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इथेनॉल प्लांट के नाम पर 1.48 करोड़ की ठगी, FIR दर्ज
छत्तीसगढ़
फर्जी इनवॉयस और बिलिंग के जरिए दिल्ली की कंपनी पर सामान न देने का आरोप, रायगढ़ पुलिस ने शुरू की जांच
इथेनॉल प्लांट परियोजना के नाम पर बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आया है। यहां 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है, जिसमें दिल्ली की एक कंपनी पर फर्जी इनवॉयस और बिलिंग के जरिए रकम लेने और तय सामान की आपूर्ति न करने का आरोप है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पूंजीपथरा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला अब औद्योगिक सप्लाई चेन में फर्जीवाड़े और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतकर्ता राकेश प्रकाश पांडेय (59) सिद्धि विनायक कॉलोनी, इंदिरा नगर के रहने वाले हैं और वे नवदुर्गा फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। कंपनी ओडिशा के राजगांगपुर निवासी दीपक शर्मा द्वारा संचालित की जा रही है। वर्ष 2024 में रायगढ़ जिले के सराईपाली क्षेत्र में 100 KLPD ग्रेन बेस्ड इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा था, जिसके लिए 75 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले ग्रेन स्टोरेज साइलो की आवश्यकता थी। इसी दौरान सामान खरीद प्रक्रिया के तहत दिल्ली की कंपनी Ben and Gaws Pvt. Ltd. से संपर्क किया गया। बताया जा रहा है कि यह संपर्क परियोजना के कंसल्टेंट सुखराज सोनी के माध्यम से हुआ था, जिन्होंने कम लागत पर बेहतर सप्लाई का भरोसा दिलाया था।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत और शर्तों पर सहमति बनने के बाद 20 अप्रैल 2024 को परचेज ऑर्डर जारी किया गया। समझौते के अनुसार दो बड़े ग्रेन साइलो की सप्लाई होनी थी, जिसकी कुल कीमत 2 करोड़ 97 लाख रुपये तय हुई थी। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 3 करोड़ 50 लाख 46 हजार रुपये तक पहुंच गई। कंपनी की ओर से समय-समय पर RTGS के जरिए कुल 2 करोड़ 17 लाख 55 हजार 265 रुपये का भुगतान भी किया गया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद पूरा सामान निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया। शिकायत में कहा गया है कि केवल 20 दिसंबर 2024 को 68 लाख 90 हजार 400 रुपये मूल्य का ही सामान भेजा गया, जबकि बाकी माल की सप्लाई लंबे समय तक लंबित रही। इस दौरान दिल्ली की कंपनी की ओर से दावा किया जाता रहा कि पूरा माल डिस्पैच कर दिया गया है और इसके समर्थन में फर्जी दस्तावेज और ई-मेल भी भेजे गए। बाद में जांच में इन दस्तावेजों को संदिग्ध पाया गया, जिससे मामले में धोखाधड़ी की आशंका और गहरी हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बाकी बचे 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये के लिए कंपनी की ओर से एक चेक जारी किया गया, लेकिन वह बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि न होने की जानकारी दी, जिसके बाद कंपनी को बड़ा झटका लगा। इसके बाद ही पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे और अंदरूनी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, बार-बार संपर्क करने पर भी दिल्ली स्थित कंपनी की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे। कई बार कहा गया कि दो महीने के भीतर पूरा सामान भेज दिया जाएगा, लेकिन वास्तविक रूप से कोई ठोस सप्लाई नहीं हुई। इसी दौरान लगातार ई-मेल के जरिए डिस्पैच और शिपमेंट से जुड़े कागजात भेजे जाते रहे, जो बाद में फर्जी प्रतीत हुए।मामले में बढ़ते संदेह के बाद नवदुर्गा फ्यूल कंपनी के कर्मचारी मोहित कुमार को हरियाणा स्थित कंपनी कार्यालय भी भेजा गया, लेकिन वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने पूरे प्रकरण को धोखाधड़ी मानते हुए पूंजीपथरा थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर Ben and Gaws Pvt. Ltd. के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही संबंधित पक्षों से पूछताछ की जाएगी। वहीं, इस घटना के सामने आने के बाद औद्योगिक निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स में सप्लाई सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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इथेनॉल प्लांट के नाम पर 1.48 करोड़ की ठगी, FIR दर्ज
छत्तीसगढ़
इथेनॉल प्लांट परियोजना के नाम पर बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी का मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आया है। यहां 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है, जिसमें दिल्ली की एक कंपनी पर फर्जी इनवॉयस और बिलिंग के जरिए रकम लेने और तय सामान की आपूर्ति न करने का आरोप है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पूंजीपथरा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला अब औद्योगिक सप्लाई चेन में फर्जीवाड़े और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायतकर्ता राकेश प्रकाश पांडेय (59) सिद्धि विनायक कॉलोनी, इंदिरा नगर के रहने वाले हैं और वे नवदुर्गा फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। कंपनी ओडिशा के राजगांगपुर निवासी दीपक शर्मा द्वारा संचालित की जा रही है। वर्ष 2024 में रायगढ़ जिले के सराईपाली क्षेत्र में 100 KLPD ग्रेन बेस्ड इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा था, जिसके लिए 75 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले ग्रेन स्टोरेज साइलो की आवश्यकता थी। इसी दौरान सामान खरीद प्रक्रिया के तहत दिल्ली की कंपनी Ben and Gaws Pvt. Ltd. से संपर्क किया गया। बताया जा रहा है कि यह संपर्क परियोजना के कंसल्टेंट सुखराज सोनी के माध्यम से हुआ था, जिन्होंने कम लागत पर बेहतर सप्लाई का भरोसा दिलाया था।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत और शर्तों पर सहमति बनने के बाद 20 अप्रैल 2024 को परचेज ऑर्डर जारी किया गया। समझौते के अनुसार दो बड़े ग्रेन साइलो की सप्लाई होनी थी, जिसकी कुल कीमत 2 करोड़ 97 लाख रुपये तय हुई थी। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 3 करोड़ 50 लाख 46 हजार रुपये तक पहुंच गई। कंपनी की ओर से समय-समय पर RTGS के जरिए कुल 2 करोड़ 17 लाख 55 हजार 265 रुपये का भुगतान भी किया गया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद पूरा सामान निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया। शिकायत में कहा गया है कि केवल 20 दिसंबर 2024 को 68 लाख 90 हजार 400 रुपये मूल्य का ही सामान भेजा गया, जबकि बाकी माल की सप्लाई लंबे समय तक लंबित रही। इस दौरान दिल्ली की कंपनी की ओर से दावा किया जाता रहा कि पूरा माल डिस्पैच कर दिया गया है और इसके समर्थन में फर्जी दस्तावेज और ई-मेल भी भेजे गए। बाद में जांच में इन दस्तावेजों को संदिग्ध पाया गया, जिससे मामले में धोखाधड़ी की आशंका और गहरी हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बाकी बचे 1 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये के लिए कंपनी की ओर से एक चेक जारी किया गया, लेकिन वह बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि न होने की जानकारी दी, जिसके बाद कंपनी को बड़ा झटका लगा। इसके बाद ही पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे और अंदरूनी जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, बार-बार संपर्क करने पर भी दिल्ली स्थित कंपनी की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे। कई बार कहा गया कि दो महीने के भीतर पूरा सामान भेज दिया जाएगा, लेकिन वास्तविक रूप से कोई ठोस सप्लाई नहीं हुई। इसी दौरान लगातार ई-मेल के जरिए डिस्पैच और शिपमेंट से जुड़े कागजात भेजे जाते रहे, जो बाद में फर्जी प्रतीत हुए।मामले में बढ़ते संदेह के बाद नवदुर्गा फ्यूल कंपनी के कर्मचारी मोहित कुमार को हरियाणा स्थित कंपनी कार्यालय भी भेजा गया, लेकिन वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने पूरे प्रकरण को धोखाधड़ी मानते हुए पूंजीपथरा थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर Ben and Gaws Pvt. Ltd. के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही संबंधित पक्षों से पूछताछ की जाएगी। वहीं, इस घटना के सामने आने के बाद औद्योगिक निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स में सप्लाई सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
