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WTC फाइनल में पहुंच सकता है भारत? 9 जीत से 74% होगा PCT
स्पोर्ट्स डेस्क
48.15% पॉइंट्स के साथ टीम इंडिया पांचवें स्थान पर, श्रीलंका के खिलाफ दोनों टेस्ट जीतना जरूरी; बाकी 7 मुकाबले भी बेहद अहम
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में टीम इंडिया के लिए अब हर टेस्ट काफी अहम हो गया है। भारत ने मौजूदा चक्र में 9 मुकाबले खेल लिए हैं और 4 जीत, 4 हार व एक ड्रॉ के साथ 48.15 प्रतिशत पॉइंट्स पर है। टीम फिलहाल टॉप-2 की रेस से बाहर है और अब उसके पास सिर्फ 9 टेस्ट बाकी हैं। इन मैचों की शुरुआत 15 अगस्त से श्रीलंका दौरे पर होने वाली दो टेस्ट की सीरीज से होगी। इसके बाद भारत न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलेगा और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की घरेलू सीरीज होगी। ICC के मुताबिक भारत ने अपने आधे मुकाबले पूरे कर लिए हैं और मौजूदा स्थिति में फाइनल की राह आसान नहीं है।
भारत के खाते में अभी 52 अंक हैं और बाकी 9 टेस्ट में अधिकतम 108 अंक हासिल किए जा सकते हैं। अगर टीम बचे हुए सभी 9 मैच जीत जाती है तो उसका कुल स्कोर 160 अंक होगा और पॉइंट्स प्रतिशत 74.07 तक पहुंच जाएगा। यानी कागज पर भारत के लिए सबसे मजबूत स्थिति यही होगी। हालांकि सिर्फ 100 फीसदी जीत हासिल कर लेना भी फाइनल की लिखित गारंटी नहीं है, क्योंकि WTC में शीर्ष दो टीमों का फैसला पॉइंट्स प्रतिशत के आधार पर होता है और दूसरी टीमों के नतीजे भी समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमें भारत से ऊपर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को कितने मैच जीतने होंगे। मौजूदा समीकरण में सात जीत, एक ड्रॉ और एक हार की स्थिति में भारत का PCT करीब 64.81 प्रतिशत होगा। छह जीत, दो ड्रॉ और एक हार पर यह आंकड़ा 61.11 प्रतिशत रहेगा। वहीं छह जीत और तीन हार की स्थिति में PCT करीब 59.26 प्रतिशत तक रह जाएगा। ऐसे में भारत के लिए बचे हुए 9 टेस्ट में कम से कम 6-7 जीत का लक्ष्य रखना जरूरी माना जा रहा है, लेकिन अंतिम क्वालिफिकेशन दूसरी टीमों के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी। क्रिकेट विश्लेषण में भी सात जीत को भारत के लिए मजबूत स्थिति बनाने वाला आंकड़ा बताया जा रहा है।
श्रीलंका के खिलाफ होने वाली सीरीज इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के बचे हुए नौ मैचों में पहला पड़ाव है। दोनों टेस्ट श्रीलंका में खेले जाएंगे, जहां परिस्थितियां भारत के लिए घरेलू मैदान जैसी नहीं होंगी। इस सीरीज में 2-0 की जीत भारत को सीधे मजबूत स्थिति में ले जाएगी और आगे न्यूजीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दबाव कुछ कम होगा। वहीं अगर सीरीज 1-1 से बराबर रहती है तो भारत को बाकी सात मैचों में और ज्यादा जीत हासिल करनी पड़ सकती हैं। दो टेस्ट की सीरीज गंवाना स्थिति को और मुश्किल बना देगा, क्योंकि तब वापसी के लिए बाकी सात मुकाबलों में लगभग बेदाग प्रदर्शन की जरूरत होगी। भारत-श्रीलंका सीरीज को लेकर यही वजह है कि इसे WTC की रेस में टीम इंडिया के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है।
श्रीलंका के बाद भारत को न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने हैं। विदेशी परिस्थितियों में यह सीरीज आसान नहीं होगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में खेलने का अनुभव भारत के लिए हाल के वर्षों में बहुत अच्छा नहीं रहा है और वहां की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के लिए भी मददगार हो सकती हैं। अगर भारत श्रीलंका के बाद न्यूजीलैंड में भी अच्छा प्रदर्शन करता है तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की घरेलू सीरीज से पहले उसके पास पॉइंट्स प्रतिशत को काफी ऊपर ले जाने का मौका रहेगा। लेकिन यहां एक भी सीरीज खराब जाने पर समीकरण फिर दबाव में आ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज भारत के WTC अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा होगी। यह सीरीज घरेलू मैदान पर खेली जानी है और पांच मुकाबलों में कुल 60 अंक दांव पर होंगे। अगर भारत यहां 4-1 या 5-0 जैसा प्रदर्शन करता है तो उसकी स्थिति काफी मजबूत हो सकती है। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार हार से फाइनल की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है। यही वजह है कि भारत के लिए सिर्फ श्रीलंका को हराना पर्याप्त नहीं होगा। उसे पूरे बचे हुए कार्यक्रम में जीत का प्रतिशत काफी ऊंचा रखना पड़ेगा।
WTC में जीत पर 12 अंक, ड्रॉ पर 4 अंक और हार पर कोई अंक नहीं मिलता। इसी वजह से एक टेस्ट का नतीजा भी पॉइंट्स प्रतिशत पर असर डालता है। भारत ने मौजूदा चक्र की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ 2-2 से सीरीज ड्रॉ करके की थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में 0-2 की हार ने उसकी स्थिति बिगाड़ दी। नौ मैचों के बाद 48.15 PCT पर पहुंचने के पीछे यही परिणाम बड़ी वजह रहे। अब टीम के पास गलती की गुंजाइश पहले से काफी कम है।
श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा और इसी मुकाबले से भारत के लिए WTC की अगली बड़ी दौड़ शुरू होगी। दो टेस्ट की इस सीरीज में हर जीत सीधे भारत के खाते में 12 अंक जोड़ेगी, जबकि हार से दूसरी तरफ जाने वाले अंक के साथ PCT पर भी असर पड़ेगा। टीम मैनेजमेंट के सामने अब प्लेइंग-11 से लेकर गेंदबाजी संयोजन तक कई फैसले हैं, क्योंकि आगे के नौ मुकाबले ही तय करेंगे कि भारत 2027 के फाइनल की रेस में कितनी मजबूती से बना रहता है।
WTC फाइनल में पहुंच सकता है भारत? 9 जीत से 74% होगा PCT
स्पोर्ट्स डेस्क
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में टीम इंडिया के लिए अब हर टेस्ट काफी अहम हो गया है। भारत ने मौजूदा चक्र में 9 मुकाबले खेल लिए हैं और 4 जीत, 4 हार व एक ड्रॉ के साथ 48.15 प्रतिशत पॉइंट्स पर है। टीम फिलहाल टॉप-2 की रेस से बाहर है और अब उसके पास सिर्फ 9 टेस्ट बाकी हैं। इन मैचों की शुरुआत 15 अगस्त से श्रीलंका दौरे पर होने वाली दो टेस्ट की सीरीज से होगी। इसके बाद भारत न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलेगा और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की घरेलू सीरीज होगी। ICC के मुताबिक भारत ने अपने आधे मुकाबले पूरे कर लिए हैं और मौजूदा स्थिति में फाइनल की राह आसान नहीं है।
भारत के खाते में अभी 52 अंक हैं और बाकी 9 टेस्ट में अधिकतम 108 अंक हासिल किए जा सकते हैं। अगर टीम बचे हुए सभी 9 मैच जीत जाती है तो उसका कुल स्कोर 160 अंक होगा और पॉइंट्स प्रतिशत 74.07 तक पहुंच जाएगा। यानी कागज पर भारत के लिए सबसे मजबूत स्थिति यही होगी। हालांकि सिर्फ 100 फीसदी जीत हासिल कर लेना भी फाइनल की लिखित गारंटी नहीं है, क्योंकि WTC में शीर्ष दो टीमों का फैसला पॉइंट्स प्रतिशत के आधार पर होता है और दूसरी टीमों के नतीजे भी समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमें भारत से ऊपर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को कितने मैच जीतने होंगे। मौजूदा समीकरण में सात जीत, एक ड्रॉ और एक हार की स्थिति में भारत का PCT करीब 64.81 प्रतिशत होगा। छह जीत, दो ड्रॉ और एक हार पर यह आंकड़ा 61.11 प्रतिशत रहेगा। वहीं छह जीत और तीन हार की स्थिति में PCT करीब 59.26 प्रतिशत तक रह जाएगा। ऐसे में भारत के लिए बचे हुए 9 टेस्ट में कम से कम 6-7 जीत का लक्ष्य रखना जरूरी माना जा रहा है, लेकिन अंतिम क्वालिफिकेशन दूसरी टीमों के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी। क्रिकेट विश्लेषण में भी सात जीत को भारत के लिए मजबूत स्थिति बनाने वाला आंकड़ा बताया जा रहा है।
श्रीलंका के खिलाफ होने वाली सीरीज इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के बचे हुए नौ मैचों में पहला पड़ाव है। दोनों टेस्ट श्रीलंका में खेले जाएंगे, जहां परिस्थितियां भारत के लिए घरेलू मैदान जैसी नहीं होंगी। इस सीरीज में 2-0 की जीत भारत को सीधे मजबूत स्थिति में ले जाएगी और आगे न्यूजीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दबाव कुछ कम होगा। वहीं अगर सीरीज 1-1 से बराबर रहती है तो भारत को बाकी सात मैचों में और ज्यादा जीत हासिल करनी पड़ सकती हैं। दो टेस्ट की सीरीज गंवाना स्थिति को और मुश्किल बना देगा, क्योंकि तब वापसी के लिए बाकी सात मुकाबलों में लगभग बेदाग प्रदर्शन की जरूरत होगी। भारत-श्रीलंका सीरीज को लेकर यही वजह है कि इसे WTC की रेस में टीम इंडिया के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है।
श्रीलंका के बाद भारत को न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने हैं। विदेशी परिस्थितियों में यह सीरीज आसान नहीं होगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में खेलने का अनुभव भारत के लिए हाल के वर्षों में बहुत अच्छा नहीं रहा है और वहां की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के लिए भी मददगार हो सकती हैं। अगर भारत श्रीलंका के बाद न्यूजीलैंड में भी अच्छा प्रदर्शन करता है तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की घरेलू सीरीज से पहले उसके पास पॉइंट्स प्रतिशत को काफी ऊपर ले जाने का मौका रहेगा। लेकिन यहां एक भी सीरीज खराब जाने पर समीकरण फिर दबाव में आ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज भारत के WTC अभियान का सबसे बड़ा हिस्सा होगी। यह सीरीज घरेलू मैदान पर खेली जानी है और पांच मुकाबलों में कुल 60 अंक दांव पर होंगे। अगर भारत यहां 4-1 या 5-0 जैसा प्रदर्शन करता है तो उसकी स्थिति काफी मजबूत हो सकती है। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार हार से फाइनल की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है। यही वजह है कि भारत के लिए सिर्फ श्रीलंका को हराना पर्याप्त नहीं होगा। उसे पूरे बचे हुए कार्यक्रम में जीत का प्रतिशत काफी ऊंचा रखना पड़ेगा।
WTC में जीत पर 12 अंक, ड्रॉ पर 4 अंक और हार पर कोई अंक नहीं मिलता। इसी वजह से एक टेस्ट का नतीजा भी पॉइंट्स प्रतिशत पर असर डालता है। भारत ने मौजूदा चक्र की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ 2-2 से सीरीज ड्रॉ करके की थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में 0-2 की हार ने उसकी स्थिति बिगाड़ दी। नौ मैचों के बाद 48.15 PCT पर पहुंचने के पीछे यही परिणाम बड़ी वजह रहे। अब टीम के पास गलती की गुंजाइश पहले से काफी कम है।
श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा और इसी मुकाबले से भारत के लिए WTC की अगली बड़ी दौड़ शुरू होगी। दो टेस्ट की इस सीरीज में हर जीत सीधे भारत के खाते में 12 अंक जोड़ेगी, जबकि हार से दूसरी तरफ जाने वाले अंक के साथ PCT पर भी असर पड़ेगा। टीम मैनेजमेंट के सामने अब प्लेइंग-11 से लेकर गेंदबाजी संयोजन तक कई फैसले हैं, क्योंकि आगे के नौ मुकाबले ही तय करेंगे कि भारत 2027 के फाइनल की रेस में कितनी मजबूती से बना रहता है।
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