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आज का पंचांग : जया एकादशी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नक्षत्र
धर्म डेस्क
माघ शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व, सूर्योदय-सूर्यास्त से लेकर शुभ-अशुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी
आज गुरुवार को माघ मास की शुक्ल पक्ष की जया एकादशी मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे मोक्षदायी एकादशियों में प्रमुख माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत, विष्णु पूजन और एकादशी कथा के पाठ से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आज का पंचांग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त के लिहाज से भी विशेष माना जा रहा है।
तिथि और संवत की स्थिति
राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार आज माघ शुक्ल एकादशी तिथि अपराह्न 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। आज का दिन विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 के अंतर्गत आता है। सौर मास माघ का प्रविष्ट दिन 16 है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है।
नक्षत्र, योग और ग्रह स्थिति
आज रोहिणी नक्षत्र प्रातः 7 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र आरंभ होगा। योग की बात करें तो ऐन्द्र योग रात्रि 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा, इसके बाद वैधृति योग बनेगा। करण में विजय करण अपराह्न 1 बजकर 56 मिनट तक और उसके बाद बालव करण प्रभावी रहेगा। चंद्रमा सायं 6 बजकर 31 मिनट तक वृषभ राशि में रहकर बाद में मिथुन राशि में प्रवेश करेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
आज सूर्योदय सुबह 7:10 बजे और सूर्यास्त शाम 5:57 बजे होगा। दिन और रात की अवधि के अनुसार पूजा-पाठ और व्रत के नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
आज के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:10 से 6:02 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:11 से 2:54 बजे तक शुभ है। इसके अलावा गोधूलि बेला शाम 5:46 से 6:13 बजे तक मानी जाएगी, जो दीपदान और संध्या पूजन के लिए अनुकूल है।
अशुभ समय और सावधानी
आज राहुकाल दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक रहेगा। यमगंड सुबह 6:00 से 7:30 बजे और गुलिक काल सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक महत्व
जया एकादशी के दिन व्रती को अन्न त्याग कर फलाहार करना चाहिए और श्रीहरि विष्णु की पूजा, तुलसी अर्चन और विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करना चाहिए। माना जाता है कि यह व्रत जीवन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
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