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SRCC ने सेंटेनरी कर्टन रेज़र के साथ शताब्दी समारोह की शुरुआत की, राष्ट्र के आर्थिक नेतृत्व में भूमिका रेखांकित
डिजिटल डेस्क
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति बोले—भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में SRCC जैसे संस्थानों का अहम योगदान
देश के अग्रणी वाणिज्य और अर्थशास्त्र शिक्षण संस्थानों में शामिल श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने शुक्रवार को अपने नॉर्थ कैंपस में सेंटेनरी कर्टन रेज़र कार्यक्रम के साथ शताब्दी समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया। वर्ष 1926 में स्थापित SRCC के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, नीति निर्माण, उद्योग और न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र शामिल हुए।
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कार्यक्रम में पूरे वर्ष प्रस्तावित शैक्षणिक सम्मेलनों, नीति संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध पहलों और पूर्व छात्र सहभागिता की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इन गतिविधियों का उद्देश्य संस्थान की शैक्षणिक विरासत को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के अनुरूप नेतृत्व तैयार करना बताया गया।

कुलपति का संबोधन
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए SRCC को “वैश्विक पहचान प्राप्त अकादमिक ब्रांड” बताया। उन्होंने कहा कि SRCC की भूमिका केवल रैंकिंग या प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सौ वर्षों में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में ठोस योगदान दिया है।
प्रो. सिंह ने कहा कि भारत के लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के पीछे SRCC जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्होंने अर्थशास्त्री, उद्यमी, प्रशासक और नीति-निर्माता तैयार किए। उन्होंने कॉलेज से उद्यमिता, बिज़नेस इनक्यूबेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।
प्रबंधन और नेतृत्व की दृष्टि
एसआरसीसी गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन अजय एस. श्रीराम ने कहा कि सेंटेनरी कर्टन रेज़र केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने दरियागंज में सीमित संसाधनों से शुरू हुए ‘द कमर्शियल स्कूल’ से लेकर देश के शीर्ष वाणिज्य महाविद्यालय बनने तक की यात्रा को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में SRCC अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, बुनियादी ढांचे के विस्तार, एआई-सक्षम शिक्षण, समावेशन, स्थिरता और पूर्व छात्र सहभागिता पर विशेष फोकस करेगा।
प्राचार्य और पूर्व छात्रों की प्रतिक्रिया
SRCC की प्राचार्य प्रो. सिमृत कौर ने कहा कि शताब्दी समारोह शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों की साझा उपलब्धि का उत्सव है। उन्होंने संस्थान की नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित शिक्षा परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में स्वर्गीय अरुण जेटली की पत्नी संगीता जेटली, पूर्व न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, उद्योग जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई पूर्व छात्रों ने SRCC की भूमिका को अपने अनुभवों के माध्यम से साझा किया।
समारोह का समापन ऐतिहासिक कैंपस के दीपन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जो SRCC की अगली सदी की यात्रा का प्रतीक बना। संस्थान ने संकेत दिए कि शताब्दी वर्ष में शिक्षा, नीति और समाज से जुड़े संवाद को और व्यापक बनाया जाएगा।
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डिजिटल डेस्क
देश के अग्रणी वाणिज्य और अर्थशास्त्र शिक्षण संस्थानों में शामिल श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने शुक्रवार को अपने नॉर्थ कैंपस में सेंटेनरी कर्टन रेज़र कार्यक्रम के साथ शताब्दी समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया। वर्ष 1926 में स्थापित SRCC के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, नीति निर्माण, उद्योग और न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र शामिल हुए।
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कार्यक्रम में पूरे वर्ष प्रस्तावित शैक्षणिक सम्मेलनों, नीति संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शोध पहलों और पूर्व छात्र सहभागिता की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इन गतिविधियों का उद्देश्य संस्थान की शैक्षणिक विरासत को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के अनुरूप नेतृत्व तैयार करना बताया गया।

कुलपति का संबोधन
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए SRCC को “वैश्विक पहचान प्राप्त अकादमिक ब्रांड” बताया। उन्होंने कहा कि SRCC की भूमिका केवल रैंकिंग या प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सौ वर्षों में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में ठोस योगदान दिया है।
प्रो. सिंह ने कहा कि भारत के लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनकर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के पीछे SRCC जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्होंने अर्थशास्त्री, उद्यमी, प्रशासक और नीति-निर्माता तैयार किए। उन्होंने कॉलेज से उद्यमिता, बिज़नेस इनक्यूबेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल फाइनेंस जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।
प्रबंधन और नेतृत्व की दृष्टि
एसआरसीसी गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन अजय एस. श्रीराम ने कहा कि सेंटेनरी कर्टन रेज़र केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने दरियागंज में सीमित संसाधनों से शुरू हुए ‘द कमर्शियल स्कूल’ से लेकर देश के शीर्ष वाणिज्य महाविद्यालय बनने तक की यात्रा को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में SRCC अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, बुनियादी ढांचे के विस्तार, एआई-सक्षम शिक्षण, समावेशन, स्थिरता और पूर्व छात्र सहभागिता पर विशेष फोकस करेगा।
प्राचार्य और पूर्व छात्रों की प्रतिक्रिया
SRCC की प्राचार्य प्रो. सिमृत कौर ने कहा कि शताब्दी समारोह शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों की साझा उपलब्धि का उत्सव है। उन्होंने संस्थान की नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित शिक्षा परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में स्वर्गीय अरुण जेटली की पत्नी संगीता जेटली, पूर्व न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, उद्योग जगत और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई पूर्व छात्रों ने SRCC की भूमिका को अपने अनुभवों के माध्यम से साझा किया।
समारोह का समापन ऐतिहासिक कैंपस के दीपन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जो SRCC की अगली सदी की यात्रा का प्रतीक बना। संस्थान ने संकेत दिए कि शताब्दी वर्ष में शिक्षा, नीति और समाज से जुड़े संवाद को और व्यापक बनाया जाएगा।
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