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बिलासपुर में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, फूलों से सजे रथ को खींचने उमड़े श्रद्धालु
बिलासपुर (छ.ग.)
इस्कॉन की रथयात्रा में गूंजा हरे कृष्ण महामंत्र, करीब पांच किलोमीटर तक शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा भगवान जगन्नाथ का रथ
शहर की सड़कों पर बुधवार शाम भक्ति और उत्सव का अलग ही नजारा दिखाई दिया। इस्कॉन बिलासपुर की ओर से आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। फूलों से सजाए गए विशाल रथ पर भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को विराजमान किया गया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सियां थामीं, पूरा इलाका ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ के जयकारों से गूंज उठा। कोई रथ खींच रहा था तो कोई कीर्तन मंडली के साथ झूमते हुए आगे बढ़ रहा था। मृदंग, करताल और दूसरे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच निकली यात्रा को देखने के लिए रास्ते में भी लोगों की भीड़ जुटती रही। लगभग छह घंटे तक चली इस धार्मिक यात्रा ने शहर के कई प्रमुख बाजारों और चौराहों को कवर किया।
रथयात्रा की शुरुआत बृहस्पति बाजार क्षेत्र से शाम करीब चार बजे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। मंदिर से जुड़े पुजारियों और भक्तों ने पहले भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। विधि-विधान पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को सजे हुए रथ पर विराजमान कराया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से वहां मौजूद थे। पूजा पूरी होते ही जयकारे तेज हो गए और भक्तों ने रथ की रस्सियां पकड़कर यात्रा शुरू की। फूल-मालाओं से सजा रथ जैसे-जैसे आगे बढ़ा, उसके पीछे श्रद्धालुओं की कतार भी लंबी होती चली गई। कई लोग पूरे रास्ते पैदल रथ के साथ चलते रहे, जबकि जगह-जगह स्थानीय लोग भगवान के दर्शन के लिए सड़क किनारे इंतजार करते नजर आए।
बृहस्पति बाजार से शुरू हुई यात्रा शहर के सदर बाजार, गोल बाजार, तेलीपारा, पुराना बस स्टैंड चौक, अग्रसेन चौक, सत्यम चौक और कोन्हेर गार्डन सहित कई प्रमुख इलाकों से होकर गुजरी। करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग को पूरा करने में लगभग छह घंटे लगे। बाजारों से गुजरते समय रथ की रफ्तार धीमी रही, जिससे सड़क के दोनों ओर खड़े लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सके। कई श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर रथ का स्वागत किया, जबकि कुछ परिवार छोटे बच्चों को लेकर दर्शन करने पहुंचे थे। बुजुर्ग श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए और काफी दूर तक रथ के साथ चलते दिखाई दिए।
पूरे रास्ते इस्कॉन से जुड़े भक्तों की कीर्तन टोलियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। मृदंग और करताल की धुन पर हरे कृष्ण महामंत्र का लगातार संकीर्तन होता रहा। युवाओं की टोलियां भक्ति गीतों पर नृत्य करती हुई आगे बढ़ीं। कई जगह यात्रा कुछ देर के लिए रुकी तो वहां भी कीर्तन चलता रहा। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग अपने प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर यात्रा देखते रहे। रथ के आगे और पीछे चल रहे श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण शहर के कई हिस्सों में धार्मिक मेले जैसा माहौल बन गया।
रथयात्रा के स्वागत के लिए शहर में अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय संगठनों, व्यापारियों और नागरिकों ने व्यवस्थाएं की थीं। गर्मी और उमस को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए पानी और शीतल पेय की व्यवस्था रखी गई। सदर बाजार क्षेत्र में यात्रा पहुंचने पर स्वयंसेवकों ने पानी और ठंडे पेय वितरित किए। तेलीपारा में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और बूंदी बांटी गई। पुराना बस स्टैंड रोड और अग्रसेन चौक सहित दूसरे स्थानों पर भी लोगों ने अपने स्तर पर सेवा के इंतजाम किए।
फूल बाजार क्षेत्र में रथ के पहुंचते ही माहौल और रंगीन हो गया। यहां फूल कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने भगवान जगन्नाथ के रथ पर पुष्पवर्षा की। रथ के आसपास चल रहे श्रद्धालुओं पर भी फूल बरसाए गए। कुछ समय के लिए पूरा रास्ता फूलों से ढका नजर आया। श्रद्धालुओं ने रथ के सामने हाथ जोड़कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए। इस दौरान जयकारों की आवाज लगातार सुनाई देती रही।
यात्रा मार्ग के कुछ स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई। शाम ढलने के बाद रोशनी, फूलों से सजा रथ और कीर्तन करती भक्त मंडलियों ने माहौल को और उत्सवपूर्ण बना दिया। कई श्रद्धालु मोबाइल फोन से रथयात्रा के दृश्य रिकॉर्ड करते दिखाई दिए। रास्ते में लोगों की भीड़ बढ़ने के बावजूद यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ती रही। स्वयंसेवक रथ के आसपास व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित दूरी और कतार बनाए रखने में सहयोग करते रहे।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में रथ की रस्सी खींचने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। अलग-अलग स्थानों पर भक्तों को रथ खींचने का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के कारण बड़ी संख्या में लोग कुछ दूरी तक रस्सी पकड़कर चलना चाहते थे। ऐसे में स्वयंसेवकों ने भीड़ को संभालते हुए लोगों को आगे बढ़ाया। महिलाएं और बच्चे भी भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा के साथ जुड़े रहे।
करीब छह घंटे शहर भ्रमण के बाद रथयात्रा वापस बृहस्पति बाजार क्षेत्र पहुंची। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का धार्मिक परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। यात्रा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में विशेष पूजा और भोग की तैयारी की गई। भगवान जगन्नाथ को छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिसमें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक व्यंजन और प्रसाद शामिल रहे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
महाप्रसाद लेने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। रथयात्रा के साथ कई घंटे पैदल चलने वाले भक्त भी पूजा के बाद मंदिर पहुंचे। भगवान को भोग अर्पित किए जाने तक कीर्तन और धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। मंदिर परिसर में देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
इस बार बिलासपुर में इस्कॉन की रथयात्रा पहले निर्धारित तारीख पर नहीं निकाली जा सकी थी। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार इसे 18 जुलाई को आयोजित करने की तैयारी थी, लेकिन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। मौसम की स्थिति को देखते हुए बाद में नई तारीख तय की गई। कार्यक्रम आगे बढ़ाए जाने के बावजूद बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए।
इस्कॉन की ओर से अलग-अलग शहरों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आयोजित करने की परंपरा रही है। पुरी में होने वाली प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के आसपास या उसके बाद विभिन्न इस्कॉन केंद्र अपने स्थानीय कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन आयोजनों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है और श्रद्धालु स्वयं रथ की रस्सियां खींचते हैं।
बिलासपुर की यात्रा में धार्मिक आयोजन के साथ सामुदायिक भागीदारी भी दिखाई दी। अलग-अलग बाजारों में व्यापारियों ने रथ के स्वागत के लिए पहले से तैयारी की थी। कहीं प्रसाद बांटा गया तो कहीं पानी और शीतल पेय उपलब्ध कराए गए। फूलों की वर्षा के लिए भी व्यवस्था की गई थी। यात्रा जिस इलाके से गुजरी, वहां कुछ समय के लिए स्थानीय लोग भी इसमें शामिल होते गए।
शाम के समय जब यात्रा पुराने बस स्टैंड और अग्रसेन चौक जैसे व्यस्त हिस्सों से गुजरी तो वहां बड़ी संख्या में लोग रथ देखने के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कीर्तन मंडली लगातार महामंत्र का जाप करती रही। कई परिवार सड़क किनारे खड़े होकर रथ के आने का इंतजार करते रहे और भगवान के दर्शन के बाद यात्रा के साथ कुछ दूरी तक चले।
इस्कॉन से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों के अनुसार रथयात्रा की परंपरा भगवान जगन्नाथ के भक्तों के बीच आने और सभी को दर्शन देने के भाव से जुड़ी है। यही कारण है कि मंदिर के भीतर दर्शन के बजाय इस दिन भगवान को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। आयोजन में किसी एक वर्ग के बजाय हर आयु के लोगों की भागीदारी दिखाई दी। युवाओं के साथ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में शामिल हुए।
यात्रा वापस बृहस्पति बाजार पहुंचने तक रात हो चुकी थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बनी रही। रथ के मंदिर क्षेत्र में पहुंचते ही एक बार फिर जय जगन्नाथ के नारे लगे। इसके बाद भगवान के विग्रहों से जुड़ी धार्मिक विधियां पूरी की गईं और छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर में देर तक हरे कृष्ण महामंत्र और भक्ति गीतों की आवाज सुनाई देती रही, जबकि बाहर महाप्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही।
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बिलासपुर (छ.ग.)
शहर की सड़कों पर बुधवार शाम भक्ति और उत्सव का अलग ही नजारा दिखाई दिया। इस्कॉन बिलासपुर की ओर से आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। फूलों से सजाए गए विशाल रथ पर भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को विराजमान किया गया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सियां थामीं, पूरा इलाका ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ के जयकारों से गूंज उठा। कोई रथ खींच रहा था तो कोई कीर्तन मंडली के साथ झूमते हुए आगे बढ़ रहा था। मृदंग, करताल और दूसरे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच निकली यात्रा को देखने के लिए रास्ते में भी लोगों की भीड़ जुटती रही। लगभग छह घंटे तक चली इस धार्मिक यात्रा ने शहर के कई प्रमुख बाजारों और चौराहों को कवर किया।
रथयात्रा की शुरुआत बृहस्पति बाजार क्षेत्र से शाम करीब चार बजे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। मंदिर से जुड़े पुजारियों और भक्तों ने पहले भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। विधि-विधान पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को सजे हुए रथ पर विराजमान कराया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से वहां मौजूद थे। पूजा पूरी होते ही जयकारे तेज हो गए और भक्तों ने रथ की रस्सियां पकड़कर यात्रा शुरू की। फूल-मालाओं से सजा रथ जैसे-जैसे आगे बढ़ा, उसके पीछे श्रद्धालुओं की कतार भी लंबी होती चली गई। कई लोग पूरे रास्ते पैदल रथ के साथ चलते रहे, जबकि जगह-जगह स्थानीय लोग भगवान के दर्शन के लिए सड़क किनारे इंतजार करते नजर आए।
बृहस्पति बाजार से शुरू हुई यात्रा शहर के सदर बाजार, गोल बाजार, तेलीपारा, पुराना बस स्टैंड चौक, अग्रसेन चौक, सत्यम चौक और कोन्हेर गार्डन सहित कई प्रमुख इलाकों से होकर गुजरी। करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग को पूरा करने में लगभग छह घंटे लगे। बाजारों से गुजरते समय रथ की रफ्तार धीमी रही, जिससे सड़क के दोनों ओर खड़े लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सके। कई श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर रथ का स्वागत किया, जबकि कुछ परिवार छोटे बच्चों को लेकर दर्शन करने पहुंचे थे। बुजुर्ग श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए और काफी दूर तक रथ के साथ चलते दिखाई दिए।
पूरे रास्ते इस्कॉन से जुड़े भक्तों की कीर्तन टोलियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। मृदंग और करताल की धुन पर हरे कृष्ण महामंत्र का लगातार संकीर्तन होता रहा। युवाओं की टोलियां भक्ति गीतों पर नृत्य करती हुई आगे बढ़ीं। कई जगह यात्रा कुछ देर के लिए रुकी तो वहां भी कीर्तन चलता रहा। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग अपने प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर यात्रा देखते रहे। रथ के आगे और पीछे चल रहे श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण शहर के कई हिस्सों में धार्मिक मेले जैसा माहौल बन गया।
रथयात्रा के स्वागत के लिए शहर में अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय संगठनों, व्यापारियों और नागरिकों ने व्यवस्थाएं की थीं। गर्मी और उमस को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए पानी और शीतल पेय की व्यवस्था रखी गई। सदर बाजार क्षेत्र में यात्रा पहुंचने पर स्वयंसेवकों ने पानी और ठंडे पेय वितरित किए। तेलीपारा में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और बूंदी बांटी गई। पुराना बस स्टैंड रोड और अग्रसेन चौक सहित दूसरे स्थानों पर भी लोगों ने अपने स्तर पर सेवा के इंतजाम किए।
फूल बाजार क्षेत्र में रथ के पहुंचते ही माहौल और रंगीन हो गया। यहां फूल कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने भगवान जगन्नाथ के रथ पर पुष्पवर्षा की। रथ के आसपास चल रहे श्रद्धालुओं पर भी फूल बरसाए गए। कुछ समय के लिए पूरा रास्ता फूलों से ढका नजर आया। श्रद्धालुओं ने रथ के सामने हाथ जोड़कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए। इस दौरान जयकारों की आवाज लगातार सुनाई देती रही।
यात्रा मार्ग के कुछ स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई। शाम ढलने के बाद रोशनी, फूलों से सजा रथ और कीर्तन करती भक्त मंडलियों ने माहौल को और उत्सवपूर्ण बना दिया। कई श्रद्धालु मोबाइल फोन से रथयात्रा के दृश्य रिकॉर्ड करते दिखाई दिए। रास्ते में लोगों की भीड़ बढ़ने के बावजूद यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ती रही। स्वयंसेवक रथ के आसपास व्यवस्था संभालते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित दूरी और कतार बनाए रखने में सहयोग करते रहे।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में रथ की रस्सी खींचने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। अलग-अलग स्थानों पर भक्तों को रथ खींचने का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के कारण बड़ी संख्या में लोग कुछ दूरी तक रस्सी पकड़कर चलना चाहते थे। ऐसे में स्वयंसेवकों ने भीड़ को संभालते हुए लोगों को आगे बढ़ाया। महिलाएं और बच्चे भी भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा के साथ जुड़े रहे।
करीब छह घंटे शहर भ्रमण के बाद रथयात्रा वापस बृहस्पति बाजार क्षेत्र पहुंची। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का धार्मिक परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। यात्रा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में विशेष पूजा और भोग की तैयारी की गई। भगवान जगन्नाथ को छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिसमें अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक व्यंजन और प्रसाद शामिल रहे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
महाप्रसाद लेने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। रथयात्रा के साथ कई घंटे पैदल चलने वाले भक्त भी पूजा के बाद मंदिर पहुंचे। भगवान को भोग अर्पित किए जाने तक कीर्तन और धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। मंदिर परिसर में देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
इस बार बिलासपुर में इस्कॉन की रथयात्रा पहले निर्धारित तारीख पर नहीं निकाली जा सकी थी। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार इसे 18 जुलाई को आयोजित करने की तैयारी थी, लेकिन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। मौसम की स्थिति को देखते हुए बाद में नई तारीख तय की गई। कार्यक्रम आगे बढ़ाए जाने के बावजूद बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए।
इस्कॉन की ओर से अलग-अलग शहरों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आयोजित करने की परंपरा रही है। पुरी में होने वाली प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के आसपास या उसके बाद विभिन्न इस्कॉन केंद्र अपने स्थानीय कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन आयोजनों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है और श्रद्धालु स्वयं रथ की रस्सियां खींचते हैं।
बिलासपुर की यात्रा में धार्मिक आयोजन के साथ सामुदायिक भागीदारी भी दिखाई दी। अलग-अलग बाजारों में व्यापारियों ने रथ के स्वागत के लिए पहले से तैयारी की थी। कहीं प्रसाद बांटा गया तो कहीं पानी और शीतल पेय उपलब्ध कराए गए। फूलों की वर्षा के लिए भी व्यवस्था की गई थी। यात्रा जिस इलाके से गुजरी, वहां कुछ समय के लिए स्थानीय लोग भी इसमें शामिल होते गए।
शाम के समय जब यात्रा पुराने बस स्टैंड और अग्रसेन चौक जैसे व्यस्त हिस्सों से गुजरी तो वहां बड़ी संख्या में लोग रथ देखने के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कीर्तन मंडली लगातार महामंत्र का जाप करती रही। कई परिवार सड़क किनारे खड़े होकर रथ के आने का इंतजार करते रहे और भगवान के दर्शन के बाद यात्रा के साथ कुछ दूरी तक चले।
इस्कॉन से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों के अनुसार रथयात्रा की परंपरा भगवान जगन्नाथ के भक्तों के बीच आने और सभी को दर्शन देने के भाव से जुड़ी है। यही कारण है कि मंदिर के भीतर दर्शन के बजाय इस दिन भगवान को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। आयोजन में किसी एक वर्ग के बजाय हर आयु के लोगों की भागीदारी दिखाई दी। युवाओं के साथ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में शामिल हुए।
यात्रा वापस बृहस्पति बाजार पहुंचने तक रात हो चुकी थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बनी रही। रथ के मंदिर क्षेत्र में पहुंचते ही एक बार फिर जय जगन्नाथ के नारे लगे। इसके बाद भगवान के विग्रहों से जुड़ी धार्मिक विधियां पूरी की गईं और छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर में देर तक हरे कृष्ण महामंत्र और भक्ति गीतों की आवाज सुनाई देती रही, जबकि बाहर महाप्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही।
