- Hindi News
- देश विदेश
- शी जिनपिंग-पुतिन की मुलाकात: बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच सहयोग पर जोर
शी जिनपिंग-पुतिन की मुलाकात: बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच सहयोग पर जोर
Digital Desk
बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने मुलाकात की। दोनों नेताओं ने AI, डिजिटल तकनीक, वीजा-मुक्त यात्रा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, वैश्विक मुद्दों और AI व डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। शी जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अनिश्चितता और अप्रत्याशित कारक बढ़े हैं। उन्होंने रूस के साथ चीन के रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
शी ने बढ़ती अनिश्चितता पर जताई चिंता
शी जिनपिंग ने पुतिन से कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति में “अनिश्चितताएं और अप्रत्याशित कारक” काफी बढ़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रणनीतिक मार्गदर्शन और संयुक्त प्रयासों से चीन-रूस संबंधों की नींव और मजबूत होगी तथा भविष्य की संभावनाएं बेहतर होंगी।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद दुनिया के लोगों की शांति, विकास, सहयोग और पारस्परिक लाभ की इच्छा में कोई बदलाव नहीं आया है।
बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन रूस और अन्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के प्रयासों को मजबूत करने के लिए तैयार है।
उन्होंने “समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व” की दिशा में आगे बढ़ने की वकालत की।
बीजिंग लंबे समय से ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता रहा है जिसमें वैश्विक शक्ति किसी एक देश या समूह तक सीमित न रहे। पुतिन के साथ बातचीत में शी के इस रुख ने चीन और रूस के बीच व्यापक रणनीतिक समन्वय को भी सामने रखा।
पुतिन ने AI सहयोग पर दिया जोर
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
पुतिन ने कहा कि चीन और रूस के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि AI और डिजिटल नवाचार दोनों देशों की आर्थिक प्रगति के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
इससे संकेत मिलता है कि चीन-रूस सहयोग अब ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक मामलों के पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर उभरती तकनीकों तक भी विस्तार कर रहा है।
यूक्रेन युद्ध पर भी हुई चर्चा
शी और पुतिन ने अपनी बैठक में यूक्रेन संघर्ष का भी जिक्र किया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह बातचीत का मुख्य विषय नहीं था। दोनों नेताओं की चर्चा का व्यापक फोकस द्विपक्षीय संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर रहा।
यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव के बीच चीन और रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थायी वीजा-मुक्त व्यवस्था का प्रस्ताव
पुतिन ने चीन और रूस के बीच मौजूदा वीजा-मुक्त व्यवस्था को स्थायी बनाने की दिशा में काम करने का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने कहा कि यदि चीन इसे उपयोगी और व्यावहारिक मानता है तो दोनों देश इस व्यवस्था को स्थायी बनाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
पुतिन के अनुसार, वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था से दोनों देशों के बीच पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
स्थायी व्यवस्था लागू होने पर दोनों देशों के नागरिकों के बीच पर्यटन, कारोबार और लोगों के बीच संपर्क को और बढ़ावा मिलने की संभावना है।
SCO शिखर सम्मेलन बना मंच
शी-पुतिन की मुलाकात बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हुई।
SCO की शुरुआत क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के मंच के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ इसका दायरा राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग तक बढ़ा है।
2026 का सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब चीन और रूस मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र में अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
शी ने सम्मेलन से इतर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव समेत अन्य नेताओं से भी मुलाकात की।
चीन-रूस संबंधों में और मजबूती
शी और पुतिन की ताजा मुलाकात दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।
चीन के लिए रूस ऊर्जा, सुरक्षा और यूरेशियाई कूटनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। वहीं रूस के लिए चीन के साथ आर्थिक और राजनयिक संबंध पश्चिमी देशों के दबाव के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ताजा बातचीत में AI, डिजिटल नवाचार, पर्यटन और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी सामने आईं।
हालांकि, इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच किसी नए औपचारिक सैन्य गठबंधन के संकेत के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह मुख्य रूप से रणनीतिक समन्वय, द्विपक्षीय सहयोग और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के समर्थन को दर्शाती है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

