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उज्जैन में सड़क के बीच हनुमान प्रतिमा का विवाद, प्रशासन ने हटाने से किया इनकार
Digital Desk
उज्जैन में सती गेट के पास सड़क चौड़ीकरण कार्य के बीच हनुमान प्रतिमा को लेकर विवाद शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं ने विरोध किया, जबकि प्रशासन ने प्रतिमा हटाने की किसी भी कोशिश से इनकार किया है।
उज्जैन के सती गेट के पास सड़क के बीच स्थित हनुमान प्रतिमा इन दिनों श्रद्धालुओं और राजनीतिक हलकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण से जुड़े काम के बाद प्रतिमा को हटाए जाने की खबरों ने विवाद खड़ा कर दिया। हालांकि, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने का अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया है।
करीब एक सप्ताह से प्रतिमा उसी स्थान पर बनी हुई है और फिलहाल उसके ऊपर अस्थायी टेंट लगाया गया है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा के वीडियो और रील तेजी से प्रसारित होने के बाद मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों से श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का सिलसिला बढ़ गया है।
मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, धार्मिक संतों और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
सड़क चौड़ीकरण के बीच प्रतिमा पर विवाद
विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को हुई, जब नगर निकाय से जुड़े अधिकारियों ने सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत मंदिर के आसपास काम शुरू किया।
बताया जा रहा है कि आसपास की संरचना का अधिकांश हिस्सा हटा दिया गया है, जबकि हनुमान प्रतिमा अभी भी उसी स्थान पर मौजूद है। प्रतिमा को अस्थायी टेंट से ढका गया है।
सड़क के बीच प्रतिमा के खड़े रहने का दृश्य अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उज्जैन आने वाले कई श्रद्धालु इसे देखने के लिए भी पहुंच रहे हैं।
प्रशासन ने हटाने की कोशिश से किया इनकार
प्रतिमा को हटाने के कई कथित प्रयासों की खबरों के बीच उज्जैन जिला प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया।
प्रशासन के अनुसार, मामला उज्जैन के लोगों और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। प्रतिमा की सुरक्षा, जनभावना और शहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन ने उन खबरों को भ्रामक बताया, जिनमें प्रतिमा को स्थानांतरित करने के कई प्रयास किए जाने का दावा किया गया था।
प्रशासन के मुताबिक, अब तक प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने के लिए न तो मशीनरी और न ही श्रमिकों के जरिए कोई प्रयास किया गया है।
मंदिर पक्ष ने बताया अलग घटनाक्रम
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने घटनाक्रम को लेकर अलग जानकारी दी है।
उनके अनुसार, मंदिर पक्ष ने शुरुआत में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए सशर्त सहमति दी थी। इसके बाद नगर निकाय के कर्मचारियों ने प्रतिमा के आसपास जमा मलबा और प्लास्टर हटाने का काम शुरू किया।
हालांकि, प्रतिमा को संभावित नुकसान की आशंका के चलते काम रोक दिया गया। इसके बाद इंदौर से विशेषज्ञों को बुलाकर संरचना का निरीक्षण कराया गया।
पुजारी के अनुसार, विशेषज्ञों ने प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले आधुनिक उपकरणों और स्कैनिंग तकनीक के जरिए विस्तृत जांच कराने की सलाह दी।
IIT Indore की टीम ने किया निरीक्षण
विवाद के बीच प्रतिमा और उसके आसपास की संरचना की तकनीकी जांच भी शुरू की गई है।
IIT Indore की एक टीम ने इस सप्ताह मंदिर पहुंचकर संरचना का निरीक्षण किया। बताया गया है कि टीम ने गुरुवार को दोबारा स्थल का आकलन किया।
तकनीकी जांच महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतिमा को लेकर किसी भी निर्णय में उसकी संरचनात्मक स्थिरता और बिना नुकसान पहुंचाए उसे स्थानांतरित करने की व्यवहारिकता को ध्यान में रखना होगा।
मंदिर के लिए नई जमीन का प्रस्ताव
उज्जैन नगर निगम की ओर से मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान भी उपलब्ध कराया गया है।
2 सितंबर को जारी पत्र में नगर निगम ने मंदिर के पुजारियों को जानकारी दी कि वार्ड 20 में 20.90 वर्ग मीटर जमीन मंदिर के स्थानांतरण के लिए उपलब्ध कराई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थान पर पहले पानी की टंकी थी, जिसे हटाकर जमीन खाली की गई।
हालांकि, मौजूदा प्रतिमा को वास्तव में स्थानांतरित किया जाना चाहिए या नहीं, यह सवाल अभी भी विवाद के केंद्र में है।
उमा भारती ने वैकल्पिक सड़क योजना की मांग की
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सड़क योजना में बदलाव पर विचार करने की अपील की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि हनुमान प्रतिमा को स्थानांतरित करने के बजाय ऐसा विकल्प तलाशा जाए, जिससे सड़क विकास का काम भी हो सके और धार्मिक स्थल भी सुरक्षित रहे।
उमा भारती ने भोपाल के कमलापति क्षेत्र के पास सड़क चौड़ीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं की योजना इस तरह बनाई जा सकती है कि धार्मिक संरचनाओं को नुकसान न पहुंचे।
उनकी प्रतिक्रिया के बाद मामले में राजनीतिक रंग भी जुड़ गया है।
सोशल मीडिया से बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ने के साथ यहां श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, नागपुर, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों से लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
धार्मिक संतों ने भी मंदिर पहुंचकर सड़क विकास के साथ प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक समाधान की मांग की है।
साध्वी हर्षानंद गिरि, जिन्हें हर्षा रिछारिया के नाम से भी जाना जाता है, ने मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को स्थानांतरित करने का विरोध किया। उन्होंने प्रशासन से मौके पर आकर पूजा करने और मंदिर के पुनर्निर्माण का आश्वासन देने की मांग की। उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर विरोध और उपवास की चेतावनी भी दी।
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
बढ़ती भीड़ और अलग-अलग दावों के बीच मामला संवेदनशील हो गया है। फिलहाल प्रतिमा की तकनीकी जांच और प्रशासन के अगले फैसले से यह तय होगा कि सड़क परियोजना को प्रतिमा को हटाए बिना आगे बढ़ाया जा सकता है या इसके लिए कोई अन्य समाधान तलाशना होगा।
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