छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक वायरल स्टिंग वीडियो ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। वीडियो में तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेंद्र जायसवाल और एक स्पा सेंटर संचालक के बीच कथित तौर पर कमीशन और कार्रवाई से जुड़ी बातचीत सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) डॉ. संजीव शुक्ला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह को जांच के निर्देश दिए हैं और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
विवाद उस वक्त गहराया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक्वा स्पा सेंटर के संचालक अमन सेन और 36 मॉल के मैनेजर आशीष सिंह चंदेल, तत्कालीन ASP राजेंद्र जायसवाल के कार्यालय में बातचीत करते दिख रहे हैं। वीडियो में ASP कथित तौर पर “कमिटमेंट पूरी नहीं होने” पर रेड की चेतावनी देते नजर आते हैं। बातचीत के दौरान यह भी कहा जाता है कि कार्रवाई से ASP को फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन कारोबारी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
वीडियो सामने आने के बाद राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो और धमकी के आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित अधिकारी के निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
पूरा मामला 7 जनवरी 2026 की पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जब बिलासपुर सिटी में एक्वा स्पा समेत छह स्पा सेंटरों पर छापेमारी की गई थी। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कुछ रिकॉर्ड और गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद स्पा संचालकों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। इसके दो दिन बाद, 9 जनवरी को स्पा संचालक अमन सेन ने IG कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में अमन सेन ने आरोप लगाया कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हर महीने अवैध वसूली की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि पहले उन्हें 40 हजार रुपये प्रतिमाह देने पड़ते थे, जो बाद में घटकर 25 हजार हो गए। इसके बाद कथित तौर पर 30 हजार रुपये अतिरिक्त तत्कालीन ASP के लिए मांगे गए। भुगतान न करने पर बार-बार रेड और बदनामी की धमकी दी गई।
स्पा संचालक का कहना है कि इसी दबाव के चलते उन्होंने ASP के साथ हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया और इसे सबूत के तौर पर IG को सौंपा। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों तक पहुंच गया।
वहीं, ASP राजेंद्र जायसवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वीडियो को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उनका दावा है कि यह बातचीत दिसंबर 2025 की है और किसी एफआईआर से जुड़े मामले पर चर्चा हो रही थी। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए वीडियो को गलत तरीके से वायरल किया गया।
फिलहाल, ASP जायसवाल गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में पदस्थ हैं। IG स्तर पर शुरू हुई जांच के बाद अब सभी की नजरें SSP की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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