भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के महीनों में बढ़े राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव का असर अब क्रिकेट और उससे जुड़े व्यावसायिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक प्रमुख भारतीय क्रिकेट इक्विपमेंट निर्माता कंपनी ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों के साथ किए गए अपने स्पॉन्सरशिप करारों की समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी मौजूदा हालात को देखते हुए इन समझौतों को आगे जारी रखने या समाप्त करने पर विचार कर रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी बनी हुई है। हाल के दिनों में कूटनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को लेकर मतभेद उभरे हैं, जिनका असर खेल सहयोग पर भी पड़ा है। इसी बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के बीच संवाद भी सहज नहीं माना जा रहा।
क्रिकेट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारतीय कंपनी ने यह कदम किसी तात्कालिक दबाव में नहीं, बल्कि व्यावसायिक जोखिम और ब्रांड छवि को ध्यान में रखते हुए उठाया है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मौजूदा माहौल में अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू ग्राहकों की प्रतिक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में सभी अंतरराष्ट्रीय स्पॉन्सरशिप समझौतों की आंतरिक समीक्षा की जा रही है, जिसमें बांग्लादेशी खिलाड़ियों के करार भी शामिल हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंध लंबे समय से प्रतिस्पर्धी रहे हैं, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा और आयोजन से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आगामी आईसीसी आयोजनों को लेकर कुछ आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने अब तक अपने तय कार्यक्रम में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
वहीं, खेल विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्पॉन्सरशिप वापस ली जाती है, तो इसका सीधा असर बांग्लादेशी खिलाड़ियों की व्यक्तिगत ब्रांड वैल्यू और घरेलू क्रिकेट अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारतीय कंपनियां लंबे समय से बांग्लादेशी खिलाड़ियों के लिए प्रमुख प्रायोजक रही हैं और यह सहयोग दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है।
फिलहाल संबंधित भारतीय कंपनी की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि अंतिम फैसला सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा। उधर, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
आज की ताज़ा ख़बरों में यह मामला भारत-बांग्लादेश संबंधों से जुड़ी एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां खेल, कूटनीति और व्यापार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह समीक्षा सिर्फ एहतियाती कदम है या फिर दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में किसी बड़े बदलाव का संकेत।
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