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11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में CBI की FIR, कंपनी डायरेक्टर समेत कई लोगों पर धोखाधड़ी के आरोप
छत्तीसगढ़
यूनियन बैंक की शिकायत पर कार्रवाई, लोन राशि के दुरुपयोग और फर्जी वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार और धमतरी से जुड़े कथित बैंक लोन घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 11.38 करोड़ रुपए के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी के डायरेक्टरों, गारंटर, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त लोन सुविधा का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग किया गया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
मामले की जानकारी तब सामने आई जब बलौदाबाजार में कारोबारी राजकुमार सराफ के आवास पर शनिवार शाम से रविवार शाम तक जांच एजेंसियों की कार्रवाई चली। शुरुआत में इसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई माना जा रहा था, लेकिन बाद में सामने आई एफआईआर से स्पष्ट हुआ कि कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई थी। इसके साथ ही आयकर विभाग (IT) ने भी मामले में अपनी कार्रवाई की।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के डिप्टी जनरल मैनेजर एवं रीजनल हेड रणधीर कुमार ने 7 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी और उससे जुड़े जिम्मेदार लोगों ने बैंक की क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितताएं कीं और बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
जांच में सामने आया कि धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात के कारोबार से जुड़ी थी, ने अप्रैल 2023 में यूनियन बैंक से एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) सुविधा प्राप्त की थी। बैंक ने कंपनी को कुल 15 करोड़ रुपए की विभिन्न क्रेडिट सुविधाएं स्वीकृत की थीं। इनमें 5 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सीमा और 7.50 करोड़ रुपए की लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा भी शामिल थी। इन वित्तीय सुविधाओं का उद्देश्य कंपनी के निर्यात कारोबार को बढ़ावा देना था।
सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने बैंक से प्राप्त राशि का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक गतिविधियों में करने के बजाय उसे अपनी सहयोगी और संबंधित फर्मों के खातों में स्थानांतरित किया। जांच एजेंसी के अनुसार भारत मल्टी ट्रेड, क्रिस एंटरप्राइजेज और राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के माध्यम से धन का लेन-देन किया गया।
एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि भारत मल्टी ट्रेड के संचालक संतोष कुमार रमानी कंपनी की सहयोगी फर्म केपेक्स-2 एंटरप्राइजेज से जुड़े हुए बताए गए हैं। वहीं क्रिस एंटरप्राइजेज के संचालक कृतार्थ सोनी का संबंध कंपनी के गारंटर कुशल सोनी से बताया गया है। जांच एजेंसी इन वित्तीय संबंधों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।
सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई राशि को विभिन्न फर्मों के माध्यम से घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा कराया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया से ऐसा प्रदर्शित किया गया मानो पैकिंग क्रेडिट का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा हो। एजेंसी के अनुसार इस तरह के लेन-देन से बैंक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और जोखिम का सही आकलन प्रभावित हुआ।
बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी समय पर अपनी ऋण देनदारियां पूरी नहीं कर सकी। इसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को संबंधित लोन खाते को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया। बैंक का दावा है कि 31 जनवरी 2026 तक इस खाते में लगभग ₹11.38 करोड़ की बकाया राशि थी।
सीबीआई ने इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी की डायरेक्टर राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, अज्ञात बैंक अधिकारियों तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने इनके खिलाफ भारतीय कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में कथित हेराफेरी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बैंक के साथ कथित धोखाधड़ी और लोन राशि के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिले हैं। अब वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग दस्तावेजों, संबंधित कंपनियों के खातों, गारंटरों की भूमिका और बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी की विस्तृत जांच की जाएगी।
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11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में CBI की FIR, कंपनी डायरेक्टर समेत कई लोगों पर धोखाधड़ी के आरोप
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार और धमतरी से जुड़े कथित बैंक लोन घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 11.38 करोड़ रुपए के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी के डायरेक्टरों, गारंटर, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त लोन सुविधा का निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग किया गया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
मामले की जानकारी तब सामने आई जब बलौदाबाजार में कारोबारी राजकुमार सराफ के आवास पर शनिवार शाम से रविवार शाम तक जांच एजेंसियों की कार्रवाई चली। शुरुआत में इसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई माना जा रहा था, लेकिन बाद में सामने आई एफआईआर से स्पष्ट हुआ कि कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई थी। इसके साथ ही आयकर विभाग (IT) ने भी मामले में अपनी कार्रवाई की।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के डिप्टी जनरल मैनेजर एवं रीजनल हेड रणधीर कुमार ने 7 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी और उससे जुड़े जिम्मेदार लोगों ने बैंक की क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितताएं कीं और बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
जांच में सामने आया कि धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात के कारोबार से जुड़ी थी, ने अप्रैल 2023 में यूनियन बैंक से एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) सुविधा प्राप्त की थी। बैंक ने कंपनी को कुल 15 करोड़ रुपए की विभिन्न क्रेडिट सुविधाएं स्वीकृत की थीं। इनमें 5 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सीमा और 7.50 करोड़ रुपए की लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा भी शामिल थी। इन वित्तीय सुविधाओं का उद्देश्य कंपनी के निर्यात कारोबार को बढ़ावा देना था।
सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने बैंक से प्राप्त राशि का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक गतिविधियों में करने के बजाय उसे अपनी सहयोगी और संबंधित फर्मों के खातों में स्थानांतरित किया। जांच एजेंसी के अनुसार भारत मल्टी ट्रेड, क्रिस एंटरप्राइजेज और राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के माध्यम से धन का लेन-देन किया गया।
एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि भारत मल्टी ट्रेड के संचालक संतोष कुमार रमानी कंपनी की सहयोगी फर्म केपेक्स-2 एंटरप्राइजेज से जुड़े हुए बताए गए हैं। वहीं क्रिस एंटरप्राइजेज के संचालक कृतार्थ सोनी का संबंध कंपनी के गारंटर कुशल सोनी से बताया गया है। जांच एजेंसी इन वित्तीय संबंधों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।
सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई राशि को विभिन्न फर्मों के माध्यम से घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा कराया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया से ऐसा प्रदर्शित किया गया मानो पैकिंग क्रेडिट का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा हो। एजेंसी के अनुसार इस तरह के लेन-देन से बैंक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और जोखिम का सही आकलन प्रभावित हुआ।
बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी समय पर अपनी ऋण देनदारियां पूरी नहीं कर सकी। इसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को संबंधित लोन खाते को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया। बैंक का दावा है कि 31 जनवरी 2026 तक इस खाते में लगभग ₹11.38 करोड़ की बकाया राशि थी।
सीबीआई ने इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी की डायरेक्टर राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, अज्ञात बैंक अधिकारियों तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने इनके खिलाफ भारतीय कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में कथित हेराफेरी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बैंक के साथ कथित धोखाधड़ी और लोन राशि के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिले हैं। अब वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग दस्तावेजों, संबंधित कंपनियों के खातों, गारंटरों की भूमिका और बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी की विस्तृत जांच की जाएगी।
