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महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फिर गिरफ्तारी वारंट, प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज
Digital Desk
ओमान से भारत लाने की तैयारी आगे बढ़ी, ईडी ने स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से दोबारा ओपन-एंडेड अरेस्ट वारंट कराया जारी
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। इस वारंट के आधार पर प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिया गया है। अब दोनों देशों की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ईडी के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे के अनुसार, जांच के दौरान एजेंसी को पहले जानकारी मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में मौजूद है। इसी सूचना के आधार पर पहले स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया गया था और प्रत्यर्पण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संयुक्त अरब अमीरात भेजे गए थे। हालांकि बाद में जांच में यह जानकारी सामने आई कि वह दुबई छोड़कर ओमान पहुंच चुका है।
नई जानकारी मिलने के बाद ईडी ने रायपुर स्थित स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में नया आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने जुलाई के मध्य में दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, ताकि ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कानूनी रूप से आगे बढ़ाई जा सके। अदालत के आदेश के बाद एजेंसी ने प्रत्यर्पण से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों पर न्यायिक औपचारिकताएं पूरी कराईं और उन्हें भारत के हाई कमीशन को भेज दिया।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया संबंधित देशों के कानून और आपसी सहयोग के तहत आगे बढ़ेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सौरभ चंद्राकर को भारत लाकर उससे पूछताछ की जा सकेगी। जांच एजेंसी का मानना है कि इस मामले में उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।
जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का उपयोग कर ओमान में प्रवेश किया। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं। ईडी का कहना है कि इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जा रही है और यदि आवश्यक हुआ तो इससे जुड़े अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां आरोपी विदेश में मौजूद हो और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही हो। इस प्रकार के वारंट की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का उपयोग किया जाता है।
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला पिछले कुछ वर्षों से देश की प्रमुख जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जांच का विषय बना हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वित्तीय लेनदेन और अन्य आर्थिक अपराधों के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है। एजेंसी के अनुसार अब तक इस मामले में देशभर में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा चुका है।
जांच के दौरान ईडी ने कई लोगों से पूछताछ की है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी ने 74 लोगों को आरोपी बनाया है और रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पांच अभियोजन शिकायतें भी प्रस्तुत की हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और नेटवर्क की जांच लगातार जारी है।
ईडी के अनुसार इस मामले में अब तक लगभग ₹4,336 करोड़ की चल एवं अचल संपत्तियों को अटैच, सीज या फ्रीज किया जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फिर गिरफ्तारी वारंट, प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज
Digital Desk
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। इस वारंट के आधार पर प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिया गया है। अब दोनों देशों की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ईडी के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे के अनुसार, जांच के दौरान एजेंसी को पहले जानकारी मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में मौजूद है। इसी सूचना के आधार पर पहले स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया गया था और प्रत्यर्पण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संयुक्त अरब अमीरात भेजे गए थे। हालांकि बाद में जांच में यह जानकारी सामने आई कि वह दुबई छोड़कर ओमान पहुंच चुका है।
नई जानकारी मिलने के बाद ईडी ने रायपुर स्थित स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में नया आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने जुलाई के मध्य में दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, ताकि ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कानूनी रूप से आगे बढ़ाई जा सके। अदालत के आदेश के बाद एजेंसी ने प्रत्यर्पण से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों पर न्यायिक औपचारिकताएं पूरी कराईं और उन्हें भारत के हाई कमीशन को भेज दिया।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया संबंधित देशों के कानून और आपसी सहयोग के तहत आगे बढ़ेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सौरभ चंद्राकर को भारत लाकर उससे पूछताछ की जा सकेगी। जांच एजेंसी का मानना है कि इस मामले में उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।
जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का उपयोग कर ओमान में प्रवेश किया। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं। ईडी का कहना है कि इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जा रही है और यदि आवश्यक हुआ तो इससे जुड़े अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां आरोपी विदेश में मौजूद हो और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही हो। इस प्रकार के वारंट की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का उपयोग किया जाता है।
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला पिछले कुछ वर्षों से देश की प्रमुख जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जांच का विषय बना हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वित्तीय लेनदेन और अन्य आर्थिक अपराधों के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है। एजेंसी के अनुसार अब तक इस मामले में देशभर में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा चुका है।
जांच के दौरान ईडी ने कई लोगों से पूछताछ की है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी ने 74 लोगों को आरोपी बनाया है और रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पांच अभियोजन शिकायतें भी प्रस्तुत की हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और नेटवर्क की जांच लगातार जारी है।
ईडी के अनुसार इस मामले में अब तक लगभग ₹4,336 करोड़ की चल एवं अचल संपत्तियों को अटैच, सीज या फ्रीज किया जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
