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एशिथ-अमृथा की वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्डन-प्वाइंट थ्रिलर में हार
Digital Desk
BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 में एशिथ-अमृथा को तुर्की की जोड़ी ने 21-16, 29-30, 22-24 से हराया। भारतीय जोड़ी सात मैच प्वाइंट चूक गई।
BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 में एशिथ सूर्य और अमृथा प्रमुथेश को तुर्की की एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास के खिलाफ 21-16, 29-30, 22-24 से हार मिली। भारतीय जोड़ी सात मैच प्वाइंट का फायदा नहीं उठा सकी।
भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी एशिथ सूर्य और अमृथा प्रमुथेश का BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 में पदार्पण बेहद करीबी मुकाबले के बाद समाप्त हो गया। नई दिल्ली में खेले गए मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने तुर्की की एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास को कड़ी चुनौती दी, लेकिन 21-16, 29-30, 22-24 से हार गई।
एशिथ और अमृथा ने पहला गेम जीतकर मुकाबले में मजबूत शुरुआत की। दूसरे गेम में उनके पास छह मैच प्वाइंट थे, जबकि निर्णायक गेम में भी उन्हें एक मैच प्वाइंट मिला। हालांकि, वे इन सात मौकों को जीत में नहीं बदल सके।
घरेलू दर्शकों के सामने एशिथ और अमृथा ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। दोनों ने कोर्ट पर अच्छी तालमेल के साथ तुर्की की जोड़ी को लगातार दबाव में रखा।
भारतीय खिलाड़ियों ने रैलियों पर नियंत्रण बनाए रखा और पहले गेम में महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया।
एक गेम की बढ़त के बाद भारतीय जोड़ी विश्व चैंपियनशिप पदार्पण में जीत से केवल एक गेम दूर थी।
छह मैच प्वाइंट हुए बेकार
दूसरा गेम मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। एशिथ और अमृथा ने कई बार मैच खत्म करने की स्थिति बनाई, लेकिन छह मैच प्वाइंट होने के बावजूद वे जीत दर्ज नहीं कर सके।
स्कोर 29-29 तक पहुंच गया और इसके बाद अगला अंक निर्णायक बन गया। तुर्की की जोड़ी ने दबाव के बीच रैली अपने नाम की और 30-29 से गेम जीतकर मुकाबला बराबर कर दिया।
इस नतीजे ने मैच की दिशा बदल दी और मुकाबला निर्णायक तीसरे गेम में पहुंच गया।
निर्णायक गेम में भी मौका
तीसरे गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। भारतीय खिलाड़ी दूसरे गेम की निराशा के बावजूद लगातार संघर्ष करते रहे।
एशिथ और अमृथा ने निर्णायक गेम में भी एक मैच प्वाइंट हासिल किया, लेकिन इस बार भी वे मुकाबला खत्म नहीं कर सके।
सोनमेज और बेक्टास ने अंतिम अंकों में संयम बनाए रखा और 24-22 से तीसरा गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
आंकड़ों ने बताया अंतर
यह मुकाबला कितना करीबी था, इसका अंदाजा स्कोर से भी लगाया जा सकता है। भारतीय जोड़ी ने पूरे मैच में कथित तौर पर 72 अंक हासिल किए, जबकि तुर्की की जोड़ी के खाते में 70 अंक रहे।
इसके बावजूद जीत तुर्की के हिस्से में गई। सात मैच प्वाइंट का फायदा नहीं उठा पाना भारतीय जोड़ी के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ।
महत्वपूर्ण मौकों पर हुई गलतियों ने मुकाबले का परिणाम तय किया। एशिथ ने भी मैच के बाद माना कि निर्णायक रैलियों में गलतियां भारी पड़ीं।
दर्शकों ने बढ़ाया हौसला
नई दिल्ली में मौजूद भारतीय दर्शकों ने पूरे मुकाबले के दौरान एशिथ और अमृथा का समर्थन किया। लंबे दूसरे और तीसरे गेम में माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा।
भारतीय खिलाड़ियों के अनुसार, घरेलू दर्शकों का समर्थन दबाव बढ़ाने के बजाय उन्हें प्रेरित कर रहा था। उन्होंने आखिरी अंक तक मुकाबला जीतने की कोशिश जारी रखी।
हार के बावजूद भारतीय जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अपनी क्षमता दिखाई।
अचानक मिला विश्व कप मौका
एशिथ और अमृथा की विश्व चैंपियनशिप यात्रा भी असामान्य रही। दोनों खिलाड़ी कर्नाटक स्टेट सीनियर चैंपियनशिप में धारवाड़ में खेल रहे थे, तभी उन्हें विश्व चैंपियनशिप में रिजर्व के तौर पर प्रवेश का मौका मिला।
कुछ खिलाड़ियों के हटने के बाद उन्हें देर से टूर्नामेंट में शामिल होने की जानकारी मिली। इसके बाद दोनों ने करीब 1,800 किलोमीटर की यात्रा कर नई दिल्ली पहुंचकर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
इस जोड़ी ने इससे पहले 2024 में श्रीलंका इंटरनेशनल चैलेंज में मिश्रित युगल खिताब भी जीता था।
अनुभव से मिलेगी सीख
विश्व चैंपियनशिप में अभियान समाप्त होने के बावजूद एशिथ और अमृथा के लिए यह मुकाबला महत्वपूर्ण अनुभव लेकर आया है। उन्होंने पहला गेम जीता, सात मैच प्वाइंट हासिल किए और एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय जोड़ी को निर्णायक अंकों तक चुनौती दी।
अब भारतीय जोड़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती महत्वपूर्ण मौकों पर धैर्य और नियंत्रण बेहतर करने की होगी।
एशिथ-अमृथा की BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 यात्रा भले ही हार के साथ समाप्त हुई, लेकिन उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वे शीर्ष स्तर के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
एशिथ-अमृथा की वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्डन-प्वाइंट थ्रिलर में हार
Digital Desk
BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 में एशिथ सूर्य और अमृथा प्रमुथेश को तुर्की की एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास के खिलाफ 21-16, 29-30, 22-24 से हार मिली। भारतीय जोड़ी सात मैच प्वाइंट का फायदा नहीं उठा सकी।
भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी एशिथ सूर्य और अमृथा प्रमुथेश का BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 में पदार्पण बेहद करीबी मुकाबले के बाद समाप्त हो गया। नई दिल्ली में खेले गए मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने तुर्की की एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास को कड़ी चुनौती दी, लेकिन 21-16, 29-30, 22-24 से हार गई।
एशिथ और अमृथा ने पहला गेम जीतकर मुकाबले में मजबूत शुरुआत की। दूसरे गेम में उनके पास छह मैच प्वाइंट थे, जबकि निर्णायक गेम में भी उन्हें एक मैच प्वाइंट मिला। हालांकि, वे इन सात मौकों को जीत में नहीं बदल सके।
घरेलू दर्शकों के सामने एशिथ और अमृथा ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। दोनों ने कोर्ट पर अच्छी तालमेल के साथ तुर्की की जोड़ी को लगातार दबाव में रखा।
भारतीय खिलाड़ियों ने रैलियों पर नियंत्रण बनाए रखा और पहले गेम में महत्वपूर्ण अंकों पर बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने पहला गेम 21-16 से अपने नाम कर लिया।
एक गेम की बढ़त के बाद भारतीय जोड़ी विश्व चैंपियनशिप पदार्पण में जीत से केवल एक गेम दूर थी।
छह मैच प्वाइंट हुए बेकार
दूसरा गेम मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। एशिथ और अमृथा ने कई बार मैच खत्म करने की स्थिति बनाई, लेकिन छह मैच प्वाइंट होने के बावजूद वे जीत दर्ज नहीं कर सके।
स्कोर 29-29 तक पहुंच गया और इसके बाद अगला अंक निर्णायक बन गया। तुर्की की जोड़ी ने दबाव के बीच रैली अपने नाम की और 30-29 से गेम जीतकर मुकाबला बराबर कर दिया।
इस नतीजे ने मैच की दिशा बदल दी और मुकाबला निर्णायक तीसरे गेम में पहुंच गया।
निर्णायक गेम में भी मौका
तीसरे गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। भारतीय खिलाड़ी दूसरे गेम की निराशा के बावजूद लगातार संघर्ष करते रहे।
एशिथ और अमृथा ने निर्णायक गेम में भी एक मैच प्वाइंट हासिल किया, लेकिन इस बार भी वे मुकाबला खत्म नहीं कर सके।
सोनमेज और बेक्टास ने अंतिम अंकों में संयम बनाए रखा और 24-22 से तीसरा गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
आंकड़ों ने बताया अंतर
यह मुकाबला कितना करीबी था, इसका अंदाजा स्कोर से भी लगाया जा सकता है। भारतीय जोड़ी ने पूरे मैच में कथित तौर पर 72 अंक हासिल किए, जबकि तुर्की की जोड़ी के खाते में 70 अंक रहे।
इसके बावजूद जीत तुर्की के हिस्से में गई। सात मैच प्वाइंट का फायदा नहीं उठा पाना भारतीय जोड़ी के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ।
महत्वपूर्ण मौकों पर हुई गलतियों ने मुकाबले का परिणाम तय किया। एशिथ ने भी मैच के बाद माना कि निर्णायक रैलियों में गलतियां भारी पड़ीं।
दर्शकों ने बढ़ाया हौसला
नई दिल्ली में मौजूद भारतीय दर्शकों ने पूरे मुकाबले के दौरान एशिथ और अमृथा का समर्थन किया। लंबे दूसरे और तीसरे गेम में माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा।
भारतीय खिलाड़ियों के अनुसार, घरेलू दर्शकों का समर्थन दबाव बढ़ाने के बजाय उन्हें प्रेरित कर रहा था। उन्होंने आखिरी अंक तक मुकाबला जीतने की कोशिश जारी रखी।
हार के बावजूद भारतीय जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अपनी क्षमता दिखाई।
अचानक मिला विश्व कप मौका
एशिथ और अमृथा की विश्व चैंपियनशिप यात्रा भी असामान्य रही। दोनों खिलाड़ी कर्नाटक स्टेट सीनियर चैंपियनशिप में धारवाड़ में खेल रहे थे, तभी उन्हें विश्व चैंपियनशिप में रिजर्व के तौर पर प्रवेश का मौका मिला।
कुछ खिलाड़ियों के हटने के बाद उन्हें देर से टूर्नामेंट में शामिल होने की जानकारी मिली। इसके बाद दोनों ने करीब 1,800 किलोमीटर की यात्रा कर नई दिल्ली पहुंचकर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
इस जोड़ी ने इससे पहले 2024 में श्रीलंका इंटरनेशनल चैलेंज में मिश्रित युगल खिताब भी जीता था।
अनुभव से मिलेगी सीख
विश्व चैंपियनशिप में अभियान समाप्त होने के बावजूद एशिथ और अमृथा के लिए यह मुकाबला महत्वपूर्ण अनुभव लेकर आया है। उन्होंने पहला गेम जीता, सात मैच प्वाइंट हासिल किए और एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय जोड़ी को निर्णायक अंकों तक चुनौती दी।
अब भारतीय जोड़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती महत्वपूर्ण मौकों पर धैर्य और नियंत्रण बेहतर करने की होगी।
एशिथ-अमृथा की BWF विश्व चैंपियनशिप 2026 यात्रा भले ही हार के साथ समाप्त हुई, लेकिन उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वे शीर्ष स्तर के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
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