उत्तर प्रदेश के युवा उद्यमी के एआई फिल्म स्टूडियो TakeTwo को अमेरिका–कनाडा से प्री-सीड फंडिंग, 100 करोड़ का बम्पर वैल्यूएशन

डिजिटल डेस्क

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अमेरिकी Afore Capital और कनाडा की Inovia VC ने किया प्री-सीड निवेश, भारत के AI-आधारित मीडिया सेक्टर को मिला वैश्विक भरोसा

भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक नया अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है। उत्तर प्रदेश के उद्यमी रुद्रेश उपाध्याय द्वारा स्थापित एआई-नेटिव फिल्म स्टूडियो टेकटू (TakeTwo) ने प्री-सीड फंडिंग हासिल की है।यह निवेश 100 करोड़ के वैल्यूएशन पर हुआ है, जिसे भारत के एआई आधारित मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में शुरुआती और अहम सौदों में माना जा रहा है।

इस फंडिंग राउंड में अमेरिका की Afore Capital और कनाडा की Inovia VC ने हिस्सा लिया। Afore Capital को वैश्विक स्तर पर अग्रणी प्री-सीड वेंचर कैपिटल फर्मों में गिना जाता है। यह निवेश यूपी जैसे राज्यों से उभर रहे तकनीकी स्टार्टअप्स में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

रुद्रेश उपाध्याय (सीईओ) और राघव कट्टा (सीटीओ) द्वारा स्थापित टेकटू केवल एक सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं, बल्कि एक फुल-स्टैक एआई फिल्म स्टूडियो है। स्टूडियो फिल्म निर्देशकों और प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर जटिल विजुअल इफेक्ट्स, स्टाइलाइज्ड सीन और बड़े सिनेमैटिक सेटअप तैयार करता है, जिससे पारंपरिक वीएफएक्स की तुलना में कम लागत पर उच्च-गुणवत्ता वाले दृश्य बनते हैं।

रुद्रेश उपाध्याय, सीईओ, ने कहा,
“हम शुरू से ही फिल्म निर्माण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान करने पर काम कर रहे हैं। यह फंडिंग इस बात की पुष्टि है कि एआई अब सिनेमा के भविष्य का आधार बनने जा रहा है। यूपी से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचना दिखाता है कि प्रतिभा किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित नहीं होती।”

फंडिंग का उपयोग तकनीकी ढांचे को मजबूत करने, कस्टम एआई सिस्टम विकसित करने और क्रिएटिव टेक्नोलॉजिस्ट्स की टीम का विस्तार करने में किया जाएगा। टेकटू का दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय सिनेमा के पीछे काम करने वाली ऐसी तकनीकी ताकत बनना है, जो पर्दे पर दिखाई न दे, लेकिन हर फिल्म की गुणवत्ता में अपनी छाप छोड़े।

टेकटू की अवधारणा वाई कॉम्बिनेटर के एआई स्टार्टअप स्कूल के दौरान विकसित हुई थी। वीएफएक्स की बढ़ती लागत और प्रोडक्शन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से उत्पन्न विचार आज ऐसे स्टूडियो मॉडल में बदल चुका है, जो एआई-जनरेटेड कंटेंट को लाइव-एक्शन फिल्मों में सहज रूप से शामिल करता है।

स्टूडियो एआई को केवल प्रयोग के रूप में नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण का मूल तकनीकी ढांचा मानता है। टेकटू का बिजनेस मॉडल बी2बी और बी2सी दोनों पर आधारित है, जिससे बड़े प्रोडक्शन हाउस और स्वतंत्र फिल्म निर्माता दोनों इसकी तकनीक का लाभ उठा सकें। फिलहाल कंपनी मौजूदा एआई एपीआई का उपयोग कर रही है, लेकिन भविष्य में भारत के विशाल और विविध सिनेमाई डेटा पर आधारित अपने स्वयं के एआई सिस्टम विकसित करने की योजना है।

भविष्य में टेकटू का उद्देश्य केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा में एआई को एक मानक उपकरण के रूप में स्थापित करना है। कंपनी बड़े प्रोडक्शन हाउस और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर अपनी तकनीक को उद्योग स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है, ताकि हर फिल्म में उच्च-गुणवत्ता वाले दृश्य और कहानी के नए आयाम संभव हो सकें।

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www.dainikjagranmpcg.com
28 Jan 2026 By Nitin Trivedi

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डिजिटल डेस्क

भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक नया अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है। उत्तर प्रदेश के उद्यमी रुद्रेश उपाध्याय द्वारा स्थापित एआई-नेटिव फिल्म स्टूडियो टेकटू (TakeTwo) ने प्री-सीड फंडिंग हासिल की है।यह निवेश 100 करोड़ के वैल्यूएशन पर हुआ है, जिसे भारत के एआई आधारित मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में शुरुआती और अहम सौदों में माना जा रहा है।

इस फंडिंग राउंड में अमेरिका की Afore Capital और कनाडा की Inovia VC ने हिस्सा लिया। Afore Capital को वैश्विक स्तर पर अग्रणी प्री-सीड वेंचर कैपिटल फर्मों में गिना जाता है। यह निवेश यूपी जैसे राज्यों से उभर रहे तकनीकी स्टार्टअप्स में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

रुद्रेश उपाध्याय (सीईओ) और राघव कट्टा (सीटीओ) द्वारा स्थापित टेकटू केवल एक सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं, बल्कि एक फुल-स्टैक एआई फिल्म स्टूडियो है। स्टूडियो फिल्म निर्देशकों और प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर जटिल विजुअल इफेक्ट्स, स्टाइलाइज्ड सीन और बड़े सिनेमैटिक सेटअप तैयार करता है, जिससे पारंपरिक वीएफएक्स की तुलना में कम लागत पर उच्च-गुणवत्ता वाले दृश्य बनते हैं।

रुद्रेश उपाध्याय, सीईओ, ने कहा,
“हम शुरू से ही फिल्म निर्माण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान करने पर काम कर रहे हैं। यह फंडिंग इस बात की पुष्टि है कि एआई अब सिनेमा के भविष्य का आधार बनने जा रहा है। यूपी से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचना दिखाता है कि प्रतिभा किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित नहीं होती।”

फंडिंग का उपयोग तकनीकी ढांचे को मजबूत करने, कस्टम एआई सिस्टम विकसित करने और क्रिएटिव टेक्नोलॉजिस्ट्स की टीम का विस्तार करने में किया जाएगा। टेकटू का दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय सिनेमा के पीछे काम करने वाली ऐसी तकनीकी ताकत बनना है, जो पर्दे पर दिखाई न दे, लेकिन हर फिल्म की गुणवत्ता में अपनी छाप छोड़े।

टेकटू की अवधारणा वाई कॉम्बिनेटर के एआई स्टार्टअप स्कूल के दौरान विकसित हुई थी। वीएफएक्स की बढ़ती लागत और प्रोडक्शन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से उत्पन्न विचार आज ऐसे स्टूडियो मॉडल में बदल चुका है, जो एआई-जनरेटेड कंटेंट को लाइव-एक्शन फिल्मों में सहज रूप से शामिल करता है।

स्टूडियो एआई को केवल प्रयोग के रूप में नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण का मूल तकनीकी ढांचा मानता है। टेकटू का बिजनेस मॉडल बी2बी और बी2सी दोनों पर आधारित है, जिससे बड़े प्रोडक्शन हाउस और स्वतंत्र फिल्म निर्माता दोनों इसकी तकनीक का लाभ उठा सकें। फिलहाल कंपनी मौजूदा एआई एपीआई का उपयोग कर रही है, लेकिन भविष्य में भारत के विशाल और विविध सिनेमाई डेटा पर आधारित अपने स्वयं के एआई सिस्टम विकसित करने की योजना है।

भविष्य में टेकटू का उद्देश्य केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा में एआई को एक मानक उपकरण के रूप में स्थापित करना है। कंपनी बड़े प्रोडक्शन हाउस और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर अपनी तकनीक को उद्योग स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है, ताकि हर फिल्म में उच्च-गुणवत्ता वाले दृश्य और कहानी के नए आयाम संभव हो सकें।

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