फाल्गुन मास की शुक्ल द्वितीया तिथि पर गुरुवार को फुलेरा दूज का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे ज्योतिषीय परंपराओं में अबूझ मुहूर्त माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय उपलब्ध है और धार्मिक गतिविधियों में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखी जा रही है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्ल द्वितीया तिथि शाम 3 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगी। दिन का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक रहेगा, जिसे नए कार्यों के आरंभ के लिए शुभ माना जाता है। वहीं राहुकाल दोपहर 2:00 से 3:25 बजे तक रहेगा, जिसे परंपरागत रूप से सावधानी का समय माना जाता है। पंचांग के अनुसार अमृत काल दोपहर 1:00 से 2:34 बजे तक रहेगा।
सूर्योदय प्रातः 6:56 बजे और सूर्यास्त सायं 6:14 बजे दर्ज किया गया है। चंद्रमा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में स्थित है, जिसे बृहस्पति का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह नक्षत्र व्यक्तित्व में संवेदनशीलता, विचारों की स्पष्टता और आध्यात्मिक झुकाव से जुड़ा माना जाता है। ग्रह स्थिति के अनुसार सूर्य, बुध, शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं, जबकि मंगल मकर राशि में और गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार फुलेरा दूज का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा के पूजन से जुड़ा है। मंदिरों में पुष्प श्रृंगार और भजन-कीर्तन के आयोजन किए जा रहे हैं। कई श्रद्धालु इस दिन को होली उत्सव की आध्यात्मिक शुरुआत मानते हैं। धर्माचार्यों का कहना है कि यह दिन सामाजिक और धार्मिक उत्सवों की निरंतरता का प्रतीक है।
धर्म और संस्कृति के अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पंचांग आधारित समय निर्धारण भारतीय जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है।
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