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विजय माल्या का दावा: ₹14,131 करोड़ की वसूली, फिर भी जारी है ‘भगोड़े’ का टैग
Digital Desk
विजय माल्या ने ₹14,131.60 करोड़ की वसूली का दावा करते हुए अपने ‘भगोड़ा’ टैग और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या ने एक बार फिर भारतीय अधिकारियों और कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में माल्या ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक हलफनामे के अनुसार, बैंकों से जुड़े उनके मामले में ₹14,131.60 करोड़ की राशि बरामद की जा चुकी है।
माल्या ने इस आधार पर सवाल किया कि इतनी बड़ी रकम की वसूली के बावजूद उन्हें अब भी आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में ‘भगोड़ा’ क्यों बताया जाता है। हालांकि, उनके दावे और अदालतों में चल रही अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियों को एक ही विषय मानना उचित नहीं होगा।
माल्या ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
माल्या ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद और अपने खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे ‘फ्यूजिटिव’ या ‘भगोड़ा’ शब्द पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने लोगों से अपने दावों के बजाय कथित ईडी हलफनामे की सामग्री देखने की अपील की। माल्या का कहना है कि दस्तावेज में बैंकों को की गई बड़ी वित्तीय वसूली का उल्लेख मौजूद है।
उनके अनुसार, यही आंकड़ा इस बात पर सवाल खड़ा करता है कि उनके मामले को सार्वजनिक रूप से किस तरह पेश किया जा रहा है।
₹14,131 करोड़ की वसूली का दावा
माल्या ने दावा किया कि ईडी के हलफनामे में ₹14,131.60 करोड़ की वसूली का उल्लेख किया गया था। उन्होंने इस आंकड़े का इस्तेमाल यह सवाल उठाने के लिए किया कि जब इतनी बड़ी रकम बरामद की जा चुकी है, तो उनके खिलाफ ‘भगोड़े’ की छवि क्यों कायम है।
हालांकि, किसी रकम की वसूली का दावा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मामले से जुड़े सभी वित्तीय दायित्व या कानूनी विवाद समाप्त हो गए हैं।
माल्या का पक्ष मुख्य रूप से वसूली की राशि और उनके मामले को लेकर सार्वजनिक धारणा पर केंद्रित है, जबकि उनकी फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर स्थिति और अन्य कानूनी मुद्दे अलग प्रक्रियाओं के तहत विचाराधीन रहे हैं।
‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति
माल्या ने एक बार फिर खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और उनके अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में उन पर ब्रिटेन से बाहर जाने को लेकर कानूनी प्रतिबंध हैं।
माल्या का तर्क है कि भारत में उनकी भौतिक मौजूदगी और बैंकों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने भारत के Fugitive Economic Offenders Act, 2018 के तहत अपनी स्थिति को लेकर भी लगातार कानूनी आपत्ति जताई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला
माल्या से जुड़े विभिन्न कानूनी मुद्दों में बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण रही है। अदालत में उनकी फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर स्थिति से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।
फरवरी 2026 में अदालत ने कार्यवाही में माल्या की अनुपस्थिति को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी और उन्हें यह स्पष्ट करने का अवसर दिया था कि क्या वह भारत लौटने का इरादा रखते हैं।
यह मामला किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े बैंक ऋण, संपत्तियों की वसूली और माल्या की कानूनी स्थिति से जुड़े व्यापक विवाद का हिस्सा है।
वापसी और भुगतान पर अलग तर्क
माल्या ने अपने हालिया बयानों में भारत लौटने और वित्तीय देनदारियों के बीच अंतर करने की कोशिश की। उनका कहना है कि बैंक का पैसा वापस करने का मुद्दा उनकी भौतिक मौजूदगी से अलग है।
वह पहले भी ब्रिटेन में अपनी स्थिति और निवास को लेकर सार्वजनिक रूप से सफाई दे चुके हैं। माल्या का कहना रहा है कि उन्हें केवल इस आधार पर भारत से भागे व्यक्ति के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए कि वह लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे हैं।
उनके मुताबिक, उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति को समझने के लिए ब्रिटेन में उन पर लागू प्रतिबंधों और भारत में चल रही कानूनी प्रक्रिया दोनों को देखना जरूरी है।
सरकार ने घोषित किया था FEO
विजय माल्या भारत में Fugitive Economic Offender (FEO) घोषित किए जा चुके प्रमुख कारोबारियों में शामिल हैं। इस श्रेणी में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है, जिन पर गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़े आरोप हों और जो कथित तौर पर भारत से बाहर रहकर भारतीय कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हों।
अक्टूबर 2025 में संसद में दिए गए एक जवाब में वित्त मंत्रालय ने बताया था कि Fugitive Economic Offenders Act के तहत 15 लोगों को FEO घोषित किया गया था। इस सूची में माल्या के अलावा नीरव मोदी सहित अन्य नाम भी शामिल थे।
वसूली और देनदारी पर बहस
माल्या के मामले में बैंकों के पैसे की वसूली लंबे समय से प्रमुख मुद्दा रही है। उनके हालिया पोस्ट ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि एजेंसियों ने कितनी राशि बरामद की और उस वसूली का उनकी कुल देनदारी पर क्या प्रभाव पड़ा।
हालांकि, वसूली की राशि और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर के रूप में उनकी कानूनी स्थिति अलग-अलग कानूनी सवाल हैं। केवल वित्तीय वसूली का आंकड़ा सामने आने से उनके खिलाफ चल रही सभी कानूनी कार्यवाहियां स्वतः समाप्त नहीं होतीं।
इसलिए माल्या के दावों को उनके पक्ष के रूप में देखना जरूरी है, न कि लंबित कानूनी मामलों के अंतिम निष्कर्ष के रूप में।
कानूनी विवाद अभी खत्म नहीं
विजय माल्या के ताजा बयान बताते हैं कि किंगफिशर एयरलाइंस और बैंक देनदारियों से जुड़ा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। वह लगातार अपने खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले ‘भगोड़ा’ शब्द और भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं।
दूसरी ओर, उनकी FEO स्थिति, संपत्तियों की वसूली और अन्य कानूनी मुद्दे संबंधित न्यायिक और वैधानिक प्रक्रियाओं के अधीन हैं।
माल्या के ताजा दावों ने एक बार फिर ₹14,131.60 करोड़ की कथित वसूली और उनकी बाकी कानूनी देनदारियों के सवाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, इन दावों का अंतिम कानूनी प्रभाव अदालतों में चल रही प्रक्रियाओं के परिणाम पर निर्भर करेगा।
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