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सोनिया गांधी का खामेनेई हत्या पर भारत की चुप्पी पर हमला: ‘ये तटस्थता नहीं, जिम्मेदारी से पलायन’
Digital Desk
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की खामेनेई हत्या पर चुप्पी की आलोचना की, इसे संप्रभुता उल्लंघन बताया। भारत-ईरान संबंधों पर संसद बहस की मांग।
लीड: गांधी ने दिल्ली की खामोशी पर सवाल उठाए
1 मार्च को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारतीय सरकार की चुप्पी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोनिया गांधी खामेनेई हत्या को जिम्मेदारी से पलायन बताया। यूएस-इजरायल हमलों से पश्चिम एशिया में उबाल के बीच, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों के लिए ये महत्वपूर्ण है।
हत्या का झटका
ईरान ने 28 फरवरी को खामेनेई की यूएस-इजरायल के निशाना हमले में हत्या की पुष्टि की—राजनयिक वार्ताओं के बीच। गांधी ने इसे यूएन चार्टर उल्लंघन कहा, जो अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करता है—बिना युद्ध घोषणा के संप्रभुता पर हमला।
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कोई औपचारिक युद्ध घोषणा नहीं।
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चल रही बातचीत के दौरान।
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सिर पर बैठे राष्ट्राध्यक्ष की हत्या वैश्विक नियमों के खिलाफ।
मोदी सरकार ने केवल ईरान के यूएई जवाबी हमले पर 'गहरी चिंता' जताई, मूल हमले की निंदा नहीं की।
गांधी के बयान के 5 मुख्य बिंदु
गांधी ने साफ चेतावनी दी:
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बिना युद्ध के हत्या: अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर; दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र भारत को बोलना चाहिए।
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मोदी इजरायल यात्रा: पीएम ने 48 घंटे पहले नेतन्याहू का समर्थन किया, गाजा में महिलाओं-बच्चों की मौतों के बीच।
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ग्लोबल साउथ प्रभाव: ब्रिक्स साझेदार रूस-चीन दूर; भारत का रुख गलत संदेश देगा।
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कांग्रेस निंदा: ईरानी धरती पर बमबारी-हत्या की कड़ी भर्त्सना; ईरान और शिया समुदाय के प्रति संवेदना।
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भारतीय संविधान: अनुच्छेद 51 संवाद, गैर-हस्तक्षेप पर जोर—अब ये भूले गए।
भारत-ईरान संबंधों पर सवाल
गांधी ने 1994 यूएनएचआरसी में कश्मीर पर ईरान की मदद, पाक सीमा पर जाहेदान दूतावास (ग्वादर-GPEC के जवाब में), और वाजपेयी की 2001 तेहरान यात्रा याद दिलाई। 1 करोड़ भारतीय खाड़ी में; गल्फ युद्ध, यमन जैसे संकटों में तटस्थता ने सुरक्षा सुनिश्चित की। भारत-इजरायल रक्षा-कृषि-तकनीक संबंध बढ़े, लेकिन सिद्धांतपूर्ण रुख जरूरी।
उन्होंने कहा: स्वतंत्रता के बाद गैर-गठबंधन रणनीतिक स्वायत्तता था, निष्क्रिय चुप्पी नहीं। सोनिया गांधी खामेनेई हत्या पर खामोशी छोटे देशों का भरोसा तोड़ेगी।
संसद में बहस की मांग
गांधी ने संसदीय सत्र में खामेनेई हत्या, सरकार की चुप्पी, और पश्चिम एशिया अस्थिरता पर खुली बहस मांगी। "वसुधैव कुटुंबकम्" न्याय का वादा है, नियम-आधारित व्यवस्था दबाव में है।
आज क्यों महत्वपूर्ण: ब्रिक्स बैठकें नजदीक, तेल कीमतें ऊंची; भारत-ईरान संबंध दांव पर। गांधी का बयान 2026 वैश्विक तनाव में नैतिक विदेश नीति की मांग करता है।

