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क्या व्यक्तिगत कार्बन टैक्स लागू होना चाहिए? बढ़ते प्रदूषण के बीच दुनिया में तेज हुई नई बहस
Priyanka Mathur
बार-बार हवाई यात्रा, ज्यादा ईंधन खपत वाले वाहन और अधिक कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स लगाने के प्रस्तावों ने छेड़ी नई चर्चा, सवाल—जिम्मेदारी व्यक्ति की या सिर्फ बड़ी कंपनियों की?
जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। बढ़ता वैशिक तापमान, अनियमित बारिश, भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना इस संकट की गंभीरता को लगातार बढ़ा रहे हैं। ऐसे में दुनिया के कई देशों में अब केवल उद्योगों और बड़े प्रदूषण फैलाने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की बात नहीं हो रही, बल्कि आम लोगों की जीवनशैली और उनके कार्बन उत्सर्जन को भी नीति का हिस्सा बनाने पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बहस के बीच "पर्सनल कार्बन टैक्स" या "व्यक्तिगत कार्बन टैक्स" का विचार सामने आया है।
इस प्रस्ताव के अनुसार जो लोग अधिक कार्बन उत्सर्जन वाली गतिविधियां करते हैं, जैसे बार-बार हवाई यात्रा करना, अधिक ईंधन खपत वाली बड़ी एसयूवी या लग्जरी वाहनों का उपयोग करना या अत्यधिक ऊर्जा की खपत करना, उनसे अतिरिक्त टैक्स लिया जा सकता है। समर्थकों का मानना है कि इससे लोग पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे, जबकि विरोध करने वाले इसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हैं।
क्या होता है पर्सनल कार्बन टैक्स?
पर्सनल कार्बन टैक्स एक ऐसी अवधारणा है जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा किए गए कार्बन उत्सर्जन के आधार पर कर लगाने की बात कही जाती है। इसका उद्देश्य लोगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति साल में कई बार हवाई यात्रा करता है, बड़े इंजन वाली गाड़ी चलाता है या अत्यधिक ऊर्जा का उपयोग करता है, तो उसे अधिक टैक्स देना पड़ सकता है। वहीं सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा बचाने वाले उपाय अपनाने वालों पर इसका प्रभाव कम रहेगा।
किन गतिविधियों पर लग सकता है अतिरिक्त टैक्स?
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में यदि ऐसी नीति लागू होती है तो कुछ गतिविधियों को इसमें शामिल किया जा सकता है—
- बार-बार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राएं।
- अधिक ईंधन खपत वाले निजी वाहन।
- अत्यधिक बिजली और ऊर्जा की खपत।
- लक्जरी जीवनशैली से जुड़ी उच्च कार्बन गतिविधियां।
- निजी जेट और बड़े यॉट जैसी सुविधाओं का उपयोग।
हालांकि, अलग-अलग देशों में इसके नियम अलग हो सकते हैं और अभी अधिकांश स्थानों पर यह केवल नीति स्तर पर चर्चा का विषय है।
समर्थकों का क्या कहना है?
इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई केवल सरकारों और उद्योगों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपनी जीवनशैली में बदलाव लाए तो कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
समर्थकों का तर्क है कि आर्थिक प्रोत्साहन और अतिरिक्त कर लोगों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जैसे लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे, इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे और अनावश्यक हवाई यात्राओं को कम करेंगे।
विरोध करने वालों की क्या दलील है?
दूसरी ओर इस विचार के विरोध में भी कई तर्क दिए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ा योगदान बड़े उद्योगों, ऊर्जा कंपनियों और भारी औद्योगिक क्षेत्रों का है। ऐसे में आम नागरिकों पर टैक्स लगाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमीर और गरीब लोगों के बीच पहले से मौजूद आर्थिक असमानता इस तरह के टैक्स से और बढ़ सकती है। उच्च आय वाले लोग अतिरिक्त टैक्स देकर भी अपनी जीवनशैली जारी रख सकते हैं, जबकि मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या सिर्फ कंपनियों पर कार्रवाई काफी है?
जलवायु नीति पर काम करने वाले विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि सरकारों को सबसे पहले उन उद्योगों पर सख्त नियम लागू करने चाहिए जो बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन करते हैं। बिजली उत्पादन, इस्पात, सीमेंट, परिवहन और तेल-गैस उद्योग दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों में गिने जाते हैं।
इनका कहना है कि यदि कंपनियों के लिए कड़े उत्सर्जन मानक, स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य और हरित तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए तो बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी क्यों मानी जा रही अहम?
विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केवल एक पक्ष पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार, उद्योग और आम नागरिक—तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि लोग बिजली बचाएं, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, सिंगल-यूज प्लास्टिक कम करें और ऊर्जा दक्ष उपकरण अपनाएं तो सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
इसी वजह से कई नीति निर्माता व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कॉरपोरेट जवाबदेही दोनों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं।
दुनिया के कई देशों में जारी है चर्चा
यूरोप समेत कई विकसित देशों में कार्बन टैक्स, ग्रीन टैक्स और पर्यावरण शुल्क जैसी नीतियों पर पहले से काम हो रहा है। कुछ देशों ने विमान यात्राओं या प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर अतिरिक्त शुल्क भी लागू किया है। हालांकि व्यक्तिगत कार्बन टैक्स को लेकर अभी भी व्यापक बहस जारी है और अधिकांश देशों में इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
जलवायु परिवर्तन की गंभीर होती चुनौती के बीच आने वाले वर्षों में इस विषय पर वैश्विक स्तर पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है।
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क्या व्यक्तिगत कार्बन टैक्स लागू होना चाहिए? बढ़ते प्रदूषण के बीच दुनिया में तेज हुई नई बहस
Priyanka Mathur
जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। बढ़ता वैशिक तापमान, अनियमित बारिश, भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना इस संकट की गंभीरता को लगातार बढ़ा रहे हैं। ऐसे में दुनिया के कई देशों में अब केवल उद्योगों और बड़े प्रदूषण फैलाने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की बात नहीं हो रही, बल्कि आम लोगों की जीवनशैली और उनके कार्बन उत्सर्जन को भी नीति का हिस्सा बनाने पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बहस के बीच "पर्सनल कार्बन टैक्स" या "व्यक्तिगत कार्बन टैक्स" का विचार सामने आया है।
इस प्रस्ताव के अनुसार जो लोग अधिक कार्बन उत्सर्जन वाली गतिविधियां करते हैं, जैसे बार-बार हवाई यात्रा करना, अधिक ईंधन खपत वाली बड़ी एसयूवी या लग्जरी वाहनों का उपयोग करना या अत्यधिक ऊर्जा की खपत करना, उनसे अतिरिक्त टैक्स लिया जा सकता है। समर्थकों का मानना है कि इससे लोग पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे, जबकि विरोध करने वाले इसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हैं।
क्या होता है पर्सनल कार्बन टैक्स?
पर्सनल कार्बन टैक्स एक ऐसी अवधारणा है जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा किए गए कार्बन उत्सर्जन के आधार पर कर लगाने की बात कही जाती है। इसका उद्देश्य लोगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति साल में कई बार हवाई यात्रा करता है, बड़े इंजन वाली गाड़ी चलाता है या अत्यधिक ऊर्जा का उपयोग करता है, तो उसे अधिक टैक्स देना पड़ सकता है। वहीं सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा बचाने वाले उपाय अपनाने वालों पर इसका प्रभाव कम रहेगा।
किन गतिविधियों पर लग सकता है अतिरिक्त टैक्स?
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में यदि ऐसी नीति लागू होती है तो कुछ गतिविधियों को इसमें शामिल किया जा सकता है—
- बार-बार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राएं।
- अधिक ईंधन खपत वाले निजी वाहन।
- अत्यधिक बिजली और ऊर्जा की खपत।
- लक्जरी जीवनशैली से जुड़ी उच्च कार्बन गतिविधियां।
- निजी जेट और बड़े यॉट जैसी सुविधाओं का उपयोग।
हालांकि, अलग-अलग देशों में इसके नियम अलग हो सकते हैं और अभी अधिकांश स्थानों पर यह केवल नीति स्तर पर चर्चा का विषय है।
समर्थकों का क्या कहना है?
इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई केवल सरकारों और उद्योगों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। उनका कहना है कि यदि हर व्यक्ति अपनी जीवनशैली में बदलाव लाए तो कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
समर्थकों का तर्क है कि आर्थिक प्रोत्साहन और अतिरिक्त कर लोगों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जैसे लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे, इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएंगे और अनावश्यक हवाई यात्राओं को कम करेंगे।
विरोध करने वालों की क्या दलील है?
दूसरी ओर इस विचार के विरोध में भी कई तर्क दिए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ा योगदान बड़े उद्योगों, ऊर्जा कंपनियों और भारी औद्योगिक क्षेत्रों का है। ऐसे में आम नागरिकों पर टैक्स लगाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमीर और गरीब लोगों के बीच पहले से मौजूद आर्थिक असमानता इस तरह के टैक्स से और बढ़ सकती है। उच्च आय वाले लोग अतिरिक्त टैक्स देकर भी अपनी जीवनशैली जारी रख सकते हैं, जबकि मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या सिर्फ कंपनियों पर कार्रवाई काफी है?
जलवायु नीति पर काम करने वाले विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि सरकारों को सबसे पहले उन उद्योगों पर सख्त नियम लागू करने चाहिए जो बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन करते हैं। बिजली उत्पादन, इस्पात, सीमेंट, परिवहन और तेल-गैस उद्योग दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों में गिने जाते हैं।
इनका कहना है कि यदि कंपनियों के लिए कड़े उत्सर्जन मानक, स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य और हरित तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए तो बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी क्यों मानी जा रही अहम?
विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केवल एक पक्ष पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार, उद्योग और आम नागरिक—तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि लोग बिजली बचाएं, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, सिंगल-यूज प्लास्टिक कम करें और ऊर्जा दक्ष उपकरण अपनाएं तो सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
इसी वजह से कई नीति निर्माता व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कॉरपोरेट जवाबदेही दोनों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं।
दुनिया के कई देशों में जारी है चर्चा
यूरोप समेत कई विकसित देशों में कार्बन टैक्स, ग्रीन टैक्स और पर्यावरण शुल्क जैसी नीतियों पर पहले से काम हो रहा है। कुछ देशों ने विमान यात्राओं या प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर अतिरिक्त शुल्क भी लागू किया है। हालांकि व्यक्तिगत कार्बन टैक्स को लेकर अभी भी व्यापक बहस जारी है और अधिकांश देशों में इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
जलवायु परिवर्तन की गंभीर होती चुनौती के बीच आने वाले वर्षों में इस विषय पर वैश्विक स्तर पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है।
