ़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक एस्टर ऑयल उच्च तापमान और अधिक लोड की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करता है, जिससे ट्रांसफार्मर की विश्वसनीयता और आयु में वृद्धि होती है।
315 MVA क्षमता वाला यह ट्रांसफार्मर बढ़ती बिजली मांग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इससे न केवल ग्रिड की लोड हैंडलिंग क्षमता में सुधार होगा, बल्कि पावर सप्लाई में स्थिरता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। पावरग्रिड अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही ग्रीन ट्रांसमिशन प्रैक्टिसेज के अनुरूप है और भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को मजबूती देती है।
कंपनी के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक पावरग्रिड देशभर में 287 सब-स्टेशनों का संचालन कर रहा है और 1,81,894 सर्किट किलोमीटर से अधिक ट्रांसमिशन लाइनों का प्रबंधन कर रहा है। इसकी कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता 5,94,016 MVA से अधिक हो चुकी है। उन्नत तकनीकों, ऑटोमेशन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के उपयोग के चलते पावरग्रिड 99.84 प्रतिशत से अधिक की औसत ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्धता बनाए रखने में सफल रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भिवाड़ी सब-स्टेशन पर शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन केंद्रों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा। इससे न केवल पर्यावरणीय जोखिम घटेंगे, बल्कि सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।
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