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कोर्ट में पति को ठुकराकर प्रेमी का हाथ थामा, हाईकोर्ट ने दी तलाक की सलाह
ग्वालियर (म.प्र.)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पत्नी ने पति संग रहने से इनकार कर प्रेमी संग रहने की बात कही, कोर्ट ने तलाक की सलाह दी।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने वैवाहिक रिश्तों की जटिलता को उजागर कर दिया। हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान एक महिला ने खुले तौर पर अपने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया और अदालत में ही अपने प्रेमी का साथ चुन लिया। इस घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया।
कोर्ट में महिला का स्पष्ट बयान
सुनवाई के दौरान जब महिला को अदालत में पेश किया गया तो उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रह रही है और उसी के साथ जीवन बिताना चाहती है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। महिला के इस बयान ने पति के आरोपों को कमजोर कर दिया।
पति ने लगाया था बंधक बनाने का आरोप
महिला के पति ने याचिका में दावा किया था कि उसकी पत्नी को कुलदीप राठौर नामक व्यक्ति ने जबरन बंधक बनाकर रखा है। लेकिन कोर्ट में महिला के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वह अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी। इससे पूरे मामले की दिशा बदल गई।
काउंसलिंग के दौरान भी नहीं बनी सहमति
अदालत ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों की काउंसलिंग करवाई, लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। काउंसलिंग में यह बात सामने आई कि पति पेशे से ड्राइवर है और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता था। इसी दौरान महिला की दूसरे व्यक्ति से नजदीकियां बढ़ीं, जिससे वैवाहिक संबंधों में दरार आ गई।
पति ने भी किया रिश्ता खत्म करने का निर्णय
पत्नी के स्पष्ट रुख के बाद पति ने भी अदालत में कहा कि अब वह इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। दोनों के बीच विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका था, जिससे समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची।
17 महीने में टूटा रिश्ता
दोनों की शादी नवंबर 2024 में हुई थी, लेकिन महज 17 महीनों में ही यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। महिला करीब 20 दिनों से घर से लापता थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे खोजकर अदालत में पेश किया।
कोर्ट की सलाह और अंतिम फैसला
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने दोनों को आपसी सहमति से तलाक लेने की सलाह दी। साथ ही महिला को उसकी इच्छा के अनुसार उसकी मां के साथ जाने की अनुमति दी गई। अदालत ने याचिका को निरर्थक मानते हुए समाप्त कर दिया।
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कोर्ट में पति को ठुकराकर प्रेमी का हाथ थामा, हाईकोर्ट ने दी तलाक की सलाह
ग्वालियर (म.प्र.)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने वैवाहिक रिश्तों की जटिलता को उजागर कर दिया। हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान एक महिला ने खुले तौर पर अपने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया और अदालत में ही अपने प्रेमी का साथ चुन लिया। इस घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया।
कोर्ट में महिला का स्पष्ट बयान
सुनवाई के दौरान जब महिला को अदालत में पेश किया गया तो उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रह रही है और उसी के साथ जीवन बिताना चाहती है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। महिला के इस बयान ने पति के आरोपों को कमजोर कर दिया।
पति ने लगाया था बंधक बनाने का आरोप
महिला के पति ने याचिका में दावा किया था कि उसकी पत्नी को कुलदीप राठौर नामक व्यक्ति ने जबरन बंधक बनाकर रखा है। लेकिन कोर्ट में महिला के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वह अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी। इससे पूरे मामले की दिशा बदल गई।
काउंसलिंग के दौरान भी नहीं बनी सहमति
अदालत ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों की काउंसलिंग करवाई, लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। काउंसलिंग में यह बात सामने आई कि पति पेशे से ड्राइवर है और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता था। इसी दौरान महिला की दूसरे व्यक्ति से नजदीकियां बढ़ीं, जिससे वैवाहिक संबंधों में दरार आ गई।
पति ने भी किया रिश्ता खत्म करने का निर्णय
पत्नी के स्पष्ट रुख के बाद पति ने भी अदालत में कहा कि अब वह इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। दोनों के बीच विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका था, जिससे समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची।
17 महीने में टूटा रिश्ता
दोनों की शादी नवंबर 2024 में हुई थी, लेकिन महज 17 महीनों में ही यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। महिला करीब 20 दिनों से घर से लापता थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे खोजकर अदालत में पेश किया।
कोर्ट की सलाह और अंतिम फैसला
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने दोनों को आपसी सहमति से तलाक लेने की सलाह दी। साथ ही महिला को उसकी इच्छा के अनुसार उसकी मां के साथ जाने की अनुमति दी गई। अदालत ने याचिका को निरर्थक मानते हुए समाप्त कर दिया।
