- Hindi News
- स्पोर्ट्स
- भारत ने 600वें टेस्ट में श्रीलंका को 165 रन से हराया
भारत ने 600वें टेस्ट में श्रीलंका को 165 रन से हराया
स्पोर्ट्स डेस्क
गॉल में 372 रन के लक्ष्य के सामने 206 पर सिमटी श्रीलंकाई पारी, मानव सुथार ने मैच में 10 विकेट झटके; पडिक्कल ने 167 रन बनाए
गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए पहले टेस्ट का आखिरी दिन पूरी तरह भारतीय गेंदबाजों के नाम रहा। 372 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम अपनी दूसरी पारी में 206 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 165 रन से अपने नाम कर लिया। भारत के लिए इस जीत की सबसे बड़ी कहानी युवा स्पिनर मानव सुथार रहे, जिन्होंने पूरे मैच में 10 विकेट लेकर श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। दूसरी पारी में उन्होंने 6 विकेट अपने नाम किए। भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह टीम का 600वां टेस्ट था। गॉल के मैदान पर जीत तक पहुंचने के लिए भारत को अंतिम पारी में श्रीलंका के निचले क्रम को समेटना था और सुथार ने ठीक वहीं अपना असर दिखाया।
श्रीलंका की तरफ से सोनल दिनूषा ने 84 रन बनाकर कुछ देर तक पारी को संभाले रखा। उनके रहते मेजबान टीम की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी, लेकिन भारतीय स्पिनरों ने दबाव बनाए रखा। सुथार ने दिनूषा को आउट करने के बाद अगले ही चरण में श्रीलंकाई पारी को लगभग खत्म कर दिया। उन्होंने प्रभात जयसूर्या को पहली गेंद पर बोल्ड किया और अगली गेंद पर लहिरू कुमारा को ऋषभ पंत के हाथों कैच करा दिया। एक ही ओवर में तीन विकेट मिलने के बाद श्रीलंका की पारी 206 पर समाप्त हो गई। मैच के स्कोरकार्ड के मुताबिक भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे, जबकि श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर खत्म हुई थी।
भारत की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल सबसे बड़े बल्लेबाजी आकर्षण रहे। उन्होंने 167 रन की पारी खेलकर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। पडिक्कल को इस मुकाबले में मौका साई सुदर्शन की गैरमौजूदगी के बाद मिला था और उन्होंने मिले अवसर का पूरा फायदा उठाया। उनकी पारी में संयम भी था और जरूरत के समय तेजी भी। गॉल की पिच पर श्रीलंकाई स्पिनरों के सामने बल्लेबाजी आसान नहीं थी, लेकिन पडिक्कल ने काफी देर तक विकेट बचाकर रखा और फिर अपने स्कोर को बड़े शतक में बदल दिया। उनकी 167 रन की पारी को मैच के अहम मोड़ों में गिना गया।
रॉयटर्स के मुताबिक, यह पडिक्कल का पहला टेस्ट शतक था और उन्होंने इस पारी के दौरान 15 चौके और एक छक्का लगाया। भारत ने अपनी पहली पारी 462 रन पर खत्म की थी। जवाब में श्रीलंका 284 रन तक पहुंचा, जिससे भारत को पहली पारी में 178 रन की बढ़त मिली। श्रीलंका की पहली पारी में सोनल दिनूषा ने भी शतक लगाया था, जबकि भारतीय स्पिनरों ने लगातार दबाव बनाए रखा। मानव सुथार और रवींद्र जडेजा ने मिलकर श्रीलंकाई बल्लेबाजी को काफी परेशान किया। तीसरे दिन के खेल में दोनों स्पिनरों ने सात विकेट साझा किए थे। गॉल की पिच पर जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, स्पिन का असर ज्यादा साफ दिखाई देने लगा।
पहली पारी की बढ़त मिलने के बाद भारत ने दूसरी पारी में 193 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य बड़ा था, लेकिन गॉल की परिस्थितियों को देखते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों से लंबी साझेदारियों की उम्मीद थी। शुरुआत में मेजबान टीम ने कुछ प्रतिरोध दिखाया भी। सोनल दिनूषा एक छोर पर टिके रहे और उन्होंने 84 रन की पारी खेली। उनके साथ कुछ समय तक दूसरे बल्लेबाजों ने भी भारतीय गेंदबाजों का सामना किया, लेकिन विकेट गिरते ही दबाव बढ़ता गया। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की और श्रीलंका को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया।
सुथार की गेंदबाजी इस दौरान खास रही। दूसरी पारी में उनके 6 विकेट ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की तरफ कर दिया। 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट उनका आंकड़ा रहा। रवींद्र जडेजा ने भी एक विकेट लिया, जबकि तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने दो विकेट हासिल किए। श्रीलंका के लिए धनंजय डी सिल्वा ने 59 रन बनाए और दिनूषा के साथ पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों की पारियों के बावजूद टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। जैसे-जैसे श्रीलंकाई बल्लेबाजी का निचला क्रम मैदान पर आया, भारत की जीत की तस्वीर साफ होती चली गई।
इस टेस्ट की शुरुआत भी भारत के लिए खास रही थी। 15 अगस्त को गॉल में मुकाबला शुरू हुआ था और यही भारत का 600वां टेस्ट था। टीम के लिए यह एक ऐतिहासिक पड़ाव था, लेकिन कप्तान शुभमन गिल और खिलाड़ियों का ध्यान शुरुआत से ही मैच जीतने पर था। भारत की टेस्ट यात्रा 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स से शुरू हुई थी और करीब 94 साल बाद टीम 600 टेस्ट तक पहुंची। गॉल में इस मुकाबले के साथ भारत ने इस लंबे सफर में एक और अध्याय जोड़ा। मैच में भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का संतुलन दिखाई दिया।
पडिक्कल का 167 रन, पहली पारी में 462 का स्कोर और फिर सुथार के 10 विकेट ऐसे प्रदर्शन रहे, जिन्होंने मुकाबले को भारत के पक्ष में बनाए रखा। श्रीलंका की तरफ से दिनूषा और धनंजय डी सिल्वा ने प्रतिरोध जरूर किया, लेकिन भारत की स्पिन गेंदबाजी के सामने बाकी बल्लेबाज ज्यादा देर नहीं टिक सके। आखिरी पलों में सुथार ने जिस तरह लगातार दो गेंदों पर दो विकेट लेकर पारी खत्म की, उससे गॉल टेस्ट का नतीजा सामने आ गया और 600वें टेस्ट में भारतीय टीम के नाम 165 रन की जीत दर्ज हुई।
भारत ने 600वें टेस्ट में श्रीलंका को 165 रन से हराया
स्पोर्ट्स डेस्क
गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए पहले टेस्ट का आखिरी दिन पूरी तरह भारतीय गेंदबाजों के नाम रहा। 372 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम अपनी दूसरी पारी में 206 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 165 रन से अपने नाम कर लिया। भारत के लिए इस जीत की सबसे बड़ी कहानी युवा स्पिनर मानव सुथार रहे, जिन्होंने पूरे मैच में 10 विकेट लेकर श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। दूसरी पारी में उन्होंने 6 विकेट अपने नाम किए। भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह टीम का 600वां टेस्ट था। गॉल के मैदान पर जीत तक पहुंचने के लिए भारत को अंतिम पारी में श्रीलंका के निचले क्रम को समेटना था और सुथार ने ठीक वहीं अपना असर दिखाया।
श्रीलंका की तरफ से सोनल दिनूषा ने 84 रन बनाकर कुछ देर तक पारी को संभाले रखा। उनके रहते मेजबान टीम की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी, लेकिन भारतीय स्पिनरों ने दबाव बनाए रखा। सुथार ने दिनूषा को आउट करने के बाद अगले ही चरण में श्रीलंकाई पारी को लगभग खत्म कर दिया। उन्होंने प्रभात जयसूर्या को पहली गेंद पर बोल्ड किया और अगली गेंद पर लहिरू कुमारा को ऋषभ पंत के हाथों कैच करा दिया। एक ही ओवर में तीन विकेट मिलने के बाद श्रीलंका की पारी 206 पर समाप्त हो गई। मैच के स्कोरकार्ड के मुताबिक भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे, जबकि श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर खत्म हुई थी।
भारत की पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल सबसे बड़े बल्लेबाजी आकर्षण रहे। उन्होंने 167 रन की पारी खेलकर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। पडिक्कल को इस मुकाबले में मौका साई सुदर्शन की गैरमौजूदगी के बाद मिला था और उन्होंने मिले अवसर का पूरा फायदा उठाया। उनकी पारी में संयम भी था और जरूरत के समय तेजी भी। गॉल की पिच पर श्रीलंकाई स्पिनरों के सामने बल्लेबाजी आसान नहीं थी, लेकिन पडिक्कल ने काफी देर तक विकेट बचाकर रखा और फिर अपने स्कोर को बड़े शतक में बदल दिया। उनकी 167 रन की पारी को मैच के अहम मोड़ों में गिना गया।
रॉयटर्स के मुताबिक, यह पडिक्कल का पहला टेस्ट शतक था और उन्होंने इस पारी के दौरान 15 चौके और एक छक्का लगाया। भारत ने अपनी पहली पारी 462 रन पर खत्म की थी। जवाब में श्रीलंका 284 रन तक पहुंचा, जिससे भारत को पहली पारी में 178 रन की बढ़त मिली। श्रीलंका की पहली पारी में सोनल दिनूषा ने भी शतक लगाया था, जबकि भारतीय स्पिनरों ने लगातार दबाव बनाए रखा। मानव सुथार और रवींद्र जडेजा ने मिलकर श्रीलंकाई बल्लेबाजी को काफी परेशान किया। तीसरे दिन के खेल में दोनों स्पिनरों ने सात विकेट साझा किए थे। गॉल की पिच पर जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, स्पिन का असर ज्यादा साफ दिखाई देने लगा।
पहली पारी की बढ़त मिलने के बाद भारत ने दूसरी पारी में 193 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य बड़ा था, लेकिन गॉल की परिस्थितियों को देखते हुए श्रीलंकाई बल्लेबाजों से लंबी साझेदारियों की उम्मीद थी। शुरुआत में मेजबान टीम ने कुछ प्रतिरोध दिखाया भी। सोनल दिनूषा एक छोर पर टिके रहे और उन्होंने 84 रन की पारी खेली। उनके साथ कुछ समय तक दूसरे बल्लेबाजों ने भी भारतीय गेंदबाजों का सामना किया, लेकिन विकेट गिरते ही दबाव बढ़ता गया। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की और श्रीलंका को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया।
सुथार की गेंदबाजी इस दौरान खास रही। दूसरी पारी में उनके 6 विकेट ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की तरफ कर दिया। 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट उनका आंकड़ा रहा। रवींद्र जडेजा ने भी एक विकेट लिया, जबकि तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने दो विकेट हासिल किए। श्रीलंका के लिए धनंजय डी सिल्वा ने 59 रन बनाए और दिनूषा के साथ पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों की पारियों के बावजूद टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। जैसे-जैसे श्रीलंकाई बल्लेबाजी का निचला क्रम मैदान पर आया, भारत की जीत की तस्वीर साफ होती चली गई।
इस टेस्ट की शुरुआत भी भारत के लिए खास रही थी। 15 अगस्त को गॉल में मुकाबला शुरू हुआ था और यही भारत का 600वां टेस्ट था। टीम के लिए यह एक ऐतिहासिक पड़ाव था, लेकिन कप्तान शुभमन गिल और खिलाड़ियों का ध्यान शुरुआत से ही मैच जीतने पर था। भारत की टेस्ट यात्रा 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स से शुरू हुई थी और करीब 94 साल बाद टीम 600 टेस्ट तक पहुंची। गॉल में इस मुकाबले के साथ भारत ने इस लंबे सफर में एक और अध्याय जोड़ा। मैच में भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का संतुलन दिखाई दिया।
पडिक्कल का 167 रन, पहली पारी में 462 का स्कोर और फिर सुथार के 10 विकेट ऐसे प्रदर्शन रहे, जिन्होंने मुकाबले को भारत के पक्ष में बनाए रखा। श्रीलंका की तरफ से दिनूषा और धनंजय डी सिल्वा ने प्रतिरोध जरूर किया, लेकिन भारत की स्पिन गेंदबाजी के सामने बाकी बल्लेबाज ज्यादा देर नहीं टिक सके। आखिरी पलों में सुथार ने जिस तरह लगातार दो गेंदों पर दो विकेट लेकर पारी खत्म की, उससे गॉल टेस्ट का नतीजा सामने आ गया और 600वें टेस्ट में भारतीय टीम के नाम 165 रन की जीत दर्ज हुई।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
