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बस्तर का ‘नटवरलाल’ फिर गिरफ्त में, तीन जेलों से चार बार दे चुका था चकमा
जगदलपुर
जगदलपुर जेल से दीवार फांदकर हुआ था फरार, नारायणपुर में पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा
बस्तर संभाग में बार-बार जेल और पुलिस की सुरक्षा को चकमा देकर फरार होने के कारण चर्चा में आए महेंद्र दीवान उर्फ ‘नटवरलाल’ को पुलिस ने एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है। करीब 25 वर्षीय महेंद्र चोरी के मामलों का आरोपी है और उसके खिलाफ बस्तर, दंतेवाड़ा तथा कांकेर में कई प्रकरण दर्ज बताए गए हैं। उसकी गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह अलग-अलग मौकों पर जेल और पुलिस अभिरक्षा से चार बार फरार हो चुका था। आखिरी बार 25 मार्च को जगदलपुर केंद्रीय जेल से भागने के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। करीब तीन महीने की तलाश के बाद उसके नारायणपुर इलाके में मौजूद होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक महेंद्र दीवान मूल रूप से दंतेवाड़ा जिले के चितालंका कलारपारा का रहने वाला है। उसके खिलाफ अलग-अलग जिलों में चोरी से जुड़े करीब सात मामले दर्ज होने की जानकारी है। कोतवाली पुलिस उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की कोशिश कर रही थी। इसी बीच मुखबिर से उसके नारायणपुर में छिपे होने की सूचना मिली। जानकारी की पुष्टि के बाद एक विशेष टीम रवाना की गई। पुलिस ने संभावित ठिकाने के आसपास घेरा बनाया और इस बार आरोपी को भागने का मौका नहीं मिला। गिरफ्तारी के बाद उसे पुलिस सुरक्षा में लाया गया और न्यायालय में पेश करने सहित आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
महेंद्र की सबसे ज्यादा चर्चा उसके आपराधिक मामलों से अधिक बार-बार फरार होने की वजह से होती रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह इससे पहले दंतेवाड़ा और कांकेर की जेलों से निकल भाग चुका है। एक अन्य घटना में इलाज के दौरान पुलिस अभिरक्षा को चकमा देकर फरार हुआ था। हालांकि उस समय पुलिस ने कुछ ही घंटों में उसे दोबारा पकड़ लिया था। लगातार ऐसी घटनाओं के कारण उसकी निगरानी बढ़ाई गई और बाद में उसे अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाने वाली जगदलपुर केंद्रीय जेल में रखा गया, लेकिन यहां से भी वह निकलने में सफल रहा।
25 मार्च की शाम हुई घटना ने जगदलपुर केंद्रीय जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार महेंद्र पुरुष बैरक वाले हिस्से से निकलते हुए महिला बैरक के पास पहुंचा था। यहां मौजूद अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाली दीवार को पार कर वह जेल परिसर से बाहर निकल गया। जब तक दूसरे कैदियों की गतिविधियों से इसकी भनक लगी और अलर्ट जारी किया गया, तब तक वह काफी दूर निकल चुका था। शाम और अंधेरे का फायदा मिलने से पुलिस को तत्काल उसका पता नहीं चल सका।
जेल से कैदी के इस तरह निकल जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की गई थी। सवाल यह उठा था कि लगातार फरार होने का रिकॉर्ड रखने वाले आरोपी की निगरानी में आखिर चूक कैसे हुई। सूत्रों के अनुसार उसके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उसे ज्यादा सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरित करने पर भी विचार चल रहा था। उसे रायपुर केंद्रीय जेल की हाई सिक्योरिटी व्यवस्था में भेजने की तैयारी की बात सामने आई थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसने एक बार फिर सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया।
जगदलपुर से फरार होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी लोकेशन तलाशना थी। आरोपी के संभावित परिचितों, पुराने संपर्कों और उन इलाकों पर नजर रखी गई, जहां उसके जाने की संभावना थी। वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस की अलग-अलग टीमें जानकारी जुटाती रहीं और आखिरकार नारायणपुर से मिले इनपुट ने उसकी तलाश को दिशा दी। इस बार कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए उसके ठिकाने की घेराबंदी की गई, जिससे उसे पहले की तरह निकल भागने का मौका नहीं मिल सका।
महेंद्र की फरारी का सिलसिला दंतेवाड़ा जेल से शुरू हुआ बताया जाता है। यहां सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर निकलने के बाद वह पुलिस रिकॉर्ड में फरार आरोपी के रूप में चर्चा में आया। बाद में कांकेर जेल में रखे जाने के दौरान भी उसने सुरक्षा में सेंध लगाई और वहां से निकल गया। इन दोनों घटनाओं के बाद जेल प्रशासन के लिए उसकी निगरानी बड़ी चुनौती बन गई थी।
एक अन्य मौके पर उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। इसी दौरान वह पुलिसकर्मियों की नजर बचाकर फरार हो गया। अचानक आरोपी के गायब होने से पुलिस में हड़कंप मच गया था। तत्काल तलाशी अभियान चलाया गया और कुछ घंटों की मशक्कत के बाद उसे फिर पकड़ लिया गया। इसके बावजूद उसकी फरार होने की कोशिशें नहीं रुकीं।
चौथी बड़ी घटना जगदलपुर केंद्रीय जेल में हुई। पुराने रिकॉर्ड के बावजूद महेंद्र ने यहां भी ऐसा रास्ता तलाश लिया, जिससे वह जेल की बाहरी सीमा तक पहुंच सके। महिला बैरक के आसपास की दीवार पार करने के बाद वह बाहर निकल गया। घटना सामने आते ही जेल परिसर में अलार्म की स्थिति बनी और शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश शुरू की गई।
महेंद्र के बार-बार भागने के तरीके एक जैसे नहीं रहे। कभी जेल की सुरक्षा में कमजोरी का फायदा उठाया गया तो कभी पुलिस अभिरक्षा के दौरान मौका देखकर वह निकल गया। यही वजह रही कि स्थानीय स्तर पर उसे ‘बस्तर का नटवरलाल’ कहा जाने लगा। यह नाम पुलिस का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या उपाधि नहीं, बल्कि उसके लगातार फरार होने की घटनाओं के कारण प्रचलित हुआ बताया जाता है।
पुलिस अब इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि जगदलपुर जेल से निकलने के बाद करीब तीन महीने तक महेंद्र कहां-कहां रहा और किन लोगों ने उसकी मदद की। फरारी के दौरान किसी नए अपराध में उसकी संलिप्तता रही या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है। उसके संपर्क में रहे लोगों और ठिकाना उपलब्ध कराने वालों के बारे में जानकारी मिलने पर अलग कार्रवाई संभव है।
आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। जेल भेजे जाने और पेशी के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरती जा सकती है। पूर्व में तीन अलग-अलग जिलों की जेल या पुलिस अभिरक्षा से उसके भागने की घटनाओं के कारण सामान्य कैदी की तुलना में उसकी निगरानी ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
महेंद्र की पहली चर्चित फरारी दंतेवाड़ा जेल से हुई थी। दूसरी बार वह कांकेर जेल की सुरक्षा से निकल गया। तीसरी घटना इलाज के दौरान सामने आई, जब पुलिस अभिरक्षा से वह भागा लेकिन कुछ घंटों में पकड़ लिया गया। चौथी बार 25 मार्च को जगदलपुर केंद्रीय जेल की दीवार पार कर उसने पुलिस और जेल प्रशासन को फिर चुनौती दी। इस फरारी के बाद उसकी तलाश बस्तर संभाग के साथ आसपास के जिलों में भी की जा रही थी।
नारायणपुर में गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे फरारी के पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ कर सकती है। खास तौर पर यह जानना अहम होगा कि जेल से बाहर निकलने के बाद उसने किन रास्तों का इस्तेमाल किया, इतने दिनों तक गिरफ्तारी से कैसे बचा और क्या उसे किसी व्यक्ति से मदद मिली थी। उसके खिलाफ पहले से दर्ज चोरी के मामलों की न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
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जगदलपुर
बस्तर संभाग में बार-बार जेल और पुलिस की सुरक्षा को चकमा देकर फरार होने के कारण चर्चा में आए महेंद्र दीवान उर्फ ‘नटवरलाल’ को पुलिस ने एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है। करीब 25 वर्षीय महेंद्र चोरी के मामलों का आरोपी है और उसके खिलाफ बस्तर, दंतेवाड़ा तथा कांकेर में कई प्रकरण दर्ज बताए गए हैं। उसकी गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह अलग-अलग मौकों पर जेल और पुलिस अभिरक्षा से चार बार फरार हो चुका था। आखिरी बार 25 मार्च को जगदलपुर केंद्रीय जेल से भागने के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। करीब तीन महीने की तलाश के बाद उसके नारायणपुर इलाके में मौजूद होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक महेंद्र दीवान मूल रूप से दंतेवाड़ा जिले के चितालंका कलारपारा का रहने वाला है। उसके खिलाफ अलग-अलग जिलों में चोरी से जुड़े करीब सात मामले दर्ज होने की जानकारी है। कोतवाली पुलिस उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की कोशिश कर रही थी। इसी बीच मुखबिर से उसके नारायणपुर में छिपे होने की सूचना मिली। जानकारी की पुष्टि के बाद एक विशेष टीम रवाना की गई। पुलिस ने संभावित ठिकाने के आसपास घेरा बनाया और इस बार आरोपी को भागने का मौका नहीं मिला। गिरफ्तारी के बाद उसे पुलिस सुरक्षा में लाया गया और न्यायालय में पेश करने सहित आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
महेंद्र की सबसे ज्यादा चर्चा उसके आपराधिक मामलों से अधिक बार-बार फरार होने की वजह से होती रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह इससे पहले दंतेवाड़ा और कांकेर की जेलों से निकल भाग चुका है। एक अन्य घटना में इलाज के दौरान पुलिस अभिरक्षा को चकमा देकर फरार हुआ था। हालांकि उस समय पुलिस ने कुछ ही घंटों में उसे दोबारा पकड़ लिया था। लगातार ऐसी घटनाओं के कारण उसकी निगरानी बढ़ाई गई और बाद में उसे अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाने वाली जगदलपुर केंद्रीय जेल में रखा गया, लेकिन यहां से भी वह निकलने में सफल रहा।
25 मार्च की शाम हुई घटना ने जगदलपुर केंद्रीय जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार महेंद्र पुरुष बैरक वाले हिस्से से निकलते हुए महिला बैरक के पास पहुंचा था। यहां मौजूद अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाली दीवार को पार कर वह जेल परिसर से बाहर निकल गया। जब तक दूसरे कैदियों की गतिविधियों से इसकी भनक लगी और अलर्ट जारी किया गया, तब तक वह काफी दूर निकल चुका था। शाम और अंधेरे का फायदा मिलने से पुलिस को तत्काल उसका पता नहीं चल सका।
जेल से कैदी के इस तरह निकल जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की गई थी। सवाल यह उठा था कि लगातार फरार होने का रिकॉर्ड रखने वाले आरोपी की निगरानी में आखिर चूक कैसे हुई। सूत्रों के अनुसार उसके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उसे ज्यादा सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरित करने पर भी विचार चल रहा था। उसे रायपुर केंद्रीय जेल की हाई सिक्योरिटी व्यवस्था में भेजने की तैयारी की बात सामने आई थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसने एक बार फिर सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया।
जगदलपुर से फरार होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी लोकेशन तलाशना थी। आरोपी के संभावित परिचितों, पुराने संपर्कों और उन इलाकों पर नजर रखी गई, जहां उसके जाने की संभावना थी। वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस की अलग-अलग टीमें जानकारी जुटाती रहीं और आखिरकार नारायणपुर से मिले इनपुट ने उसकी तलाश को दिशा दी। इस बार कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए उसके ठिकाने की घेराबंदी की गई, जिससे उसे पहले की तरह निकल भागने का मौका नहीं मिल सका।
महेंद्र की फरारी का सिलसिला दंतेवाड़ा जेल से शुरू हुआ बताया जाता है। यहां सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर निकलने के बाद वह पुलिस रिकॉर्ड में फरार आरोपी के रूप में चर्चा में आया। बाद में कांकेर जेल में रखे जाने के दौरान भी उसने सुरक्षा में सेंध लगाई और वहां से निकल गया। इन दोनों घटनाओं के बाद जेल प्रशासन के लिए उसकी निगरानी बड़ी चुनौती बन गई थी।
एक अन्य मौके पर उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। इसी दौरान वह पुलिसकर्मियों की नजर बचाकर फरार हो गया। अचानक आरोपी के गायब होने से पुलिस में हड़कंप मच गया था। तत्काल तलाशी अभियान चलाया गया और कुछ घंटों की मशक्कत के बाद उसे फिर पकड़ लिया गया। इसके बावजूद उसकी फरार होने की कोशिशें नहीं रुकीं।
चौथी बड़ी घटना जगदलपुर केंद्रीय जेल में हुई। पुराने रिकॉर्ड के बावजूद महेंद्र ने यहां भी ऐसा रास्ता तलाश लिया, जिससे वह जेल की बाहरी सीमा तक पहुंच सके। महिला बैरक के आसपास की दीवार पार करने के बाद वह बाहर निकल गया। घटना सामने आते ही जेल परिसर में अलार्म की स्थिति बनी और शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश शुरू की गई।
महेंद्र के बार-बार भागने के तरीके एक जैसे नहीं रहे। कभी जेल की सुरक्षा में कमजोरी का फायदा उठाया गया तो कभी पुलिस अभिरक्षा के दौरान मौका देखकर वह निकल गया। यही वजह रही कि स्थानीय स्तर पर उसे ‘बस्तर का नटवरलाल’ कहा जाने लगा। यह नाम पुलिस का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या उपाधि नहीं, बल्कि उसके लगातार फरार होने की घटनाओं के कारण प्रचलित हुआ बताया जाता है।
पुलिस अब इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि जगदलपुर जेल से निकलने के बाद करीब तीन महीने तक महेंद्र कहां-कहां रहा और किन लोगों ने उसकी मदद की। फरारी के दौरान किसी नए अपराध में उसकी संलिप्तता रही या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है। उसके संपर्क में रहे लोगों और ठिकाना उपलब्ध कराने वालों के बारे में जानकारी मिलने पर अलग कार्रवाई संभव है।
आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। जेल भेजे जाने और पेशी के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरती जा सकती है। पूर्व में तीन अलग-अलग जिलों की जेल या पुलिस अभिरक्षा से उसके भागने की घटनाओं के कारण सामान्य कैदी की तुलना में उसकी निगरानी ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
महेंद्र की पहली चर्चित फरारी दंतेवाड़ा जेल से हुई थी। दूसरी बार वह कांकेर जेल की सुरक्षा से निकल गया। तीसरी घटना इलाज के दौरान सामने आई, जब पुलिस अभिरक्षा से वह भागा लेकिन कुछ घंटों में पकड़ लिया गया। चौथी बार 25 मार्च को जगदलपुर केंद्रीय जेल की दीवार पार कर उसने पुलिस और जेल प्रशासन को फिर चुनौती दी। इस फरारी के बाद उसकी तलाश बस्तर संभाग के साथ आसपास के जिलों में भी की जा रही थी।
नारायणपुर में गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे फरारी के पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ कर सकती है। खास तौर पर यह जानना अहम होगा कि जेल से बाहर निकलने के बाद उसने किन रास्तों का इस्तेमाल किया, इतने दिनों तक गिरफ्तारी से कैसे बचा और क्या उसे किसी व्यक्ति से मदद मिली थी। उसके खिलाफ पहले से दर्ज चोरी के मामलों की न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
