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एमपी में पटवारियों को बड़ी राहत, अब प्रारंभिक जांच के बिना दर्ज नहीं होगी एफआईआर
मध्य प्रदेश
पटवारियों की हड़ताल के बीच राजस्व विभाग का बड़ा फैसला, प्रमुख सचिव ने सभी कलेक्टरों को जारी किए निर्देश; 23 हजार पटवारी अभी भी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर डटे
मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लेते हुए पटवारियों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी पटवारी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके पहले पूरे मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाएगी और तथ्यों का परीक्षण होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद प्रदेशभर के करीब 23 हजार पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बने हुए हैं। पटवारी संघ का कहना है कि उनकी अन्य मांगों पर भी सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, तभी आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में यदि किसी पटवारी के खिलाफ राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन या अन्य शासकीय कार्य से संबंधित किसी मामले में एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता महसूस होती है, तो उससे पहले पूरे प्रकरण का प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाए कि संबंधित मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना उचित है या नहीं। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पटवारी संघ लगातार यह आरोप लगा रहा था कि कई मामलों में बिना पर्याप्त जांच किए सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है और प्रशासनिक कार्यों में भी अनावश्यक दबाव बनता है।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने 20 जुलाई को सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। संघ का कहना था कि राजस्व न्यायालयों में वसीयत, नामांतरण, सीमांकन और अन्य मामलों में पटवारी केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम अधिकारी या न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर लिया जाता है। संघ का तर्क था कि कई बार न्यायालय के निर्णय या विवादित मामलों के कारण सीधे पटवारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जबकि उनकी भूमिका केवल तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक सीमित होती है। ऐसी स्थिति में बिना जांच के आपराधिक मामला दर्ज करना उचित नहीं है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि भविष्य में किसी पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की स्थिति बनती है, तो पहले मामले की विस्तृत प्रारंभिक जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी की भूमिका क्या थी, उसने नियमों का उल्लंघन किया या नहीं, तथा उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य क्या हैं। यदि प्रारंभिक परीक्षण में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता या अपराध के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तभी आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य निष्पक्षता सुनिश्चित करना और अनावश्यक आपराधिक मामलों से कर्मचारियों की सुरक्षा करना है।
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंत्रालय पहुंचा था, जहां उन्होंने प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार से मुलाकात की। बैठक के दौरान पटवारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह मांग दोहराई कि बिना जांच किसी भी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज न की जाए और उन्हें विधिक संरक्षण प्रदान किया जाए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सभी कलेक्टरों को नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए।
सरकार के इस निर्णय के बाद भी पटवारियों ने फिलहाल हड़ताल समाप्त करने का ऐलान नहीं किया है। संघ का कहना है कि उनकी कई अन्य मांगें अभी भी लंबित हैं, जिनमें सेवा संबंधी सुविधाएं, पदोन्नति, वेतन विसंगतियां और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। पटवारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने एक महत्वपूर्ण मांग तो मान ली है, लेकिन बाकी मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है। जब तक सभी प्रमुख मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदेश के लगभग 23 हजार पटवारी जुलाई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत 15 से 17 जुलाई तक तीन दिन के सामूहिक अवकाश से हुई थी। इसके बाद सरकारी अवकाश के कारण भी कई दिनों तक नियमित कामकाज प्रभावित रहा। बाद में पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिए और अधिकारियों के निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करना भी बंद कर दिया। जब मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ तो 3 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई। इस आंदोलन का असर राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर भी देखने को मिल रहा है। नामांतरण, सीमांकन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र से जुड़े कई मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
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एमपी में पटवारियों को बड़ी राहत, अब प्रारंभिक जांच के बिना दर्ज नहीं होगी एफआईआर
मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लेते हुए पटवारियों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी पटवारी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसके पहले पूरे मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाएगी और तथ्यों का परीक्षण होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद प्रदेशभर के करीब 23 हजार पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बने हुए हैं। पटवारी संघ का कहना है कि उनकी अन्य मांगों पर भी सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, तभी आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में यदि किसी पटवारी के खिलाफ राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन या अन्य शासकीय कार्य से संबंधित किसी मामले में एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता महसूस होती है, तो उससे पहले पूरे प्रकरण का प्रारंभिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाए कि संबंधित मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना उचित है या नहीं। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पटवारी संघ लगातार यह आरोप लगा रहा था कि कई मामलों में बिना पर्याप्त जांच किए सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है और प्रशासनिक कार्यों में भी अनावश्यक दबाव बनता है।
मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने 20 जुलाई को सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। संघ का कहना था कि राजस्व न्यायालयों में वसीयत, नामांतरण, सीमांकन और अन्य मामलों में पटवारी केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम अधिकारी या न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर लिया जाता है। संघ का तर्क था कि कई बार न्यायालय के निर्णय या विवादित मामलों के कारण सीधे पटवारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जबकि उनकी भूमिका केवल तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक सीमित होती है। ऐसी स्थिति में बिना जांच के आपराधिक मामला दर्ज करना उचित नहीं है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि भविष्य में किसी पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की स्थिति बनती है, तो पहले मामले की विस्तृत प्रारंभिक जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी की भूमिका क्या थी, उसने नियमों का उल्लंघन किया या नहीं, तथा उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य क्या हैं। यदि प्रारंभिक परीक्षण में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता या अपराध के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तभी आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य निष्पक्षता सुनिश्चित करना और अनावश्यक आपराधिक मामलों से कर्मचारियों की सुरक्षा करना है।
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंत्रालय पहुंचा था, जहां उन्होंने प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार से मुलाकात की। बैठक के दौरान पटवारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह मांग दोहराई कि बिना जांच किसी भी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज न की जाए और उन्हें विधिक संरक्षण प्रदान किया जाए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए सभी कलेक्टरों को नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए।
सरकार के इस निर्णय के बाद भी पटवारियों ने फिलहाल हड़ताल समाप्त करने का ऐलान नहीं किया है। संघ का कहना है कि उनकी कई अन्य मांगें अभी भी लंबित हैं, जिनमें सेवा संबंधी सुविधाएं, पदोन्नति, वेतन विसंगतियां और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। पटवारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने एक महत्वपूर्ण मांग तो मान ली है, लेकिन बाकी मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है। जब तक सभी प्रमुख मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदेश के लगभग 23 हजार पटवारी जुलाई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन की शुरुआत 15 से 17 जुलाई तक तीन दिन के सामूहिक अवकाश से हुई थी। इसके बाद सरकारी अवकाश के कारण भी कई दिनों तक नियमित कामकाज प्रभावित रहा। बाद में पटवारियों ने सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिए और अधिकारियों के निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई करना भी बंद कर दिया। जब मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ तो 3 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई। इस आंदोलन का असर राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर भी देखने को मिल रहा है। नामांतरण, सीमांकन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र से जुड़े कई मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
