छत्तीसगढ़ रोजगार मेले से खाली हाथ लौटे युवा, नौकरी के बजाय मिला इंतज़ार का भरोसा

रायपुर (छ.ग.)

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राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले में पंजीयन तो हजारों का, लेकिन वास्तविक नियुक्ति बेहद सीमित; कम वेतन और अनिश्चित प्रक्रिया से नाराज़ दिखे अभ्यर्थी

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेला बेरोजगार युवाओं के लिए उम्मीद से ज्यादा निराशा लेकर आया। तीन दिनों तक चले इस मेले में बड़ी संख्या में युवाओं ने पंजीयन कराया था, लेकिन मौके पर पहुंचने वाले अधिकांश अभ्यर्थी बिना नौकरी के लौटते नजर आए। युवाओं का आरोप है कि कंपनियों ने केवल उनके बायोडाटा एकत्र किए और नौकरी देने के बजाय बाद में संपर्क करने का आश्वासन देकर टाल दिया।

यह रोजगार मेला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया था। आयोजन से पहले दावा किया गया था कि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग दिखी। पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन इंटरव्यू के लिए पहुंचे युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही और उनमें से भी बहुत कम को तत्काल नियुक्ति पत्र मिल सके।

मेले में शामिल युवाओं का कहना है कि वे इस उम्मीद से आए थे कि मौके पर इंटरव्यू के बाद नौकरी तय होगी। लेकिन अधिकांश कंपनियों ने केवल शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की जानकारी लेकर यह कह दिया कि चयन प्रक्रिया आगे फोन या ईमेल के माध्यम से पूरी की जाएगी। इससे अभ्यर्थियों में असंतोष देखा गया। कई युवाओं ने सवाल उठाया कि जब उनके दस्तावेज पहले से ही रोजगार कार्यालय में उपलब्ध हैं, तो फिर उन्हें केवल रिज्यूम जमा करने के लिए बुलाने का क्या औचित्य था।

कम वेतन प्रस्ताव भी युवाओं की नाराजगी का बड़ा कारण बना। अनुभवी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें पहले से कम सैलरी की पेशकश की गई। कुछ मामलों में तो वर्तमान वेतन से भी कम राशि ऑफर की गई, जिससे नौकरी स्वीकार करना मुश्किल हो गया। वहीं, कुछ युवाओं को दूसरे राज्यों में पोस्टिंग की शर्त रखी गई, लेकिन वहां के रहन-सहन और यात्रा खर्च के मुकाबले वेतन को अपर्याप्त बताया गया।

महिला अभ्यर्थियों ने भी अपनी परेशानी साझा की। दूर-दराज़ के जिलों से आई युवतियों का कहना था कि लंबा सफर तय कर आने के बावजूद उन्हें केवल प्रतीक्षा का जवाब मिला। कई ने बताया कि उनसे कहा गया कि चयन सूची बाद में जारी होगी, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजीयन कराने वाले युवाओं और वास्तव में मेले में पहुंचे अभ्यर्थियों के बीच बड़ा अंतर सामने आया। बड़ी संख्या में पंजीकृत युवाओं ने मेले में आने में रुचि नहीं दिखाई, जिसका कारण पहले से ही कम वेतन, प्रशिक्षण अवधि और राज्य से बाहर काम करने की शर्तों की जानकारी बताया जा रहा है।

रोजगार विभाग का पक्ष है कि मेले में कुछ युवाओं को जॉब लेटर दिए गए हैं और कई का प्राथमिक स्तर पर चयन हुआ है, जिनसे कंपनियां आगे संपर्क करेंगी। हालांकि, युवाओं का कहना है कि जब तक स्पष्ट नियुक्ति और सम्मानजनक वेतन नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे आयोजनों से उनका भरोसा कमजोर होता रहेगा।

यह मामला रोजगार मेलों की प्रभावशीलता और निजी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब बेरोजगारी युवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

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