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सील टीम-6 ने ईरान में अमेरिकी पायलट को बचाया
अंतराष्ट्रीय न्यूज
300 किमी अंदर घुसकर किया ऑपरेशन, ओसामा बिन लादेन को मारने वाली यूनिट ने दिखाई काबिलियत
अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट सील टीम-6 ने ईरान में लापता F-15E पायलट को 36 घंटे में सुरक्षित बचाया। यह ऑपरेशन 3 अप्रैल को ईरानी इलाके में क्रैश हुए जेट से जुड़े था। पायलट पैराशूट से बाहर निकले, लेकिन दूसरा पायलट खतरे में था।
मिशन की विशेषताएँ
ऑपरेशन में अमेरिकी कमांडो 300 किलोमीटर ईरान के अंदर घुसे। जमीन और हवाई सहायताओं का इस्तेमाल किया गया। टीम ने हवाई हमले रोके, ईरानी सेना की मूवमेंट पर नजर रखी और CIA ने फर्जी जानकारी फैलाई। ट्रांसपोर्ट विमान तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर पाए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया ताकि संवेदनशील तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे।
सील टीम-6 की भूमिका
सील टीम-6 वही यूनिट है जिसने 2011 में ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था। टीम को नेवेल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप (DEVGRU) कहा जाता है और इसे हाई-रिस्क ऑपरेशंस के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
यह टीम जमीन, समुद्र और हवा में ऑपरेशन कर सकती है। इसमें शामिल होना दुनिया की सबसे कठिन चयन प्रक्रियाओं में गिना जाता है। सैनिकों को शारीरिक और मानसिक परीक्षण, लंबी दूरी की दौड़, खुले पानी में तैराकी, रात में पैराशूट जंप और वास्तविक मिशन जैसा प्रशिक्षण दिया जाता है।
मिशन की रणनीति
ऑपरेशन के दौरान सील टीम-6 ने ईरानी फोर्स को पीछे धकेला। तीन नए ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए पायलट और फंसी हुई रेस्क्यू टीम को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मिशन की सफलता की सराहना की और इसे इतिहास का सबसे खतरनाक रेस्क्यू मिशन बताया।
1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के दौरान अमेरिका ने पहला ऑपरेशन किया था, जो तकनीकी और मौसम संबंधी कारणों से असफल रहा। इसके बाद 1980 में सील टीम-6 का गठन किया गया ताकि हाई-रिस्क मिशन, हॉस्टेज रेस्क्यू और दुश्मन क्षेत्र में गुप्त ऑपरेशन संभव हो सकें।
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सील टीम-6 ने ईरान में अमेरिकी पायलट को बचाया
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट सील टीम-6 ने ईरान में लापता F-15E पायलट को 36 घंटे में सुरक्षित बचाया। यह ऑपरेशन 3 अप्रैल को ईरानी इलाके में क्रैश हुए जेट से जुड़े था। पायलट पैराशूट से बाहर निकले, लेकिन दूसरा पायलट खतरे में था।
मिशन की विशेषताएँ
ऑपरेशन में अमेरिकी कमांडो 300 किलोमीटर ईरान के अंदर घुसे। जमीन और हवाई सहायताओं का इस्तेमाल किया गया। टीम ने हवाई हमले रोके, ईरानी सेना की मूवमेंट पर नजर रखी और CIA ने फर्जी जानकारी फैलाई। ट्रांसपोर्ट विमान तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर पाए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया ताकि संवेदनशील तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे।
सील टीम-6 की भूमिका
सील टीम-6 वही यूनिट है जिसने 2011 में ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था। टीम को नेवेल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप (DEVGRU) कहा जाता है और इसे हाई-रिस्क ऑपरेशंस के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
यह टीम जमीन, समुद्र और हवा में ऑपरेशन कर सकती है। इसमें शामिल होना दुनिया की सबसे कठिन चयन प्रक्रियाओं में गिना जाता है। सैनिकों को शारीरिक और मानसिक परीक्षण, लंबी दूरी की दौड़, खुले पानी में तैराकी, रात में पैराशूट जंप और वास्तविक मिशन जैसा प्रशिक्षण दिया जाता है।
मिशन की रणनीति
ऑपरेशन के दौरान सील टीम-6 ने ईरानी फोर्स को पीछे धकेला। तीन नए ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए पायलट और फंसी हुई रेस्क्यू टीम को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मिशन की सफलता की सराहना की और इसे इतिहास का सबसे खतरनाक रेस्क्यू मिशन बताया।
1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के दौरान अमेरिका ने पहला ऑपरेशन किया था, जो तकनीकी और मौसम संबंधी कारणों से असफल रहा। इसके बाद 1980 में सील टीम-6 का गठन किया गया ताकि हाई-रिस्क मिशन, हॉस्टेज रेस्क्यू और दुश्मन क्षेत्र में गुप्त ऑपरेशन संभव हो सकें।
