- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स लागू, लेकिन जुर्माने पर अब भी फैसला नहीं
छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स लागू, लेकिन जुर्माने पर अब भी फैसला नहीं
छत्तीसगढ़
देशभर में 1 अप्रैल 2026 से नए नियम प्रभावी, छह महीने बाद भी राज्य में पेनाल्टी अधिसूचित नहीं; निकाय केवल नोटिस और समझाइश तक सीमित।
देशभर में ठोस कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 छत्तीसगढ़ में पूरी तरह प्रभावी तो हैं, लेकिन इनका सबसे अहम हिस्सा यानी नियमों के उल्लंघन पर लगने वाली पेनाल्टी अब तक तय नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने 6 जनवरी 2026 को नए नियमों का नोटिफिकेशन जारी किया था और 1 अप्रैल 2026 से इन्हें पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसके साथ ही सभी राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित कर अधिसूचना जारी करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में अंतिम निर्णय नहीं ले सकी है।
राज्य में पेनाल्टी तय नहीं होने का सीधा असर नगर निगमों, नगर पालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों के कामकाज पर पड़ रहा है। खुले में कचरा फेंकने वाले, निर्माण सामग्री का मलबा सड़क पर डालने वाले, कचरे का पृथक्करण नहीं करने वाले संस्थान और बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है। अधिकारी केवल नोटिस जारी कर रहे हैं या लोगों को समझाइश देकर छोड़ रहे हैं।
नगर निकायों के अधिकारियों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार पेनाल्टी की अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक जुर्माना लगाने का कानूनी आधार कमजोर रहेगा। यदि पुराने नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है तो उस पर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में प्रशासन सख्त कार्रवाई से बच रहा है। बताया जा रहा है कि पेनाल्टी से जुड़ी फाइल अभी भी शासन स्तर पर अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रही है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले जहां घरों और संस्थानों में गीले और सूखे कचरे के लिए केवल दो डस्टबिन रखने की व्यवस्था थी, वहीं अब चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है ताकि रिसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
नए नियमों के अनुसार हरे रंग के डस्टबिन में रसोई से निकलने वाला गीला कचरा जैसे बचा हुआ भोजन, फल और सब्जियों के छिलके डाले जाएंगे। नीले रंग के डस्टबिन में प्लास्टिक, कागज, गत्ता, धातु और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखा कचरा रखा जाएगा। लाल रंग का डस्टबिन सैनिटरी और बायोमेडिकल कचरे जैसे इस्तेमाल किए गए मास्क, दस्ताने और सैनिटरी नैपकिन के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं काले रंग का डस्टबिन घरेलू खतरनाक कचरे जैसे एक्सपायर्ड दवाइयों, केमिकल, पेंट और अन्य हानिकारक सामग्री के लिए रखा जाएगा।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि जो संस्थान प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें अपने स्तर पर ही कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रोसेसिंग करनी होगी। इसके अलावा सड़क, नालियों, सार्वजनिक स्थानों या खुले क्षेत्रों में कचरा फेंकना और कचरा जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे मामलों में पर्यावरण मुआवजे के रूप में भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसकी दरें अभी तक तय नहीं हुई हैं।
इस स्थिति का असर आम नागरिकों और संस्थानों दोनों पर दिखाई दे रहा है। घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे का पृथक्करण अनिवार्य तो कर दिया गया है, लेकिन उल्लंघन करने वालों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होने से नियमों का पालन कमजोर पड़ रहा है। बड़े कचरा उत्पादकों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नगर निकायों के सामने भी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। बिना अधिसूचित पेनाल्टी के जुर्माना लगाने पर कानूनी विवाद की संभावना बनी रहती है। वहीं पुराने नियमों के आधार पर कार्रवाई करने पर भी सवाल उठ सकते हैं। परिणामस्वरूप अधिकांश मामलों में अधिकारी केवल चेतावनी, नोटिस और जागरूकता अभियान तक ही सीमित हैं। जब तक पेनाल्टी का स्पष्ट प्रावधान लागू नहीं होगा, तब तक नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं होगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स लागू, लेकिन जुर्माने पर अब भी फैसला नहीं
छत्तीसगढ़
देशभर में ठोस कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 छत्तीसगढ़ में पूरी तरह प्रभावी तो हैं, लेकिन इनका सबसे अहम हिस्सा यानी नियमों के उल्लंघन पर लगने वाली पेनाल्टी अब तक तय नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने 6 जनवरी 2026 को नए नियमों का नोटिफिकेशन जारी किया था और 1 अप्रैल 2026 से इन्हें पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसके साथ ही सभी राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित कर अधिसूचना जारी करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में अंतिम निर्णय नहीं ले सकी है।
राज्य में पेनाल्टी तय नहीं होने का सीधा असर नगर निगमों, नगर पालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों के कामकाज पर पड़ रहा है। खुले में कचरा फेंकने वाले, निर्माण सामग्री का मलबा सड़क पर डालने वाले, कचरे का पृथक्करण नहीं करने वाले संस्थान और बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है। अधिकारी केवल नोटिस जारी कर रहे हैं या लोगों को समझाइश देकर छोड़ रहे हैं।
नगर निकायों के अधिकारियों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार पेनाल्टी की अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक जुर्माना लगाने का कानूनी आधार कमजोर रहेगा। यदि पुराने नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है तो उस पर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में प्रशासन सख्त कार्रवाई से बच रहा है। बताया जा रहा है कि पेनाल्टी से जुड़ी फाइल अभी भी शासन स्तर पर अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रही है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले जहां घरों और संस्थानों में गीले और सूखे कचरे के लिए केवल दो डस्टबिन रखने की व्यवस्था थी, वहीं अब चार अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है ताकि रिसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
नए नियमों के अनुसार हरे रंग के डस्टबिन में रसोई से निकलने वाला गीला कचरा जैसे बचा हुआ भोजन, फल और सब्जियों के छिलके डाले जाएंगे। नीले रंग के डस्टबिन में प्लास्टिक, कागज, गत्ता, धातु और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखा कचरा रखा जाएगा। लाल रंग का डस्टबिन सैनिटरी और बायोमेडिकल कचरे जैसे इस्तेमाल किए गए मास्क, दस्ताने और सैनिटरी नैपकिन के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं काले रंग का डस्टबिन घरेलू खतरनाक कचरे जैसे एक्सपायर्ड दवाइयों, केमिकल, पेंट और अन्य हानिकारक सामग्री के लिए रखा जाएगा।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि जो संस्थान प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें अपने स्तर पर ही कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रोसेसिंग करनी होगी। इसके अलावा सड़क, नालियों, सार्वजनिक स्थानों या खुले क्षेत्रों में कचरा फेंकना और कचरा जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे मामलों में पर्यावरण मुआवजे के रूप में भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसकी दरें अभी तक तय नहीं हुई हैं।
इस स्थिति का असर आम नागरिकों और संस्थानों दोनों पर दिखाई दे रहा है। घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे का पृथक्करण अनिवार्य तो कर दिया गया है, लेकिन उल्लंघन करने वालों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होने से नियमों का पालन कमजोर पड़ रहा है। बड़े कचरा उत्पादकों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नगर निकायों के सामने भी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। बिना अधिसूचित पेनाल्टी के जुर्माना लगाने पर कानूनी विवाद की संभावना बनी रहती है। वहीं पुराने नियमों के आधार पर कार्रवाई करने पर भी सवाल उठ सकते हैं। परिणामस्वरूप अधिकांश मामलों में अधिकारी केवल चेतावनी, नोटिस और जागरूकता अभियान तक ही सीमित हैं। जब तक पेनाल्टी का स्पष्ट प्रावधान लागू नहीं होगा, तब तक नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं होगा।
