अफ्रीका कप फाइनल में अभूतपूर्व ड्रामा: पेनल्टी फैसले पर सेनेगल ने छोड़ा मैदान, फिर लौटकर मोरक्को से छीना खिताब

स्पोर्ट्स डेस्क

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विवादित रेफरी निर्णय से 14 मिनट तक रुका खिताबी मुकाबला, मिस हुई पेनल्टी बनी टर्निंग पॉइंट, एक्स्ट्रा टाइम में सेनेगल की जीत

अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का फाइनल मुकाबला रविवार को उस समय इतिहास में दर्ज हो गया, जब खिताबी मैच फुटबॉल से ज्यादा विवाद, विरोध और भावनात्मक टकराव के लिए चर्चा में आ गया। मोरक्को और सेनेगल के बीच खेले गए इस मुकाबले में एक पेनल्टी निर्णय को लेकर सेनेगल की पूरी टीम मैदान छोड़कर बाहर चली गई, जिससे खेल करीब 14 मिनट तक ठप रहा। हालांकि, मैदान पर लौटने के बाद सेनेगल ने संयम और रणनीति का परिचय देते हुए एक्स्ट्रा टाइम में गोल कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

पेनल्टी फैसले ने बढ़ाया तनाव

प्रिंस मौले अब्देल्लाह स्टेडियम में खेले जा रहे मुकाबले के नियमित समय के अंतिम क्षणों में रेफरी ने मोरक्को के पक्ष में पेनल्टी का इशारा किया। इस फैसले से सेनेगल के खिलाड़ी भड़क उठे और उन्होंने रेफरी से तीखी बहस शुरू कर दी। कुछ ही पलों में विरोध इतना बढ़ा कि पूरी टीम मैदान छोड़कर डगआउट की ओर चली गई।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दर्शकों में भी असमंजस फैल गया और खेल को रोकना पड़ा। स्टेडियम में अफरा-तफरी के बीच करीब 14 मिनट तक मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका।

कप्तान माने ने संभाली कमान

हालात बिगड़ते देख सेनेगल के कप्तान सादियो माने ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने टीम को समझाया कि विरोध के बावजूद खेल पूरा करना जरूरी है। माने की अगुवाई में खिलाड़ी वापस मैदान पर लौटे, जिसके बाद मैच दोबारा शुरू हो सका।

मोरक्को की चूक, सेनेगल की वापसी

मैच दोबारा शुरू होने के बाद मोरक्को के ब्राहिम डियाज ने पेनल्टी ली, लेकिन सेनेगल के गोलकीपर ने शानदार अंदाज में शॉट रोक लिया। यह बचाव मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। निर्धारित समय में कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में चला गया।

एक्स्ट्रा टाइम में सेनेगल का निर्णायक वार

एक्स्ट्रा टाइम के 94वें मिनट में सेनेगल के मिडफील्डर पाप गुए ने तेज मूव और सटीक फिनिश के साथ गेंद को नेट में पहुंचाया। यही गोल सेनेगल को 1-0 की बढ़त और अंततः खिताब दिलाने के लिए काफी रहा।

सेनेगल ने जीता दूसरा अफ्रीका कप

इस जीत के साथ सेनेगल ने अफ्रीका कप ऑफ नेशंस का अपना दूसरा खिताब अपने नाम किया। विवादों से घिरे इस फाइनल को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कई पूर्व खिलाड़ियों ने रेफरी निर्णयों पर सवाल उठाए।

अफ्रीका कप में विवाद कोई नई बात नहीं

अफ्रीका कप का इतिहास पहले भी विवादों से भरा रहा है।
2010 में टोगो टीम पर हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।
2015 में इक्वेटोरियल गिनी पर रेफरी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगे थे।
2022 में ट्यूनीशिया-माली मुकाबले में समय से पहले मैच खत्म होने पर CAF को सफाई देनी पड़ी थी।2025 का यह फाइनल अब उसी कड़ी में एक और विवादास्पद अध्याय बन गया है।

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