- Hindi News
- बिजनेस
- ऑफशोर क्रिप्टो का बढ़ता खतरा जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
ऑफशोर क्रिप्टो का बढ़ता खतरा जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
Digital Desk
By दैनिक जागरण
On
दुनिया भर में वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) क्षेत्र तेजी से फैल रहा है और इसे सबसे इनोवेटिव क्षेत्रों में गिना जा रहा है। लेकिन इस विस्तार के साथ कई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं, जैसे स्पष्ट नियमों की कमी, कानूनी अनिश्चितता, लोगों में संदेह और ज्यादा टैक्स। इसी के साथ अब एक नई और गंभीर चिंता भी जुड़ गई है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्लेटफॉर्म एक देश में रजिस्टर होते हैं, लेकिन दूसरे देशों के यूजर्स को सेवाएं देते हैं और वह भी बिना प्रभावी नियामक निगरानी के।
इन प्लेटफॉर्म्स को ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर (oVASP) कहा जाता है। ये कागजों में एक देश से संचालित दिखते हैं, जबकि उनकी सेवाएं दूसरे देशों में फैली होती हैं। अक्सर ये स्थानीय नियमों का पालन नहीं करते, उपभोक्ता सुरक्षा को नजरअंदाज करते हैं और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी सिस्टम भी लागू नहीं करते। FATF के अनुसार, इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक खालीपन बनता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग जैसे जोखिमों को बढ़ाता है।
इस समस्या का केंद्र नियमों से बच निकलना है। जिन देशों में FATF के मानक लागू हैं, वहां VASP के लिए रजिस्ट्रेशन, KYC और संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग अनिवार्य है। लेकिन oVASP अपने ढांचे के कारण इन नियमों से बाहर रह जाते हैं। उनका मैनेजमेंट, सर्वर और ऑपरेशन्स अलग अलग देशों में होते हैं, जबकि सेवाएं कहीं और दी जाती हैं। इससे एजेंसियों के लिए इन तक पहुंचना और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है, खासकर तब जब ये कमजोर नियम वाले क्षेत्रों में मौजूद हों।
oVASP दो तरह के होते हैं। एक वे जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती और दूसरे वे जो जानबूझकर निगरानी से बचने के लिए ऐसा ढांचा बनाते हैं। दूसरी श्रेणी ज्यादा जोखिमपूर्ण है। ऐसे प्लेटफॉर्म अक्सर जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं करते, जिम्मेदारियों से बचते हैं और अपनी संरचना को इस तरह रखते हैं कि जवाबदेही तय करना मुश्किल हो।
निगरानी से बचने के लिए ये प्लेटफॉर्म स्थानीय एजेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, VPN को बढ़ावा देते हैं और कई बार भ्रामक जानकारी भी देते हैं। जटिल कॉरपोरेट ढांचा बनाकर ये असली जिम्मेदार तक पहुंचना कठिन बना देते हैं। नतीजतन, जांच लंबी खिंचती है और कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है, खासकर तब जब इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर गैरकानूनी गतिविधियों में होने लगे।
भारत का अनुभव भी इस खतरे को रेखांकित करता है। यहां नियम है कि भारतीय यूजर्स को सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स को देश में अपनी मौजूदगी दर्ज करनी होती है। इसके बावजूद कई ऑफशोर प्लेटफॉर्म कमजोर KYC के साथ भारतीय यूजर्स को जोड़ रहे हैं। इससे उन्हें लागत के मामले में बढ़त मिलती है और बड़ी संख्या में यूजर्स उनकी ओर जा रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म अब भी UPI के जरिए फंड जमा और निकासी, अक्सर बीच के माध्यमों के जरिए, सुविधा दे रहे हैं, जबकि वे भारत के नियामक दायरे से बाहर हैं।
रिपोर्ट यह भी मानती है कि कुछ सुधार हुए हैं। भारत ने निगरानी क्षमता बढ़ाई है, फिजिकल मौजूदगी के नियम सख्त किए हैं और एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर किया है। फिर भी चुनौती बनी हुई है। FATF का सुझाव है कि oVASP की सक्रिय पहचान हो, जोखिम आधारित निगरानी बढ़े और देशों के बीच सहयोग मजबूत किया जाए। जहां VASP रजिस्टर है, वहां उसके वैश्विक संचालन पर नजर रखी जाए और जहां सेवाएं दी जा रही हैं, वहां स्थानीय लाइसेंस अनिवार्य किया जाए।
वहीं प्राइवेट सेक्टर की भूमिका भी अहम है। बैंक, पेमेंट प्लेटफॉर्म्स और VASP को बिना लाइसेंस वाले ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स से दूरी रखनी होगी और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी नियामकों तक पहुंचानी होगी।
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार, oVASP की गतिविधियां उन जगहों पर अधिक पनपती हैं जहां नियमों और एजेंसियों के बीच समन्वय कमजोर होता है। ऐसे में, प्रभावी नियंत्रण के लिए देशों के बीच बेहतर सहयोग, स्पष्ट जवाबदेही और सख्त अनुपालन को आवश्यक बताया गया है।
Edited By: दैनिक जागरण
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
www.dainikjagranmpcg.com
01 Apr 2026 By दैनिक जागरण
ऑफशोर क्रिप्टो का बढ़ता खतरा जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
Digital Desk
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्लेटफॉर्म एक देश में रजिस्टर होते हैं, लेकिन दूसरे देशों के यूजर्स को सेवाएं देते हैं और वह भी बिना प्रभावी नियामक निगरानी के।
इन प्लेटफॉर्म्स को ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर (oVASP) कहा जाता है। ये कागजों में एक देश से संचालित दिखते हैं, जबकि उनकी सेवाएं दूसरे देशों में फैली होती हैं। अक्सर ये स्थानीय नियमों का पालन नहीं करते, उपभोक्ता सुरक्षा को नजरअंदाज करते हैं और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी सिस्टम भी लागू नहीं करते। FATF के अनुसार, इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक खालीपन बनता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग जैसे जोखिमों को बढ़ाता है।
इस समस्या का केंद्र नियमों से बच निकलना है। जिन देशों में FATF के मानक लागू हैं, वहां VASP के लिए रजिस्ट्रेशन, KYC और संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग अनिवार्य है। लेकिन oVASP अपने ढांचे के कारण इन नियमों से बाहर रह जाते हैं। उनका मैनेजमेंट, सर्वर और ऑपरेशन्स अलग अलग देशों में होते हैं, जबकि सेवाएं कहीं और दी जाती हैं। इससे एजेंसियों के लिए इन तक पहुंचना और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है, खासकर तब जब ये कमजोर नियम वाले क्षेत्रों में मौजूद हों।
oVASP दो तरह के होते हैं। एक वे जिन्हें नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती और दूसरे वे जो जानबूझकर निगरानी से बचने के लिए ऐसा ढांचा बनाते हैं। दूसरी श्रेणी ज्यादा जोखिमपूर्ण है। ऐसे प्लेटफॉर्म अक्सर जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं करते, जिम्मेदारियों से बचते हैं और अपनी संरचना को इस तरह रखते हैं कि जवाबदेही तय करना मुश्किल हो।
निगरानी से बचने के लिए ये प्लेटफॉर्म स्थानीय एजेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, VPN को बढ़ावा देते हैं और कई बार भ्रामक जानकारी भी देते हैं। जटिल कॉरपोरेट ढांचा बनाकर ये असली जिम्मेदार तक पहुंचना कठिन बना देते हैं। नतीजतन, जांच लंबी खिंचती है और कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है, खासकर तब जब इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर गैरकानूनी गतिविधियों में होने लगे।
भारत का अनुभव भी इस खतरे को रेखांकित करता है। यहां नियम है कि भारतीय यूजर्स को सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स को देश में अपनी मौजूदगी दर्ज करनी होती है। इसके बावजूद कई ऑफशोर प्लेटफॉर्म कमजोर KYC के साथ भारतीय यूजर्स को जोड़ रहे हैं। इससे उन्हें लागत के मामले में बढ़त मिलती है और बड़ी संख्या में यूजर्स उनकी ओर जा रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म अब भी UPI के जरिए फंड जमा और निकासी, अक्सर बीच के माध्यमों के जरिए, सुविधा दे रहे हैं, जबकि वे भारत के नियामक दायरे से बाहर हैं।
रिपोर्ट यह भी मानती है कि कुछ सुधार हुए हैं। भारत ने निगरानी क्षमता बढ़ाई है, फिजिकल मौजूदगी के नियम सख्त किए हैं और एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर किया है। फिर भी चुनौती बनी हुई है। FATF का सुझाव है कि oVASP की सक्रिय पहचान हो, जोखिम आधारित निगरानी बढ़े और देशों के बीच सहयोग मजबूत किया जाए। जहां VASP रजिस्टर है, वहां उसके वैश्विक संचालन पर नजर रखी जाए और जहां सेवाएं दी जा रही हैं, वहां स्थानीय लाइसेंस अनिवार्य किया जाए।
वहीं प्राइवेट सेक्टर की भूमिका भी अहम है। बैंक, पेमेंट प्लेटफॉर्म्स और VASP को बिना लाइसेंस वाले ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स से दूरी रखनी होगी और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी नियामकों तक पहुंचानी होगी।
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार, oVASP की गतिविधियां उन जगहों पर अधिक पनपती हैं जहां नियमों और एजेंसियों के बीच समन्वय कमजोर होता है। ऐसे में, प्रभावी नियंत्रण के लिए देशों के बीच बेहतर सहयोग, स्पष्ट जवाबदेही और सख्त अनुपालन को आवश्यक बताया गया है।
https://www.dainikjagranmpcg.com/business/the-growing-threat-of-offshore-crypto-that-can-no-longer/article-49846
टाप न्यूज
PHC Prosto Capsules: पुरुषों के प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी आयुर्वेदिक समाधान
Published On
By दैनिक जागरण
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी...
30 लाख के इनामी 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, AK-47 के साथ सभी हथियार भी सौंपे
Published On
By Rohit.P
गढ़चिरौली में नक्सल विरोधी अभियान के तहत 30 लाख रुपये के इनामी 9 हार्डकोर नक्सलियों ने एके-47 और एसएलआर जैसे...
चार इंटरनेशनल फेस्टिवल में छाई नवाजुद्दीन की नई फिल्म, जल्द भारत में होगी रिलीज
Published On
By Rohit.P
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ पहले ही चार अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी...
ऑफशोर क्रिप्टो का बढ़ता खतरा जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
Published On
By दैनिक जागरण
दुनिया भर में वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) क्षेत्र तेजी से फैल रहा है और इसे सबसे इनोवेटिव क्षेत्रों में गिना...
बिजनेस
01 Apr 2026 19:34:42
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी...
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.
