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रायपुर में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, बैंक लोन और CIBIL सुधार का झांसा देकर अमेरिकियों से लाखों की ठगी, 42 गिरफ्तार
रायपुर (छ.ग)
रायपुर में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को बैंक लोन और CIBIL सुधार का झांसा देकर लाखों डॉलर की ठगी की जा रही थी।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को बैंक लोन और CIBIL सुधार का झांसा देकर लाखों डॉलर की ठगी की जा रही थी। पुलिस ने 26 मार्च को इस मामले में 42 युवकों को गिरफ्तार किया, लेकिन मामले के मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं। यह कॉल सेंटर अहमदाबाद के दो ठगों के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा था।
मास्टरमाइंड का तरीका और ऑफिस का जाल
पुलिस के अनुसार, अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा ने रायपुर में पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में ऑफिस किराए पर लिया था। इसके अलावा, उन्होंने पाम बेलागियो में एक लग्जरी फ्लैट भी रेंट पर रखा। मास्टरमाइंड खुद स्थायी रूप से रायपुर में नहीं रहते थे। वे कुछ दिन शहर में रहते, कॉल सेंटर के मैनेजरों को लक्ष्य और निर्देश देते और फिर वापस अहमदाबाद लौट जाते थे।
अमेरिकी नागरिकों को फंसाने की चाल
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहता, क्योंकि यह अमेरिका के समय अनुसार दिन का समय होता है। आरोपियों के पास व्हाट्सऐप के जरिए अमेरिकी नागरिकों का डेटा आता था, जिन्होंने अमेरिका के प्रमुख बैंकों से लोन लिया होता। कॉल पर उन्हें डराया जाता कि उनका CIBIL स्कोर गिर गया है या किस्त जमा नहीं हुई है। इसके बाद उनके बैंक खाते की जानकारी हासिल कर चाइनीज ऐप के माध्यम से ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी की जाती थी।
कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी और प्रशिक्षण
कॉल सेंटर में अधिकांश कर्मचारी केवल 12वीं पास थे और अंग्रेजी में उनकी पकड़ कमजोर थी। इसलिए उन्हें हिंदी में लिखी स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिसे पढ़कर वे अमेरिकी नागरिकों से बात करते थे। यदि कोई ग्राहक कठिन सवाल पूछता, तो कॉल सीनियर अधिकारी को ट्रांसफर कर दी जाती। कर्मचारियों को ठगी के लिए लगभग दो महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी।
इन चार्ज और कॉलर की सैलरी
पुलिस ने तीन मुख्य प्रभारियों को गिरफ्तार किया। रोहित यादव और सौरभ सिंह पिथालिया कॉम्प्लेक्स कॉल सेंटर के मैनेजर थे, जबकि गौरव यादव अंजनी टावर के कॉल सेंटर का प्रभारी था। इन चार्ज को लगभग 30 हजार रुपए और कॉल करने वाले कर्मचारियों को 15 से 20 हजार रुपए प्रति माह वेतन दिया जाता था।
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रायपुर में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, बैंक लोन और CIBIL सुधार का झांसा देकर अमेरिकियों से लाखों की ठगी, 42 गिरफ्तार
रायपुर (छ.ग)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को बैंक लोन और CIBIL सुधार का झांसा देकर लाखों डॉलर की ठगी की जा रही थी। पुलिस ने 26 मार्च को इस मामले में 42 युवकों को गिरफ्तार किया, लेकिन मामले के मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं। यह कॉल सेंटर अहमदाबाद के दो ठगों के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा था।
मास्टरमाइंड का तरीका और ऑफिस का जाल
पुलिस के अनुसार, अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा ने रायपुर में पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में ऑफिस किराए पर लिया था। इसके अलावा, उन्होंने पाम बेलागियो में एक लग्जरी फ्लैट भी रेंट पर रखा। मास्टरमाइंड खुद स्थायी रूप से रायपुर में नहीं रहते थे। वे कुछ दिन शहर में रहते, कॉल सेंटर के मैनेजरों को लक्ष्य और निर्देश देते और फिर वापस अहमदाबाद लौट जाते थे।
अमेरिकी नागरिकों को फंसाने की चाल
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहता, क्योंकि यह अमेरिका के समय अनुसार दिन का समय होता है। आरोपियों के पास व्हाट्सऐप के जरिए अमेरिकी नागरिकों का डेटा आता था, जिन्होंने अमेरिका के प्रमुख बैंकों से लोन लिया होता। कॉल पर उन्हें डराया जाता कि उनका CIBIL स्कोर गिर गया है या किस्त जमा नहीं हुई है। इसके बाद उनके बैंक खाते की जानकारी हासिल कर चाइनीज ऐप के माध्यम से ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी की जाती थी।
कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी और प्रशिक्षण
कॉल सेंटर में अधिकांश कर्मचारी केवल 12वीं पास थे और अंग्रेजी में उनकी पकड़ कमजोर थी। इसलिए उन्हें हिंदी में लिखी स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिसे पढ़कर वे अमेरिकी नागरिकों से बात करते थे। यदि कोई ग्राहक कठिन सवाल पूछता, तो कॉल सीनियर अधिकारी को ट्रांसफर कर दी जाती। कर्मचारियों को ठगी के लिए लगभग दो महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी।
इन चार्ज और कॉलर की सैलरी
पुलिस ने तीन मुख्य प्रभारियों को गिरफ्तार किया। रोहित यादव और सौरभ सिंह पिथालिया कॉम्प्लेक्स कॉल सेंटर के मैनेजर थे, जबकि गौरव यादव अंजनी टावर के कॉल सेंटर का प्रभारी था। इन चार्ज को लगभग 30 हजार रुपए और कॉल करने वाले कर्मचारियों को 15 से 20 हजार रुपए प्रति माह वेतन दिया जाता था।
