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रैपिड में छाए प्रज्ञानानंदा, अब ब्लिट्ज में खिताब जीतने की बड़ी चुनौती
स्पोर्ट्स डेस्क
सेंट लुईस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर ने 18 में से 12 अंक जुटाकर बनाई बढ़त, अब 18 ब्लिट्ज मुकाबलों में तय होगा चैंपियन
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में खेले जा रहे प्रतिष्ठित सेंट लुईस रैपिड एंड ब्लिट्ज शतरंज टूर्नामेंट के रैपिड चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। नौ राउंड के मुकाबलों के बाद उन्होंने कुल 18 संभावित अंकों में से 12 अंक जुटाकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर एक अंक की बढ़त बना ली है। इस प्रदर्शन ने न केवल उन्हें टूर्नामेंट जीतने का मजबूत दावेदार बनाया है, बल्कि साल के अंत में होने वाले ग्रैंड चेस टूर फाइनल में जगह बनाने की उनकी उम्मीदों को भी नई मजबूती दी है। अब टूर्नामेंट का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण यानी ब्लिट्ज मुकाबले शुरू होंगे, जहां 18 मैचों के बाद विजेता का फैसला होगा।
रैपिड सेक्शन में प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही शानदार लय दिखाई। उन्होंने लगातार सटीक चालों, मजबूत रणनीति और दबाव में संयमित खेल का प्रदर्शन करते हुए चार मुकाबलों में जीत दर्ज की। इसके अलावा चार मैच ड्रॉ रहे और उन्हें केवल एक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। अंतिम राउंड में नीदरलैंड्स के ग्रैंडमास्टर जोर्डन वान फोरीस्ट ने उन्हें हराया, लेकिन तब तक प्रज्ञानानंदा पर्याप्त बढ़त बना चुके थे। इसी वजह से अंतिम हार के बावजूद वे अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर बने रहे।
रैपिड प्रारूप में खिलाड़ियों को हर जीत के लिए दो अंक और ड्रॉ के लिए एक अंक मिलता है। इसी प्रणाली के तहत प्रज्ञानानंदा ने कुल 12 अंक हासिल किए। उनके लगातार संतुलित प्रदर्शन ने यह साबित किया कि वे केवल आक्रामक खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने में भी माहिर हैं। यही गुण उन्हें दुनिया के उभरते हुए शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स में शामिल करता है।
प्रज्ञानानंदा के पीछे उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंजारोव और अमेरिका के वेस्ली सो 11-11 अंकों के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर हैं। सिंजारोव इस समय शानदार फॉर्म में हैं और आने वाली विश्व शतरंज चैंपियनशिप में भारत के डी. गुकेश को चुनौती देने वाले हैं। दूसरी ओर, वेस्ली सो लंबे समय से दुनिया के सबसे मजबूत रैपिड और ब्लिट्ज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। ऐसे में ब्लिट्ज मुकाबलों में इन दोनों खिलाड़ियों से प्रज्ञानानंदा को कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका के लेवोन अरोनियन, लेनियर डोमिंग्वेज, नीदरलैंड्स के अनीश गिरी और जर्मनी के विंसेंट कीमर नौ-नौ अंकों के साथ संयुक्त चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनके और शीर्ष स्थान के बीच कुछ अंतर है, लेकिन ब्लिट्ज प्रारूप में तेजी से अंक जुटाए जा सकते हैं। यही कारण है कि टूर्नामेंट अभी पूरी तरह खुला हुआ है और किसी भी खिलाड़ी की वापसी संभव मानी जा रही है।
अब सभी खिलाड़ियों को कुल 18 ब्लिट्ज मुकाबले खेलने हैं। ब्लिट्ज शतरंज में समय बेहद कम होता है और खिलाड़ियों को कुछ ही मिनटों में पूरे मुकाबले का फैसला करना पड़ता है। इस प्रारूप में एक छोटी सी गलती भी हार का कारण बन सकती है। हर जीत पर एक अंक मिलेगा, जबकि ड्रॉ होने पर आधा-आधा अंक दिया जाएगा। इसलिए रैपिड में मिली बढ़त को बरकरार रखना प्रज्ञानानंदा के लिए आसान नहीं होगा।
प्रज्ञानानंदा की सबसे बड़ी ताकत उनका शांत स्वभाव और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने विश्व स्तर के कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा साबित की है। कम उम्र में ही उन्होंने विश्वनाथन आनंद के बाद भारत के सबसे सफल युवा ग्रैंडमास्टर्स में अपनी पहचान बनाई है। यही अनुभव अब ब्लिट्ज मुकाबलों में उनके काम आ सकता है।
सेंट लुईस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट ग्रैंड चेस टूर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रतियोगिता में दुनिया के कई शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स भाग लेते हैं और यहां का प्रदर्शन पूरे सीजन की रैंकिंग को प्रभावित करता है। यही वजह है कि हर मुकाबला खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस बार टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि दो लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1.67 करोड़ रुपये रखी गई है। विजेता को लगभग 50 हजार डॉलर यानी करीब 42 लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
प्रज्ञानानंदा के लिए यह टूर्नामेंट केवल खिताब जीतने तक सीमित नहीं है। अगर वह ब्लिट्ज चरण में भी बढ़त बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो ग्रैंड चेस टूर फाइनल के लिए उनकी स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी। इससे विश्व शतरंज में उनकी रैंकिंग और प्रतिष्ठा दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा।
भारतीय शतरंज इस समय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। डी. गुकेश, अर्जुन एरिगैसी, विदित गुजराती और प्रज्ञानानंदा जैसे युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में सेंट लुईस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा का यह प्रदर्शन भारतीय शतरंज के लिए एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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रैपिड में छाए प्रज्ञानानंदा, अब ब्लिट्ज में खिताब जीतने की बड़ी चुनौती
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में खेले जा रहे प्रतिष्ठित सेंट लुईस रैपिड एंड ब्लिट्ज शतरंज टूर्नामेंट के रैपिड चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। नौ राउंड के मुकाबलों के बाद उन्होंने कुल 18 संभावित अंकों में से 12 अंक जुटाकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों पर एक अंक की बढ़त बना ली है। इस प्रदर्शन ने न केवल उन्हें टूर्नामेंट जीतने का मजबूत दावेदार बनाया है, बल्कि साल के अंत में होने वाले ग्रैंड चेस टूर फाइनल में जगह बनाने की उनकी उम्मीदों को भी नई मजबूती दी है। अब टूर्नामेंट का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण यानी ब्लिट्ज मुकाबले शुरू होंगे, जहां 18 मैचों के बाद विजेता का फैसला होगा।
रैपिड सेक्शन में प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही शानदार लय दिखाई। उन्होंने लगातार सटीक चालों, मजबूत रणनीति और दबाव में संयमित खेल का प्रदर्शन करते हुए चार मुकाबलों में जीत दर्ज की। इसके अलावा चार मैच ड्रॉ रहे और उन्हें केवल एक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। अंतिम राउंड में नीदरलैंड्स के ग्रैंडमास्टर जोर्डन वान फोरीस्ट ने उन्हें हराया, लेकिन तब तक प्रज्ञानानंदा पर्याप्त बढ़त बना चुके थे। इसी वजह से अंतिम हार के बावजूद वे अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर बने रहे।
रैपिड प्रारूप में खिलाड़ियों को हर जीत के लिए दो अंक और ड्रॉ के लिए एक अंक मिलता है। इसी प्रणाली के तहत प्रज्ञानानंदा ने कुल 12 अंक हासिल किए। उनके लगातार संतुलित प्रदर्शन ने यह साबित किया कि वे केवल आक्रामक खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने में भी माहिर हैं। यही गुण उन्हें दुनिया के उभरते हुए शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स में शामिल करता है।
प्रज्ञानानंदा के पीछे उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंजारोव और अमेरिका के वेस्ली सो 11-11 अंकों के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर हैं। सिंजारोव इस समय शानदार फॉर्म में हैं और आने वाली विश्व शतरंज चैंपियनशिप में भारत के डी. गुकेश को चुनौती देने वाले हैं। दूसरी ओर, वेस्ली सो लंबे समय से दुनिया के सबसे मजबूत रैपिड और ब्लिट्ज खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। ऐसे में ब्लिट्ज मुकाबलों में इन दोनों खिलाड़ियों से प्रज्ञानानंदा को कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका के लेवोन अरोनियन, लेनियर डोमिंग्वेज, नीदरलैंड्स के अनीश गिरी और जर्मनी के विंसेंट कीमर नौ-नौ अंकों के साथ संयुक्त चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनके और शीर्ष स्थान के बीच कुछ अंतर है, लेकिन ब्लिट्ज प्रारूप में तेजी से अंक जुटाए जा सकते हैं। यही कारण है कि टूर्नामेंट अभी पूरी तरह खुला हुआ है और किसी भी खिलाड़ी की वापसी संभव मानी जा रही है।
अब सभी खिलाड़ियों को कुल 18 ब्लिट्ज मुकाबले खेलने हैं। ब्लिट्ज शतरंज में समय बेहद कम होता है और खिलाड़ियों को कुछ ही मिनटों में पूरे मुकाबले का फैसला करना पड़ता है। इस प्रारूप में एक छोटी सी गलती भी हार का कारण बन सकती है। हर जीत पर एक अंक मिलेगा, जबकि ड्रॉ होने पर आधा-आधा अंक दिया जाएगा। इसलिए रैपिड में मिली बढ़त को बरकरार रखना प्रज्ञानानंदा के लिए आसान नहीं होगा।
प्रज्ञानानंदा की सबसे बड़ी ताकत उनका शांत स्वभाव और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने विश्व स्तर के कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर अपनी प्रतिभा साबित की है। कम उम्र में ही उन्होंने विश्वनाथन आनंद के बाद भारत के सबसे सफल युवा ग्रैंडमास्टर्स में अपनी पहचान बनाई है। यही अनुभव अब ब्लिट्ज मुकाबलों में उनके काम आ सकता है।
सेंट लुईस रैपिड एंड ब्लिट्ज टूर्नामेंट ग्रैंड चेस टूर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रतियोगिता में दुनिया के कई शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स भाग लेते हैं और यहां का प्रदर्शन पूरे सीजन की रैंकिंग को प्रभावित करता है। यही वजह है कि हर मुकाबला खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस बार टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि दो लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1.67 करोड़ रुपये रखी गई है। विजेता को लगभग 50 हजार डॉलर यानी करीब 42 लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
प्रज्ञानानंदा के लिए यह टूर्नामेंट केवल खिताब जीतने तक सीमित नहीं है। अगर वह ब्लिट्ज चरण में भी बढ़त बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो ग्रैंड चेस टूर फाइनल के लिए उनकी स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी। इससे विश्व शतरंज में उनकी रैंकिंग और प्रतिष्ठा दोनों को बड़ा फायदा मिलेगा।
भारतीय शतरंज इस समय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। डी. गुकेश, अर्जुन एरिगैसी, विदित गुजराती और प्रज्ञानानंदा जैसे युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में सेंट लुईस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा का यह प्रदर्शन भारतीय शतरंज के लिए एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
