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वैभव सूर्यवंशी ने रेड-बॉल क्रिकेट पर बढ़ाया फोकस, दलीप ट्रॉफी की तैयारी शुरू
स्पोर्ट्स डेस्क
राजस्थान रॉयल्स के नागपुर कैंप में बैटिंग पर कर रहे काम, ईस्ट जोन के लिए 23 अगस्त से मैदान पर उतरेंगे
वैभव सूर्यवंशी ने टी-20 क्रिकेट के बाद अब अपना ध्यान लाल गेंद के खेल पर लगा दिया है। दलीप ट्रॉफी शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और इससे पहले 15 साल के इस युवा बल्लेबाज ने राजस्थान रॉयल्स के ट्रेनिंग कैंप में रेड-बॉल क्रिकेट की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को वैभव ने अभ्यास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें वह तेज गेंदों को छोड़ने, गेंद को शरीर के करीब आने देने और डिफेंस खेलने की प्रैक्टिस करते दिखाई दिए। कुछ समय बाद उन्होंने आक्रामक शॉट्स पर भी हाथ आजमाया। पोस्ट के साथ उन्होंने सिर्फ ‘Preparation’ लिखा।
वीडियो से साफ दिख रहा है कि इस बार उनकी तैयारी का फोकस सफेद गेंद वाले क्रिकेट से थोड़ा अलग है। टी-20 में तेजी से रन बनाने के लिए पहचाने जाने वाले वैभव अब लंबी पारी खेलने और गेंद को समझकर खेलने की बारीकियों पर काम कर रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में वह ईस्ट जोन की टीम का हिस्सा हैं और उन्हें उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है। टीम की कप्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन करेंगे। ईस्ट जोन का मुकाबला 23 अगस्त से शुरू होगा, ऐसे में वैभव के पास मैच से पहले अपनी तकनीक को रेड-बॉल क्रिकेट के हिसाब से ढालने का सीमित समय है। जिम्बाब्वे के खिलाफ हालिया टी-20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने के बाद उनके लिए यह एक अलग चुनौती होगी।
टी-20 में जहां गेंदबाज के खिलाफ पहली ही गेंद से रन बनाने का दबाव रहता है, वहीं दलीप ट्रॉफी जैसे फॉर्मेट में बल्लेबाज को लंबे समय तक क्रीज पर टिकना पड़ता है। यही वजह है कि अभ्यास में गेंद छोड़ने और डिफेंस पर जोर दिया जा रहा है। राजस्थान रॉयल्स के नागपुर स्थित परफॉर्मेंस सेंटर में खिलाड़ियों के लिए करीब 10 दिन का कैंप रखा गया है। इस दौरान वैभव के साथ टीम के कई दूसरे खिलाड़ी भी ट्रेनिंग कर रहे हैं। कैंप में तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, शुभम दुबे, रवि सिंह और सुशांत मिश्रा जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। इनमें वैभव और तुषार देशपांडे दलीप ट्रॉफी में हिस्सा लेने वाले हैं। तुषार वेस्ट जोन की तरफ से खेलेंगे। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में वैभव के लिए यह ट्रेनिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उनके करियर की शुरुआत काफी कम उम्र में हुई है और अब उन्हें अलग-अलग फॉर्मेट के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी को ढालना है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद उनके सामने रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका है।
दलीप ट्रॉफी का मंच घरेलू स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां अच्छे प्रदर्शन से खिलाड़ियों को आगे के बड़े मुकाबलों के लिए भी मजबूत आधार मिलता है। वैभव के लिए इस टूर्नामेंट में उपकप्तान की भूमिका भी नई जिम्मेदारी लेकर आएगी। ईस्ट जोन की टीम में उनके साथ अभिमन्यु ईश्वरन, सुदीप घरामी, मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, शाहबाज अहमद, सूरज जायसवाल, विराट सिंह और कुमार कुशाग्र जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम में शिखर मोहन, सुब्रांशु सेनापति, अभिजीत सरकार, अनुकूल रॉय और डेनिश दास के नाम भी हैं। ऐसे में वैभव को अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका मिलेगा।
वैभव के लिए पिछले कुछ सप्ताह काफी व्यस्त रहे हैं। जिम्बाब्वे दौरे पर टी-20 सीरीज में उन्होंने बल्ले से लगातार प्रभाव छोड़ा। सीरीज की तीन पारियों में उनके खाते में कुल 151 रन आए। उनका बल्लेबाजी औसत 50.33 रहा, जबकि स्ट्राइक रेट 196.10 के करीब रहा। इस दौरान उन्होंने दो अर्धशतक लगाए और उनकी सबसे बड़ी पारी 81 रन की रही। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन करने के बाद उन्हें सीरीज का प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने उम्र से जुड़ा एक रिकॉर्ड भी बनाया।
15 साल 121 दिन की उम्र में प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार हासिल कर वह इस उपलब्धि को पाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। जिम्बाब्वे में उनका खेल देखने के बाद अब नजर इस बात पर है कि लाल गेंद के क्रिकेट में उनका तरीका कैसा रहता है। दलीप ट्रॉफी में उन्हें नई गेंद का सामना करने से लेकर स्पिन के खिलाफ लंबा समय बिताने तक अलग तरह की परिस्थितियों से गुजरना होगा। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में बल्लेबाजी के दौरान गेंद छोड़ने की प्रैक्टिस इसी तैयारी का हिस्सा दिखाई देती है। टी-20 में जहां स्ट्राइक रेट और तेज शुरुआत अहम रहती है, वहीं रेड-बॉल क्रिकेट में सही गेंद का इंतजार करना और खराब गेंद को छोड़ देना बल्लेबाज के लिए उतना ही जरूरी होता है। वैभव के अभ्यास वीडियो में यही बदलाव नजर आया।
वह पहले गेंद की लाइन और लेंथ को पढ़ते दिखे, फिर आगे बढ़कर डिफेंस किया और मौका मिलने पर शॉट भी खेला। कोचिंग स्टाफ की निगरानी में चल रही इस ट्रेनिंग में तकनीक के साथ-साथ शॉट चयन पर भी काम किया जा रहा है। दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए वैभव की भूमिका सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं होगी। उपकप्तान होने के कारण टीम के भीतर उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। हालांकि इतनी कम उम्र में उन्हें यह भूमिका मिलना अपने आप में चर्चा का विषय है। ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम में उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों से सीखने का मौका मिलेगा। मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार जैसे गेंदबाजों के खिलाफ नेट्स में अभ्यास करना भी उनके लिए उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें घरेलू क्रिकेट के मजबूत गेंदबाजों के सामने अपनी तकनीक परखने का मौका मिलेगा।
दूसरी तरफ राजस्थान रॉयल्स का कैंप भी उनके लिए अहम है। IPL में खेलने के दौरान वैभव ने तेज गति से रन बनाने वाली बल्लेबाजी दिखाई है, लेकिन अब घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में उनसे अलग तरह की बल्लेबाजी देखने को मिल सकती है। 23 अगस्त से शुरू होने वाले दलीप ट्रॉफी मुकाबले से पहले उनके अभ्यास पर इसलिए भी नजर बनी हुई है कि जिम्बाब्वे में मिली सफलता के बाद वह लंबे फॉर्मेट में अपने खेल को किस तरह आगे ले जाते हैं। कैंप में वह लगातार बल्लेबाजी सत्र में हिस्सा ले रहे हैं और गेंद छोड़ने, डिफेंस तथा आक्रामक शॉट्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी ट्रेनिंग का यह चरण अब दलीप ट्रॉफी की ओर बढ़ रहा है।
वैभव सूर्यवंशी ने रेड-बॉल क्रिकेट पर बढ़ाया फोकस, दलीप ट्रॉफी की तैयारी शुरू
स्पोर्ट्स डेस्क
वैभव सूर्यवंशी ने टी-20 क्रिकेट के बाद अब अपना ध्यान लाल गेंद के खेल पर लगा दिया है। दलीप ट्रॉफी शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और इससे पहले 15 साल के इस युवा बल्लेबाज ने राजस्थान रॉयल्स के ट्रेनिंग कैंप में रेड-बॉल क्रिकेट की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को वैभव ने अभ्यास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें वह तेज गेंदों को छोड़ने, गेंद को शरीर के करीब आने देने और डिफेंस खेलने की प्रैक्टिस करते दिखाई दिए। कुछ समय बाद उन्होंने आक्रामक शॉट्स पर भी हाथ आजमाया। पोस्ट के साथ उन्होंने सिर्फ ‘Preparation’ लिखा।
वीडियो से साफ दिख रहा है कि इस बार उनकी तैयारी का फोकस सफेद गेंद वाले क्रिकेट से थोड़ा अलग है। टी-20 में तेजी से रन बनाने के लिए पहचाने जाने वाले वैभव अब लंबी पारी खेलने और गेंद को समझकर खेलने की बारीकियों पर काम कर रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में वह ईस्ट जोन की टीम का हिस्सा हैं और उन्हें उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है। टीम की कप्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन करेंगे। ईस्ट जोन का मुकाबला 23 अगस्त से शुरू होगा, ऐसे में वैभव के पास मैच से पहले अपनी तकनीक को रेड-बॉल क्रिकेट के हिसाब से ढालने का सीमित समय है। जिम्बाब्वे के खिलाफ हालिया टी-20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने के बाद उनके लिए यह एक अलग चुनौती होगी।
टी-20 में जहां गेंदबाज के खिलाफ पहली ही गेंद से रन बनाने का दबाव रहता है, वहीं दलीप ट्रॉफी जैसे फॉर्मेट में बल्लेबाज को लंबे समय तक क्रीज पर टिकना पड़ता है। यही वजह है कि अभ्यास में गेंद छोड़ने और डिफेंस पर जोर दिया जा रहा है। राजस्थान रॉयल्स के नागपुर स्थित परफॉर्मेंस सेंटर में खिलाड़ियों के लिए करीब 10 दिन का कैंप रखा गया है। इस दौरान वैभव के साथ टीम के कई दूसरे खिलाड़ी भी ट्रेनिंग कर रहे हैं। कैंप में तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, शुभम दुबे, रवि सिंह और सुशांत मिश्रा जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। इनमें वैभव और तुषार देशपांडे दलीप ट्रॉफी में हिस्सा लेने वाले हैं। तुषार वेस्ट जोन की तरफ से खेलेंगे। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में वैभव के लिए यह ट्रेनिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उनके करियर की शुरुआत काफी कम उम्र में हुई है और अब उन्हें अलग-अलग फॉर्मेट के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी को ढालना है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद उनके सामने रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करने का मौका है।
दलीप ट्रॉफी का मंच घरेलू स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां अच्छे प्रदर्शन से खिलाड़ियों को आगे के बड़े मुकाबलों के लिए भी मजबूत आधार मिलता है। वैभव के लिए इस टूर्नामेंट में उपकप्तान की भूमिका भी नई जिम्मेदारी लेकर आएगी। ईस्ट जोन की टीम में उनके साथ अभिमन्यु ईश्वरन, सुदीप घरामी, मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, शाहबाज अहमद, सूरज जायसवाल, विराट सिंह और कुमार कुशाग्र जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम में शिखर मोहन, सुब्रांशु सेनापति, अभिजीत सरकार, अनुकूल रॉय और डेनिश दास के नाम भी हैं। ऐसे में वैभव को अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका मिलेगा।
वैभव के लिए पिछले कुछ सप्ताह काफी व्यस्त रहे हैं। जिम्बाब्वे दौरे पर टी-20 सीरीज में उन्होंने बल्ले से लगातार प्रभाव छोड़ा। सीरीज की तीन पारियों में उनके खाते में कुल 151 रन आए। उनका बल्लेबाजी औसत 50.33 रहा, जबकि स्ट्राइक रेट 196.10 के करीब रहा। इस दौरान उन्होंने दो अर्धशतक लगाए और उनकी सबसे बड़ी पारी 81 रन की रही। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन करने के बाद उन्हें सीरीज का प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने उम्र से जुड़ा एक रिकॉर्ड भी बनाया।
15 साल 121 दिन की उम्र में प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार हासिल कर वह इस उपलब्धि को पाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। जिम्बाब्वे में उनका खेल देखने के बाद अब नजर इस बात पर है कि लाल गेंद के क्रिकेट में उनका तरीका कैसा रहता है। दलीप ट्रॉफी में उन्हें नई गेंद का सामना करने से लेकर स्पिन के खिलाफ लंबा समय बिताने तक अलग तरह की परिस्थितियों से गुजरना होगा। राजस्थान रॉयल्स के कैंप में बल्लेबाजी के दौरान गेंद छोड़ने की प्रैक्टिस इसी तैयारी का हिस्सा दिखाई देती है। टी-20 में जहां स्ट्राइक रेट और तेज शुरुआत अहम रहती है, वहीं रेड-बॉल क्रिकेट में सही गेंद का इंतजार करना और खराब गेंद को छोड़ देना बल्लेबाज के लिए उतना ही जरूरी होता है। वैभव के अभ्यास वीडियो में यही बदलाव नजर आया।
वह पहले गेंद की लाइन और लेंथ को पढ़ते दिखे, फिर आगे बढ़कर डिफेंस किया और मौका मिलने पर शॉट भी खेला। कोचिंग स्टाफ की निगरानी में चल रही इस ट्रेनिंग में तकनीक के साथ-साथ शॉट चयन पर भी काम किया जा रहा है। दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए वैभव की भूमिका सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं होगी। उपकप्तान होने के कारण टीम के भीतर उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। हालांकि इतनी कम उम्र में उन्हें यह भूमिका मिलना अपने आप में चर्चा का विषय है। ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम में उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों से सीखने का मौका मिलेगा। मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार जैसे गेंदबाजों के खिलाफ नेट्स में अभ्यास करना भी उनके लिए उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें घरेलू क्रिकेट के मजबूत गेंदबाजों के सामने अपनी तकनीक परखने का मौका मिलेगा।
दूसरी तरफ राजस्थान रॉयल्स का कैंप भी उनके लिए अहम है। IPL में खेलने के दौरान वैभव ने तेज गति से रन बनाने वाली बल्लेबाजी दिखाई है, लेकिन अब घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में उनसे अलग तरह की बल्लेबाजी देखने को मिल सकती है। 23 अगस्त से शुरू होने वाले दलीप ट्रॉफी मुकाबले से पहले उनके अभ्यास पर इसलिए भी नजर बनी हुई है कि जिम्बाब्वे में मिली सफलता के बाद वह लंबे फॉर्मेट में अपने खेल को किस तरह आगे ले जाते हैं। कैंप में वह लगातार बल्लेबाजी सत्र में हिस्सा ले रहे हैं और गेंद छोड़ने, डिफेंस तथा आक्रामक शॉट्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी ट्रेनिंग का यह चरण अब दलीप ट्रॉफी की ओर बढ़ रहा है।
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