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शी जिनपिंग का भारत दौरा: सितंबर में BRICS सम्मेलन में आने की संभावना
Sandeep Patel
शी जिनपिंग सितंबर में BRICS सम्मेलन के लिए भारत आ सकते हैं। जानें संभावित मोदी-शी मुलाकात, सीमा विवाद और भारत-चीन संबंधों पर इसका असर।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं। पुष्टि होने पर यह सात साल में उनका पहला भारत दौरा होगा और भारत-चीन संबंधों के लिए अहम कूटनीतिक घटनाक्रम माना जाएगा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर 2026 में भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, शी नई दिल्ली में होने वाले आगामी BRICS सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। अगर यह दौरा होता है तो 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। भारत में 12 और 13 सितंबर को BRICS सम्मेलन प्रस्तावित है। शी की संभावित यात्रा ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत और चीन अपने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।
शी का दौरा अभी तय नहीं
शी जिनपिंग की भारत यात्रा की भारत या चीन की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चीनी अधिकारी संभावित दौरे की तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे हैं। इनमें ठहरने की व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि शी के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। यह 2019 में भारत दौरे के दौरान उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल की तुलना में काफी बड़ा होगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने BRICS सहयोग को महत्व देने की बात कही है और भारत की मेजबानी में होने वाले सम्मेलन की सफलता के लिए समर्थन जताया है। हालांकि, उसने शी के भारत दौरे की पुष्टि नहीं की है।
सात साल बाद भारत दौरा
अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह सात साल में उनका पहला भारत दौरा होगा। शी आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। उस समय उन्होंने चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक की थी। इसके बाद 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध जारी रहा। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच सैनिकों की वापसी को लेकर समझौता हुआ, जिसके बाद राजनयिक स्तर पर बातचीत के लिए कुछ नई परिस्थितियां बनीं।
मोदी-शी मुलाकात पर नजर
शी की भारत यात्रा हुई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों नेता कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान मिल चुके हैं। इनमें अक्टूबर 2024 में कजान में हुआ BRICS सम्मेलन भी शामिल है। लेकिन नई दिल्ली में शी की मौजूदगी और मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक का महत्व अलग होगा, क्योंकि यह 2020 के बाद भारत में शी की पहली यात्रा होगी। संभावित बातचीत में सीमा पर शांति और स्थिरता, आपसी विश्वास बहाली, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
सीमा विवाद सबसे अहम
भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेतों के बावजूद सीमा विवाद अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच हिमालयी क्षेत्र में लंबी और विवादित सीमा है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी तक पूरी तरह निर्धारित नहीं हुआ है। 2020 की सीमा झड़पों ने दोनों देशों के सैन्य और कूटनीतिक संबंधों पर गहरा असर डाला था। इसका प्रभाव व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क पर भी पड़ा। भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता व्यापक भारत-चीन संबंधों में सुधार के लिए जरूरी है। इसलिए संभावित मोदी-शी वार्ता में सीमा पर तनाव रोकने और LAC पर स्थिरता बनाए रखने का मुद्दा प्रमुख रह सकता है।
डोभाल की चीन में वार्ता
शी की संभावित भारत यात्रा के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन में हैं। डोभाल भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं दौर की वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद और LAC पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इन वार्ताओं का समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा विवाद पर प्रगति भारत-चीन संबंधों के व्यापक सामान्यीकरण की गति को प्रभावित कर सकती है।
BRICS सम्मेलन अहम मंच
भारत में होने वाला BRICS सम्मेलन चीन के लिए भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच होगा। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, विकास, वैश्विक शासन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंध BRICS के व्यापक एजेंडे के अलावा सबसे ज्यादा चर्चा वाले मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। मोदी और शी की संभावित बैठक पर भारत, चीन और दुनिया के अन्य देशों की नजर रहेगी।
आर्थिक रिश्तों में हलचल
संभावित शी दौरे के बीच भारत और चीन के बीच आर्थिक संपर्क में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालिया घटनाक्रमों से संकेत मिले हैं कि चीनी कंपनियां और निवेशक भारतीय बाजार में फिर से रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, भारत आर्थिक अवसरों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रख रहा है। भारत और चीन के बीच व्यापार अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन 2020 के बाद तनाव का असर निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबारी संबंधों के कई क्षेत्रों पर पड़ा है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में सुधार होने पर व्यापार और निवेश पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत और चीन शी जिनपिंग के सितंबर दौरे की आधिकारिक पुष्टि कब करते हैं। अगर दौरा तय होता है तो 2020 के सीमा विवाद के बाद यह भारत-चीन संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय कूटनीतिक घटनाओं में से एक हो सकता है। मोदी-शी मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मौजूद मूलभूत मतभेदों को देखते हुए उम्मीदें सीमित रहने की संभावना है। शी जिनपिंग का भारत दौरा संभावित है, लेकिन आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। 12-13 सितंबर के BRICS सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर तैयारियां और बातचीत जारी हैं।
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