सत्यकथा: भाई-बहन और पति-पत्नी के गिरोह ने किया दो मासूम का अपहरण

इंदौर

By Rohit.P
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23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना इलाके में बसे लालाराम नगर में सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। लेकिन 9 बजते-बजते इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के दो मासूम बच्चों के अपहरण की खबर से पूरे इलाके में हलचल सी मच गई।

लालाराम नगर में अधिकांश निम्न मध्यवर्गीय परिवार रहते है। इसलिए ऐसे दो परिवारों के मासूम बेटों के अपहरण की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी।

दरअसल हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरूपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। यह इनका रोज का काम था मगर जब उस रोज अंधेरा घिरने तक दोनों अपने घर वापस नहीं आए तो दूसरे बच्चों ने बताया कि उनको एक लड़की तोता, खरगोश दिखाने अपने साथ ले गई थी।

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खबर पाकर पलासिया पुलिस मौके पर पहुंची तो इलाके के एक सीसीटीवी कैमरे में दोनों बच्चे एक युवती के साथ जाते दिखे। यह देखकर पुलिस क साथ-साथ मोहल्ले वाले भी बच्चों की खोज में जुट गए। लेकिन इससे पहले की उनका कुछ पता चल पाता रात लगभग 11 बजे इनमें एक बच्चे की मां पर आए वीडियो काल के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया। फोन पर बच्चों को छोड़ने के लिए 15 लाख की फिरौती की मांग की गई थी।

जिन दो किशोरों का अपहरण हुआ था उनमें एक के पिता गन्ने के रस का ठेला लगाते है तो दूसरे के पिता रामायण मंडली में ढोलक बजाने का काम करते हैं। ऐसे में इन परिवारों के लिए इतने पैसों का इंतजाम करना आसान नहीं था। इसलिए अपहृत की मां बदमाशों के सामने बार-बार हाथ पैर जोड़ रही थी।

लेकिन ऐसे में लालाराम नगर में रहने वाले सभी गरीब परिवार एक जुट हो गए और जिसके पास जो कुछ था सब लाकर पीड़ित परिवार को सौंप दिया जिससे कुछ ही देर में साढे सात लाख रुपए जमा हो गए। इसलिए परिवार ने बदमाशों से अनुरोध किया कि वे इतना पैसा लेकर उनके बच्चों को छोड़ दे। इससे अधिक पैसा वो नहीं दे पाएंगे। लेकिन बदमाश 15 लाख से कम पर राजी नहीं हो रहे थे।

इधर यह सब चल रहा था तो दूसरी तरफ एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पलासिया, संयोगिता गंज, बड़ी ग्वालटोली, राजेन्द्र नगर, द्वारकापुरी, तुकोगंज आदि थानों की टीम अपने काम में लग चुकीं थी।

दरअसल फिरौती के लिए जिस नंबर से फोन आया था उसकी लोकशन राजेन्द्र नगर की मिल रही थी। इसलिए पुलिस का पूरा जोर राजेन्द्र नगर पर था। इसके अलावा अपहरण के स्थान से राजेन्द्र नगर तक जाने वाले रास्तों में पढ़ने वाला थाना इलाकों में भी पुलिस सर्तक थी।

साइबर टीम लगातार काम कर रही थी। जिसके चलते पता चला कि जिस नंबर से आरोपी पीड़ित परिवार से वाट्सएप चैटिंग के जरिए बात कर रहे है वह राजेन्द्र नगर थाना इलाके के दत्तनगर में एक्टिव है। इससे बड़ी संख्या में पुलिस दत्तनगर में चारों तरफ फैलकर एक-एक मकान पर नजर रखने लगी। इस दौरान एक मकान की लाइट आधी रात में बार-बार जलने और बंद होने से पुलिस ने शक के आधार पर वहां दबिश दी तो दोनों अपहृत बच्चों के साथ 19 साल की राधा नाम की युवती को गिरफ्तार कर लिया। जिसने पूछताछ में अपने तीन साथी, सगे भाई विनीत तथा अपनी सहेली तनीषा और उसके पति ललित के नाम भी बता दिए जो इस वारदात में शामिल थे जिससे पुलिस ने उसी समय छापामारी कर इस तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।

इधर मोहल्ले वालों को जब पता चला कि महज 5 घंटे में ही पुलिस ने दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया है तो लालाराम नगर में उत्सव मनाया जाने लगा। जिसके बाद जल्द ही पुलिस ने दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया।

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बच्चों ने बताया कि कुछ दिनों ने खेल के मैदान में आने वाली दीदी उन्हें तोता, खरगोश और कुत्तों के बच्चे देने का बोलकर अपने साथ ले गई थीं। वे उन्हें कुछ दूर तक पैदल फिर कार में बैठाकर ले गई थी। घर ले जाकर उन्होंने उनको खाने-पीने के लिए भी दिया। इसी बीच एक बच्चे से उसकी मां का फोन नंबर लिया था।

बच्चों ने यह भी बताया कि जब पुलिस आई तो दीदी ने कहा था कि बदमाश आ गए हैं। तुम लोग छुप जाओ और शोर मत करना जिससे हम लोग गैलरी में चादर ओढ़कर छुप गए थे।

दूसरी तरफ आरोपियों से पूछताछ में पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई। विनीत और राधा दोनों आपस में भाई-बहन हैं। विनीत एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था जो फर्जी निकली और उसका 6 माह का वेतन दिए बिना ही बंद हो गई। जबकि राधा टेलीकालिंग का काम करती थी।

ललित ड्राइवर था लेकिन 6 माह से वह भी बेरोजगार था। उसकी पत्नी पहले फ्लिपकार्ट में नौकरी करती थी लेकिन आजकल एक दुकान में सेल्सगर्ल का का कर रही थी जो ठीक नहीं चल रहा था। तनीषा, राधा की सहेली थी इसलिए दोनों ने मिलकर अपनी गरीबी दूर करने का उपाय सोचना शुरू कर दिया। कम समय में ज्यादा पैसा सीधे रास्ते तो आ नहीं सकता था इसलिए पहले उन्होंने किसी ज्वैलर्स के शोरूम को लूटने की योजना बनाई जिसमें विनीत और ललित भी साथ देने राजी हो गए। लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी तो बच्चों के अपहरण की योजना बनाई गई।

राधा को मालूम था तिरूपति ग्राउंड में रईस परिवारों के बच्चे खेलने आते हैं। इसलिए योजना बनाकर दो दिन तक तनिषा ने वहां रेकी की और बच्चों को मोबाइल पर जानवरों के वीडियो दिखाकर उनसे दोस्ती करने के बाद 11 अप्रैल को उनमें से दो बच्चों को अपने साथ ले गई।

लेकिन यहां बच्चों की पहचान करने में उससे गलती हुई जिससे किसी रईस परिवार के बच्चों को ले जाने के बजाए उसने दो मजदूर परिवार के बच्चों को अपहरण कर लिया। लेकिन पुलिस ने 5 घंटे में ही दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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सामने आया इंदौर का मानवीय चेहरा

जिन दो बच्चों को अपहरण किया गया था वे मजदूर परिवार से थे। उनके पिता 15 लाख की फिरौती नहीं दे सकते थे। यह जानकर बस्ती के सभी लोग मदद के लिए आगे आए और कुछ ही घंटों में साढे सात लाख रुपया जमा कर पीड़ित परिवारों को सौंप दिया ताकि उनके बच्चे सुरक्षित वापस आ जाए। लेकिन इसी बीच इंदौर पुलिस ने भी अपनी तत्परता दिखाई और पांच घंटे में ही बच्चों को सुरक्षित बरामद कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि अपहरण से पहले उन्होंने किसी ज्वैलरी शो-रूम को लूटने की योजना बनाई थी लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

शार्ट एनकाउंटर के थे आदेश

आरोपी फिरौती की रकम लेने के लिए रेत घाट आने की बात कर रहे थे। पहले पुलिस की योजना फिरौती लेने आने के समय बदमाशों को दबोचने की थी इसके लिए शार्ट एनकाउंटर की तैयारी भी कर ली गई थी।

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09 May 2026 By Rohit.P

सत्यकथा: भाई-बहन और पति-पत्नी के गिरोह ने किया दो मासूम का अपहरण

इंदौर

23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना इलाके में बसे लालाराम नगर में सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। लेकिन 9 बजते-बजते इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के दो मासूम बच्चों के अपहरण की खबर से पूरे इलाके में हलचल सी मच गई।

लालाराम नगर में अधिकांश निम्न मध्यवर्गीय परिवार रहते है। इसलिए ऐसे दो परिवारों के मासूम बेटों के अपहरण की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी।

दरअसल हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरूपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। यह इनका रोज का काम था मगर जब उस रोज अंधेरा घिरने तक दोनों अपने घर वापस नहीं आए तो दूसरे बच्चों ने बताया कि उनको एक लड़की तोता, खरगोश दिखाने अपने साथ ले गई थी।

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खबर पाकर पलासिया पुलिस मौके पर पहुंची तो इलाके के एक सीसीटीवी कैमरे में दोनों बच्चे एक युवती के साथ जाते दिखे। यह देखकर पुलिस क साथ-साथ मोहल्ले वाले भी बच्चों की खोज में जुट गए। लेकिन इससे पहले की उनका कुछ पता चल पाता रात लगभग 11 बजे इनमें एक बच्चे की मां पर आए वीडियो काल के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया। फोन पर बच्चों को छोड़ने के लिए 15 लाख की फिरौती की मांग की गई थी।

जिन दो किशोरों का अपहरण हुआ था उनमें एक के पिता गन्ने के रस का ठेला लगाते है तो दूसरे के पिता रामायण मंडली में ढोलक बजाने का काम करते हैं। ऐसे में इन परिवारों के लिए इतने पैसों का इंतजाम करना आसान नहीं था। इसलिए अपहृत की मां बदमाशों के सामने बार-बार हाथ पैर जोड़ रही थी।

लेकिन ऐसे में लालाराम नगर में रहने वाले सभी गरीब परिवार एक जुट हो गए और जिसके पास जो कुछ था सब लाकर पीड़ित परिवार को सौंप दिया जिससे कुछ ही देर में साढे सात लाख रुपए जमा हो गए। इसलिए परिवार ने बदमाशों से अनुरोध किया कि वे इतना पैसा लेकर उनके बच्चों को छोड़ दे। इससे अधिक पैसा वो नहीं दे पाएंगे। लेकिन बदमाश 15 लाख से कम पर राजी नहीं हो रहे थे।

इधर यह सब चल रहा था तो दूसरी तरफ एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पलासिया, संयोगिता गंज, बड़ी ग्वालटोली, राजेन्द्र नगर, द्वारकापुरी, तुकोगंज आदि थानों की टीम अपने काम में लग चुकीं थी।

दरअसल फिरौती के लिए जिस नंबर से फोन आया था उसकी लोकशन राजेन्द्र नगर की मिल रही थी। इसलिए पुलिस का पूरा जोर राजेन्द्र नगर पर था। इसके अलावा अपहरण के स्थान से राजेन्द्र नगर तक जाने वाले रास्तों में पढ़ने वाला थाना इलाकों में भी पुलिस सर्तक थी।

साइबर टीम लगातार काम कर रही थी। जिसके चलते पता चला कि जिस नंबर से आरोपी पीड़ित परिवार से वाट्सएप चैटिंग के जरिए बात कर रहे है वह राजेन्द्र नगर थाना इलाके के दत्तनगर में एक्टिव है। इससे बड़ी संख्या में पुलिस दत्तनगर में चारों तरफ फैलकर एक-एक मकान पर नजर रखने लगी। इस दौरान एक मकान की लाइट आधी रात में बार-बार जलने और बंद होने से पुलिस ने शक के आधार पर वहां दबिश दी तो दोनों अपहृत बच्चों के साथ 19 साल की राधा नाम की युवती को गिरफ्तार कर लिया। जिसने पूछताछ में अपने तीन साथी, सगे भाई विनीत तथा अपनी सहेली तनीषा और उसके पति ललित के नाम भी बता दिए जो इस वारदात में शामिल थे जिससे पुलिस ने उसी समय छापामारी कर इस तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।

इधर मोहल्ले वालों को जब पता चला कि महज 5 घंटे में ही पुलिस ने दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया है तो लालाराम नगर में उत्सव मनाया जाने लगा। जिसके बाद जल्द ही पुलिस ने दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया।

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बच्चों ने बताया कि कुछ दिनों ने खेल के मैदान में आने वाली दीदी उन्हें तोता, खरगोश और कुत्तों के बच्चे देने का बोलकर अपने साथ ले गई थीं। वे उन्हें कुछ दूर तक पैदल फिर कार में बैठाकर ले गई थी। घर ले जाकर उन्होंने उनको खाने-पीने के लिए भी दिया। इसी बीच एक बच्चे से उसकी मां का फोन नंबर लिया था।

बच्चों ने यह भी बताया कि जब पुलिस आई तो दीदी ने कहा था कि बदमाश आ गए हैं। तुम लोग छुप जाओ और शोर मत करना जिससे हम लोग गैलरी में चादर ओढ़कर छुप गए थे।

दूसरी तरफ आरोपियों से पूछताछ में पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई। विनीत और राधा दोनों आपस में भाई-बहन हैं। विनीत एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था जो फर्जी निकली और उसका 6 माह का वेतन दिए बिना ही बंद हो गई। जबकि राधा टेलीकालिंग का काम करती थी।

ललित ड्राइवर था लेकिन 6 माह से वह भी बेरोजगार था। उसकी पत्नी पहले फ्लिपकार्ट में नौकरी करती थी लेकिन आजकल एक दुकान में सेल्सगर्ल का का कर रही थी जो ठीक नहीं चल रहा था। तनीषा, राधा की सहेली थी इसलिए दोनों ने मिलकर अपनी गरीबी दूर करने का उपाय सोचना शुरू कर दिया। कम समय में ज्यादा पैसा सीधे रास्ते तो आ नहीं सकता था इसलिए पहले उन्होंने किसी ज्वैलर्स के शोरूम को लूटने की योजना बनाई जिसमें विनीत और ललित भी साथ देने राजी हो गए। लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी तो बच्चों के अपहरण की योजना बनाई गई।

राधा को मालूम था तिरूपति ग्राउंड में रईस परिवारों के बच्चे खेलने आते हैं। इसलिए योजना बनाकर दो दिन तक तनिषा ने वहां रेकी की और बच्चों को मोबाइल पर जानवरों के वीडियो दिखाकर उनसे दोस्ती करने के बाद 11 अप्रैल को उनमें से दो बच्चों को अपने साथ ले गई।

लेकिन यहां बच्चों की पहचान करने में उससे गलती हुई जिससे किसी रईस परिवार के बच्चों को ले जाने के बजाए उसने दो मजदूर परिवार के बच्चों को अपहरण कर लिया। लेकिन पुलिस ने 5 घंटे में ही दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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सामने आया इंदौर का मानवीय चेहरा

जिन दो बच्चों को अपहरण किया गया था वे मजदूर परिवार से थे। उनके पिता 15 लाख की फिरौती नहीं दे सकते थे। यह जानकर बस्ती के सभी लोग मदद के लिए आगे आए और कुछ ही घंटों में साढे सात लाख रुपया जमा कर पीड़ित परिवारों को सौंप दिया ताकि उनके बच्चे सुरक्षित वापस आ जाए। लेकिन इसी बीच इंदौर पुलिस ने भी अपनी तत्परता दिखाई और पांच घंटे में ही बच्चों को सुरक्षित बरामद कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि अपहरण से पहले उन्होंने किसी ज्वैलरी शो-रूम को लूटने की योजना बनाई थी लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

शार्ट एनकाउंटर के थे आदेश

आरोपी फिरौती की रकम लेने के लिए रेत घाट आने की बात कर रहे थे। पहले पुलिस की योजना फिरौती लेने आने के समय बदमाशों को दबोचने की थी इसके लिए शार्ट एनकाउंटर की तैयारी भी कर ली गई थी।

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