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हनुमान जयंती 2026: जानें हनुमान जन्म की दिव्य कथा
धर्म डेस्क
माता अंजना की तपस्या, वायु देव का वरदान और इंद्र के वज्र से जुड़ी है हनुमान जी के जन्म और नामकरण की कथा
हनुमान जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धालु भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना में लीन हैं। इस पावन दिन पर अंजनी पुत्र हनुमान के जन्म और उनके नामकरण से जुड़ी पौराणिक कथा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार और भगवान राम का परम भक्त माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर हुआ था। संतान प्राप्ति के लिए माता अंजना ने मतंग ऋषि के कहने पर कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वायु देव ने उन्हें एक शक्तिशाली पुत्र का वरदान दिया। इसी कारण हनुमान जी को ‘मारुति’ और ‘पवनपुत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।
हनुमान जी के जन्म से जुड़ी एक अन्य कथा अयोध्या से भी संबंधित है। कहा जाता है कि राजा दशरथ द्वारा किए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ के दौरान प्राप्त दिव्य खीर का एक अंश एक पक्षी द्वारा माता अंजना तक पहुंचा। इसे शिव का प्रसाद मानकर ग्रहण करने के बाद उन्होंने हनुमान जी को जन्म दिया। इस प्रकार हनुमान जी को भगवान शिव के अंशावतार के रूप में भी देखा जाता है।
बाल्यकाल में ही हनुमान जी अपनी अद्भुत शक्तियों के लिए प्रसिद्ध हो गए थे। एक प्रसंग के अनुसार, उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इस दौरान देवराज इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी घायल हो गई। इसी घटना के बाद उनका नाम ‘हनुमान’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘टूटी ठुड्डी वाला’।
इस घटना के पश्चात सभी देवताओं ने उन्हें अमरता और असीम शक्तियों का वरदान दिया। यही कारण है कि हनुमान जी को संकटमोचन और कलयुग के जागृत देवता के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर उनकी कथा का श्रवण, हनुमान चालीसा का पाठ और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शक्ति, साहस तथा सफलता की प्राप्ति होती है।
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हनुमान जयंती 2026: जानें हनुमान जन्म की दिव्य कथा
धर्म डेस्क
हनुमान जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धालु भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना में लीन हैं। इस पावन दिन पर अंजनी पुत्र हनुमान के जन्म और उनके नामकरण से जुड़ी पौराणिक कथा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार और भगवान राम का परम भक्त माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर हुआ था। संतान प्राप्ति के लिए माता अंजना ने मतंग ऋषि के कहने पर कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वायु देव ने उन्हें एक शक्तिशाली पुत्र का वरदान दिया। इसी कारण हनुमान जी को ‘मारुति’ और ‘पवनपुत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।
हनुमान जी के जन्म से जुड़ी एक अन्य कथा अयोध्या से भी संबंधित है। कहा जाता है कि राजा दशरथ द्वारा किए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ के दौरान प्राप्त दिव्य खीर का एक अंश एक पक्षी द्वारा माता अंजना तक पहुंचा। इसे शिव का प्रसाद मानकर ग्रहण करने के बाद उन्होंने हनुमान जी को जन्म दिया। इस प्रकार हनुमान जी को भगवान शिव के अंशावतार के रूप में भी देखा जाता है।
बाल्यकाल में ही हनुमान जी अपनी अद्भुत शक्तियों के लिए प्रसिद्ध हो गए थे। एक प्रसंग के अनुसार, उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इस दौरान देवराज इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी घायल हो गई। इसी घटना के बाद उनका नाम ‘हनुमान’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘टूटी ठुड्डी वाला’।
इस घटना के पश्चात सभी देवताओं ने उन्हें अमरता और असीम शक्तियों का वरदान दिया। यही कारण है कि हनुमान जी को संकटमोचन और कलयुग के जागृत देवता के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर उनकी कथा का श्रवण, हनुमान चालीसा का पाठ और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शक्ति, साहस तथा सफलता की प्राप्ति होती है।
