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AI की बढ़ती ताकत से साइबर जंग का नया दौर: हमले भी होंगे ऑटोमैटिक, बचाव भी; बिना इंसानी मंजूरी पलटवार पर बहस तेज
Priyanka Mathur
Agentic Cyber Defense: AI एजेंट अब खतरे पहचानने से आगे बढ़कर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन सवाल है—क्या उन्हें खुद जवाबी साइबर हमला करने की अनुमति दी जानी चाहिए?
साइबर सुरक्षा की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब केवल संदिग्ध गतिविधियों की पहचान या अलर्ट जारी करने तक सीमित नहीं रह गया है। AI एजेंट ऐसे काम करने में सक्षम हो रहे हैं जिनमें कई चरणों में जानकारी जुटाना, खतरे का आकलन करना और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई करना शामिल है। इसी के साथ एक नई बहस भी सामने आई है—अगर कोई AI सिस्टम किसी हमले को पहचान ले, तो क्या उसे इंसानी मंजूरी का इंतजार किए बिना खुद जवाबी कार्रवाई करने की अनुमति होनी चाहिए?
हाल के परीक्षणों और शोधों ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। ब्रिटेन के AI Security Institute की एक हालिया जांच में नियंत्रित साइबर सुरक्षा परीक्षणों के दौरान कुछ AI एजेंटों ने ऐसी अनधिकृत गतिविधियां कीं, जिनकी पहले से अनुमति नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक 122 परीक्षणों में 10 बार ऐसे व्यवहार सामने आए और कुल 19 अनधिकृत कार्रवाइयां दर्ज की गईं।
AI एजेंट क्यों बदल रहे हैं साइबर सुरक्षा का तरीका?
पारंपरिक साइबर सुरक्षा में किसी हमले को पहचानने के बाद इंसानी विशेषज्ञ उसकी जांच करते हैं, खतरे की गंभीरता तय करते हैं और फिर सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाते हैं। AI एजेंट इस प्रक्रिया के कई हिस्सों को तेजी से संभाल सकते हैं।
ये सिस्टम बड़ी मात्रा में लॉग और सुरक्षा संकेतों का विश्लेषण कर सकते हैं, संदिग्ध गतिविधियों को प्राथमिकता दे सकते हैं और तय नियमों के भीतर सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसी वजह से कंपनियां इन्हें Security Operations Center यानी SOC के काम में शामिल करने की दिशा में बढ़ रही हैं। 2026 की एक समीक्षा में भी LLM आधारित एजेंट्स के खतरे की पहचान, vulnerability analysis और साइबर डिफेंस में बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।
हमलावरों के लिए भी AI बन रहा है ताकत
समस्या का दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है। वही तकनीक जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, उसका दुरुपयोग हमले करने के लिए भी हो सकता है।
AI एजेंट किसी हमले के कई चरणों को तेज कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों के लिए बड़े पैमाने पर हमले तैयार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। एजेंट अलग-अलग टूल्स के साथ काम कर सकते हैं और लंबे समय तक चलने वाले कार्यों को एक क्रम में पूरा करने की क्षमता रखते हैं।
हाल के AI सुरक्षा परीक्षणों में भी कुछ मॉडलों के ऐसे व्यवहार सामने आए हैं जिनमें उन्होंने निर्धारित सीमाओं के बाहर जाकर इंटरनेट से संपर्क किया या अनधिकृत गतिविधियां कीं। ये घटनाएं वास्तविक नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं थीं, लेकिन उन्होंने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि अधिक शक्तिशाली एजेंटों को खुले डिजिटल वातावरण में कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
डिफेंस में AI को पूरी आजादी देने की कोशिश
दूसरी तरफ साइबर डिफेंस में AI की क्षमता तेजी से बढ़ाई जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 में अपने agentic security system के जरिए Windows के कई हिस्सों में नई vulnerabilities खोजने की जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक सिस्टम ने 16 नई कमजोरियां पहचानने में मदद की, जिनमें कुछ गंभीर remote code execution vulnerabilities भी शामिल थीं।
कई रिसर्च प्रोजेक्ट ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं जो खतरे का पता लगने के बाद तय सुरक्षा नीतियों के तहत remediation कर सकें। उदाहरण के लिए, PatchWeaver जैसे शोध मॉडल में AI को सीधे असीमित अधिकार देने के बजाय policy-based सीमाओं, approval gates और staged rollout के भीतर काम करने की अवधारणा पर जोर दिया गया है।
यानी भविष्य का मॉडल जरूरी नहीं कि पूरी तरह इंसान या पूरी तरह AI पर आधारित हो। इसके बजाय AI तेजी से कार्रवाई करे, लेकिन उसके अधिकार पहले से तय सीमाओं में बंधे रहें—यह तरीका ज्यादा व्यावहारिक माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या AI खुद जवाबी हमला करे?
यहीं से बहस का सबसे संवेदनशील हिस्सा शुरू होता है। अगर किसी कंपनी या सैन्य नेटवर्क पर साइबर हमला हो रहा है और AI कुछ ही सेकंड में हमले की पहचान कर सकता है, तो इंसानी मंजूरी का इंतजार करने में नुकसान बढ़ सकता है।
लेकिन जवाबी हमला केवल तकनीकी फैसला नहीं है। AI किसी सिस्टम की पहचान गलत कर सकता है, हमले के स्रोत को लेकर भ्रमित हो सकता है या किसी तीसरे पक्ष के सिस्टम को हमलावर समझ सकता है। ऐसी गलती की स्थिति में एक स्वचालित जवाबी कार्रवाई दूसरे नेटवर्क, कंपनी या देश को प्रभावित कर सकती है।
यही कारण है कि सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में human-in-the-loop या कम से कम स्पष्ट मानव नियंत्रण की बहस महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है कि किस स्तर की कार्रवाई AI खुद कर सकता है और किस कार्रवाई से पहले इंसानी अनुमति जरूरी होनी चाहिए।
हर साइबर कार्रवाई के लिए एक जैसा नियंत्रण संभव नहीं
सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने एक व्यावहारिक चुनौती यह भी है कि हर घटना को इंसानी मंजूरी के लिए रोकना AI की गति का फायदा कम कर सकता है। वहीं हर निर्णय AI को सौंप देना जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए एक संभावित मॉडल में कार्रवाई को जोखिम के आधार पर अलग-अलग स्तरों में बांटा जा सकता है। कम जोखिम वाले काम—जैसे किसी संदिग्ध सत्र को अस्थायी रूप से रोकना या किसी डिवाइस को नेटवर्क से अलग करना—स्वचालित हो सकते हैं। वहीं ऐसे कदम जिनका असर दूसरे संगठनों या नेटवर्क पर पड़ सकता है, उनके लिए मानव स्वीकृति जरूरी हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की साइबर सुरक्षा एजेंसी भी agentic AI को अपनाते समय स्पष्ट सुरक्षा नियंत्रण, निगरानी और लगातार जोखिम आकलन की जरूरत पर जोर देती है। उसके अनुसार ऐसे एजेंट कम जोखिम वाले दोहराव वाले कामों को स्वचालित कर सकते हैं, लेकिन उनके बढ़ते अधिकारों के साथ नए सुरक्षा जोखिम भी पैदा होते हैं।
AI से बने सुरक्षा पैच भी हमेशा भरोसेमंद नहीं
AI की सीमाएं केवल साइबर हमले तक नहीं हैं। सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करने के लिए AI द्वारा तैयार किए गए पैच भी हर बार सही साबित नहीं हो रहे हैं। हालिया शोध में हजारों AI-generated security patches का परीक्षण किया गया और सभी कमजोरियों को पूरी तरह ठीक करने की दर सीमित पाई गई। कुछ मामलों में पैच ने मूल समस्या को पूरी तरह हल नहीं किया, जबकि कुछ में नए जोखिम पैदा होने की संभावना भी सामने आई।
इससे यह साफ होता है कि AI की गति और क्षमता के बावजूद verification जरूरी है। केवल इसलिए कि कोई एजेंट किसी समस्या का समाधान सुझा रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि उस समाधान को बिना जांच के सिस्टम पर लागू कर दिया जाए।
साइबर युद्ध में बदल सकता है शक्ति संतुलन
AI आधारित साइबर एजेंटों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से साइबर हमलों और बचाव के बीच की गति बदल सकती है। अभी जहां किसी हमले की जांच और प्रतिक्रिया में मानव विशेषज्ञों को समय लगता है, वहीं भविष्य में AI सिस्टम कुछ प्रक्रियाएं लगभग लगातार चला सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक स्वायत्त साइबर एजेंट भविष्य में राज्य समर्थित समूहों और अपराधियों दोनों के लिए शक्तिशाली उपकरण बन सकते हैं। इससे साइबर संघर्ष का पैमाना बढ़ने और गलत आकलन से बड़े स्तर के नुकसान का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
इसी वजह से साइबर सुरक्षा की अगली दौड़ सिर्फ यह तय करने की नहीं होगी कि किसके पास सबसे शक्तिशाली AI है। असली चुनौती यह तय करने की होगी कि AI को कितनी स्वतंत्रता दी जाए, उसके फैसलों की जिम्मेदारी कौन लेगा और किस बिंदु पर इंसान का अंतिम नियंत्रण अनिवार्य रहेगा।
AI की बढ़ती ताकत से साइबर जंग का नया दौर: हमले भी होंगे ऑटोमैटिक, बचाव भी; बिना इंसानी मंजूरी पलटवार पर बहस तेज
Priyanka Mathur
साइबर सुरक्षा की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब केवल संदिग्ध गतिविधियों की पहचान या अलर्ट जारी करने तक सीमित नहीं रह गया है। AI एजेंट ऐसे काम करने में सक्षम हो रहे हैं जिनमें कई चरणों में जानकारी जुटाना, खतरे का आकलन करना और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई करना शामिल है। इसी के साथ एक नई बहस भी सामने आई है—अगर कोई AI सिस्टम किसी हमले को पहचान ले, तो क्या उसे इंसानी मंजूरी का इंतजार किए बिना खुद जवाबी कार्रवाई करने की अनुमति होनी चाहिए?
हाल के परीक्षणों और शोधों ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। ब्रिटेन के AI Security Institute की एक हालिया जांच में नियंत्रित साइबर सुरक्षा परीक्षणों के दौरान कुछ AI एजेंटों ने ऐसी अनधिकृत गतिविधियां कीं, जिनकी पहले से अनुमति नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक 122 परीक्षणों में 10 बार ऐसे व्यवहार सामने आए और कुल 19 अनधिकृत कार्रवाइयां दर्ज की गईं।
AI एजेंट क्यों बदल रहे हैं साइबर सुरक्षा का तरीका?
पारंपरिक साइबर सुरक्षा में किसी हमले को पहचानने के बाद इंसानी विशेषज्ञ उसकी जांच करते हैं, खतरे की गंभीरता तय करते हैं और फिर सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाते हैं। AI एजेंट इस प्रक्रिया के कई हिस्सों को तेजी से संभाल सकते हैं।
ये सिस्टम बड़ी मात्रा में लॉग और सुरक्षा संकेतों का विश्लेषण कर सकते हैं, संदिग्ध गतिविधियों को प्राथमिकता दे सकते हैं और तय नियमों के भीतर सुरक्षा संबंधी प्रतिक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसी वजह से कंपनियां इन्हें Security Operations Center यानी SOC के काम में शामिल करने की दिशा में बढ़ रही हैं। 2026 की एक समीक्षा में भी LLM आधारित एजेंट्स के खतरे की पहचान, vulnerability analysis और साइबर डिफेंस में बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।
हमलावरों के लिए भी AI बन रहा है ताकत
समस्या का दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है। वही तकनीक जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, उसका दुरुपयोग हमले करने के लिए भी हो सकता है।
AI एजेंट किसी हमले के कई चरणों को तेज कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों के लिए बड़े पैमाने पर हमले तैयार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। एजेंट अलग-अलग टूल्स के साथ काम कर सकते हैं और लंबे समय तक चलने वाले कार्यों को एक क्रम में पूरा करने की क्षमता रखते हैं।
हाल के AI सुरक्षा परीक्षणों में भी कुछ मॉडलों के ऐसे व्यवहार सामने आए हैं जिनमें उन्होंने निर्धारित सीमाओं के बाहर जाकर इंटरनेट से संपर्क किया या अनधिकृत गतिविधियां कीं। ये घटनाएं वास्तविक नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं थीं, लेकिन उन्होंने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि अधिक शक्तिशाली एजेंटों को खुले डिजिटल वातावरण में कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
डिफेंस में AI को पूरी आजादी देने की कोशिश
दूसरी तरफ साइबर डिफेंस में AI की क्षमता तेजी से बढ़ाई जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 में अपने agentic security system के जरिए Windows के कई हिस्सों में नई vulnerabilities खोजने की जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक सिस्टम ने 16 नई कमजोरियां पहचानने में मदद की, जिनमें कुछ गंभीर remote code execution vulnerabilities भी शामिल थीं।
कई रिसर्च प्रोजेक्ट ऐसे सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं जो खतरे का पता लगने के बाद तय सुरक्षा नीतियों के तहत remediation कर सकें। उदाहरण के लिए, PatchWeaver जैसे शोध मॉडल में AI को सीधे असीमित अधिकार देने के बजाय policy-based सीमाओं, approval gates और staged rollout के भीतर काम करने की अवधारणा पर जोर दिया गया है।
यानी भविष्य का मॉडल जरूरी नहीं कि पूरी तरह इंसान या पूरी तरह AI पर आधारित हो। इसके बजाय AI तेजी से कार्रवाई करे, लेकिन उसके अधिकार पहले से तय सीमाओं में बंधे रहें—यह तरीका ज्यादा व्यावहारिक माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या AI खुद जवाबी हमला करे?
यहीं से बहस का सबसे संवेदनशील हिस्सा शुरू होता है। अगर किसी कंपनी या सैन्य नेटवर्क पर साइबर हमला हो रहा है और AI कुछ ही सेकंड में हमले की पहचान कर सकता है, तो इंसानी मंजूरी का इंतजार करने में नुकसान बढ़ सकता है।
लेकिन जवाबी हमला केवल तकनीकी फैसला नहीं है। AI किसी सिस्टम की पहचान गलत कर सकता है, हमले के स्रोत को लेकर भ्रमित हो सकता है या किसी तीसरे पक्ष के सिस्टम को हमलावर समझ सकता है। ऐसी गलती की स्थिति में एक स्वचालित जवाबी कार्रवाई दूसरे नेटवर्क, कंपनी या देश को प्रभावित कर सकती है।
यही कारण है कि सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में human-in-the-loop या कम से कम स्पष्ट मानव नियंत्रण की बहस महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है कि किस स्तर की कार्रवाई AI खुद कर सकता है और किस कार्रवाई से पहले इंसानी अनुमति जरूरी होनी चाहिए।
हर साइबर कार्रवाई के लिए एक जैसा नियंत्रण संभव नहीं
सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने एक व्यावहारिक चुनौती यह भी है कि हर घटना को इंसानी मंजूरी के लिए रोकना AI की गति का फायदा कम कर सकता है। वहीं हर निर्णय AI को सौंप देना जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए एक संभावित मॉडल में कार्रवाई को जोखिम के आधार पर अलग-अलग स्तरों में बांटा जा सकता है। कम जोखिम वाले काम—जैसे किसी संदिग्ध सत्र को अस्थायी रूप से रोकना या किसी डिवाइस को नेटवर्क से अलग करना—स्वचालित हो सकते हैं। वहीं ऐसे कदम जिनका असर दूसरे संगठनों या नेटवर्क पर पड़ सकता है, उनके लिए मानव स्वीकृति जरूरी हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की साइबर सुरक्षा एजेंसी भी agentic AI को अपनाते समय स्पष्ट सुरक्षा नियंत्रण, निगरानी और लगातार जोखिम आकलन की जरूरत पर जोर देती है। उसके अनुसार ऐसे एजेंट कम जोखिम वाले दोहराव वाले कामों को स्वचालित कर सकते हैं, लेकिन उनके बढ़ते अधिकारों के साथ नए सुरक्षा जोखिम भी पैदा होते हैं।
AI से बने सुरक्षा पैच भी हमेशा भरोसेमंद नहीं
AI की सीमाएं केवल साइबर हमले तक नहीं हैं। सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करने के लिए AI द्वारा तैयार किए गए पैच भी हर बार सही साबित नहीं हो रहे हैं। हालिया शोध में हजारों AI-generated security patches का परीक्षण किया गया और सभी कमजोरियों को पूरी तरह ठीक करने की दर सीमित पाई गई। कुछ मामलों में पैच ने मूल समस्या को पूरी तरह हल नहीं किया, जबकि कुछ में नए जोखिम पैदा होने की संभावना भी सामने आई।
इससे यह साफ होता है कि AI की गति और क्षमता के बावजूद verification जरूरी है। केवल इसलिए कि कोई एजेंट किसी समस्या का समाधान सुझा रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि उस समाधान को बिना जांच के सिस्टम पर लागू कर दिया जाए।
साइबर युद्ध में बदल सकता है शक्ति संतुलन
AI आधारित साइबर एजेंटों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से साइबर हमलों और बचाव के बीच की गति बदल सकती है। अभी जहां किसी हमले की जांच और प्रतिक्रिया में मानव विशेषज्ञों को समय लगता है, वहीं भविष्य में AI सिस्टम कुछ प्रक्रियाएं लगभग लगातार चला सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक स्वायत्त साइबर एजेंट भविष्य में राज्य समर्थित समूहों और अपराधियों दोनों के लिए शक्तिशाली उपकरण बन सकते हैं। इससे साइबर संघर्ष का पैमाना बढ़ने और गलत आकलन से बड़े स्तर के नुकसान का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
इसी वजह से साइबर सुरक्षा की अगली दौड़ सिर्फ यह तय करने की नहीं होगी कि किसके पास सबसे शक्तिशाली AI है। असली चुनौती यह तय करने की होगी कि AI को कितनी स्वतंत्रता दी जाए, उसके फैसलों की जिम्मेदारी कौन लेगा और किस बिंदु पर इंसान का अंतिम नियंत्रण अनिवार्य रहेगा।
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