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फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अशुभ अंगारक योग, मेष, तुला और कुंभ पर बढ़ेगी मुश्किल
धर्म डेस्क
23 फरवरी को कुंभ राशि में होगा ग्रहों का संयोग, ज्योतिषाचार्य ने बताए नकारात्मक प्रभाव के कारण और बचाव के उपाय
फरवरी महीने में ग्रहों की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका असर ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान राहु और मंगल एक ही राशि में आकर युति बनाएंगे, जिससे एक उग्र और अशुभ योग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग स्वभाव में जल्दबाजी, तनाव, टकराव और अप्रत्याशित घटनाओं की संभावना को बढ़ाता है। सभी राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव रहेगा, लेकिन मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय अधिक सतर्कता का संकेत देता है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, फरवरी के तीसरे सप्ताह में मंगल का गोचर कुंभ राशि में होगा, जहां पहले से राहु स्थित रहेंगे। इन दोनों ग्रहों की युति से बनने वाला योग सामान्य परिस्थितियों में मानसिक अशांति, गुस्सा और गलत निर्णयों की प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है। ऐसे में यह समय धैर्य और आत्मनियंत्रण की परीक्षा लेने वाला माना जा रहा है।
मेष राशि के जातकों के लिए यह योग कार्यक्षेत्र में बाधाएं ला सकता है। रुके हुए कामों में देरी, अचानक खर्च और विवाद की स्थिति बन सकती है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि जल्दबाजी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इस दौरान किसी भी तरह के टकराव या बहस से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा।
तुला राशि वालों के लिए फरवरी का यह दौर मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है। अनावश्यक चिंता, नींद की कमी और निर्णयों में असमंजस की स्थिति बन सकती है। पारिवारिक या करीबी संबंधों में गलतफहमी की आशंका है। व्यापार या निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा।
वहीं, कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का असर अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है। आर्थिक मामलों में सावधानी न बरतने पर नुकसान हो सकता है। लेन-देन, दस्तावेजों और नए समझौतों में विशेष सतर्कता जरूरी होगी। घर और कार्यस्थल पर छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ सकता है, इसलिए संयमित व्यवहार अपनाना लाभकारी रहेगा।
ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार, ऐसे अशुभ योग के दौरान घबराने की बजाय संतुलित दिनचर्या अपनाना सबसे बड़ा उपाय माना जाता है। नियमित पूजा-पाठ, ध्यान और सकारात्मक सोच से मानसिक स्थिरता बनी रहती है। साथ ही, जोखिम भरे फैसलों, अनावश्यक बहस और क्रोध से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रह योग भविष्य की चेतावनी देते हैं, न कि निश्चित संकट। समय रहते सतर्कता और आत्मनियंत्रण अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फरवरी में बनने वाला यह योग भी यही संकेत देता है कि धैर्य, समझदारी और सावधानी से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है।
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