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FSSAI की बड़ी कार्रवाई: डाबर के ‘100%’ दावे वाले शहद-घी समेत कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक
बिजनेस डेस्क
भ्रामक विज्ञापन और ‘100% प्योर’ जैसे दावों को बताया नियमों का उल्लंघन, 15 दिन में मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट; शहद, घी और ऑर्गेनिक उत्पाद जांच के घेरे में
देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से बड़ा झटका लगा है। खाद्य नियामक ने कंपनी के उन कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर ‘100%’ जैसे दावे किए गए थे। इनमें डाबर का शहद, गाय का घी और कुछ ऑर्गेनिक उत्पाद भी शामिल हैं। FSSAI का कहना है कि कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटिड’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं और ये खाद्य विज्ञापन एवं दावे संबंधी नियमों का उल्लंघन करते हैं।
FSSAI ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि डाबर को तत्काल प्रभाव से इन चिन्हित उत्पादों की बिक्री रोकनी होगी। इसके साथ ही कंपनी को 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी जमा करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि कंपनी ने आदेश के बाद कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए हैं और भ्रामक दावों को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान FSSAI ने पाया कि डाबर की वेबसाइट और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे कई खाद्य उत्पादों पर ‘100%’ शब्द का व्यापक उपयोग किया जा रहा था। नियामक के अनुसार, इस तरह के दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना बेहद कठिन होता है और बिना पर्याप्त प्रमाण के ऐसे दावे करना उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों के खिलाफ है।
जांच में सामने आया कि कंपनी के कई उत्पादों पर ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटिड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावे लिखे गए थे। FSSAI ने कहा कि ये दावे Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 का उल्लंघन करते हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में ऐसा दावा तभी किया जा सकता है जब उसके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण और अधिकृत प्रमाणन उपलब्ध हो।
जांच में कुछ अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं। डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर ‘जैविक भारत’ लोगो का उपयोग पाया गया, जबकि FSSAI के अनुसार इन उत्पादों के लिए आवश्यक वैध ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट उपलब्ध नहीं था। नियामक ने इसे भी नियमों का उल्लंघन माना है।
इसके अलावा डाबर होममेड कोकोनट मिल्क जैसे कंपाउंड फूड प्रोडक्ट पर भी ‘100% Purity’ का दावा किया गया था। FSSAI के मुताबिक मिश्रित खाद्य पदार्थों पर इस प्रकार का दावा नियमों के तहत मान्य नहीं है, क्योंकि इनमें कई घटक शामिल होते हैं और इन्हें पूर्ण रूप से ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ नहीं कहा जा सकता।
FSSAI ने यह भी बताया कि डाबर को पहले भी इस प्रकार के दावों को लेकर नोटिस जारी किया गया था। कंपनी को निर्देश दिया गया था कि वह ऐसे सभी भ्रामक दावों को तत्काल हटाए, लेकिन नियामक के अनुसार निर्धारित समय में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से अब सख्त कदम उठाते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।
‘100 प्रतिशत’ जैसे शब्द उपभोक्ताओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अधिकांश ग्राहक ऐसे दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रमाणित मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता में किसी भी प्रोसेस्ड या पैकेज्ड खाद्य उत्पाद में नमी, प्रसंस्करण प्रक्रिया, पैकेजिंग और अन्य कारकों के कारण ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ होने का दावा करना बेहद कठिन होता है।
FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और पैकेजिंग पूरी तरह पारदर्शी हों और उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार से भ्रमित न किया जाए। हाल के वर्षों में खाद्य उत्पादों के लेबल, स्वास्थ्य संबंधी दावों और ऑर्गेनिक प्रमाणन को लेकर नियामक लगातार सख्ती बढ़ा रहा है।
इस कार्रवाई का असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। संभावना है कि अन्य खाद्य कंपनियां भी अब अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन दावों की समीक्षा करेंगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की नियामकीय कार्रवाई से बचा जा सके। उपभोक्ता संगठनों ने भी FSSAI के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि खाद्य उत्पादों की खरीद के समय लोग पैकेज पर लिखे दावों पर भरोसा करते हैं। यदि ये दावे भ्रामक हों तो उपभोक्ता गलत जानकारी के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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FSSAI की बड़ी कार्रवाई: डाबर के ‘100%’ दावे वाले शहद-घी समेत कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक
बिजनेस डेस्क
देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से बड़ा झटका लगा है। खाद्य नियामक ने कंपनी के उन कई खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर ‘100%’ जैसे दावे किए गए थे। इनमें डाबर का शहद, गाय का घी और कुछ ऑर्गेनिक उत्पाद भी शामिल हैं। FSSAI का कहना है कि कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटिड’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं और ये खाद्य विज्ञापन एवं दावे संबंधी नियमों का उल्लंघन करते हैं।
FSSAI ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि डाबर को तत्काल प्रभाव से इन चिन्हित उत्पादों की बिक्री रोकनी होगी। इसके साथ ही कंपनी को 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी जमा करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि कंपनी ने आदेश के बाद कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए हैं और भ्रामक दावों को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान FSSAI ने पाया कि डाबर की वेबसाइट और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे कई खाद्य उत्पादों पर ‘100%’ शब्द का व्यापक उपयोग किया जा रहा था। नियामक के अनुसार, इस तरह के दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना बेहद कठिन होता है और बिना पर्याप्त प्रमाण के ऐसे दावे करना उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों के खिलाफ है।
जांच में सामने आया कि कंपनी के कई उत्पादों पर ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटिड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावे लिखे गए थे। FSSAI ने कहा कि ये दावे Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 का उल्लंघन करते हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में ऐसा दावा तभी किया जा सकता है जब उसके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण और अधिकृत प्रमाणन उपलब्ध हो।
जांच में कुछ अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं। डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर ‘जैविक भारत’ लोगो का उपयोग पाया गया, जबकि FSSAI के अनुसार इन उत्पादों के लिए आवश्यक वैध ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट उपलब्ध नहीं था। नियामक ने इसे भी नियमों का उल्लंघन माना है।
इसके अलावा डाबर होममेड कोकोनट मिल्क जैसे कंपाउंड फूड प्रोडक्ट पर भी ‘100% Purity’ का दावा किया गया था। FSSAI के मुताबिक मिश्रित खाद्य पदार्थों पर इस प्रकार का दावा नियमों के तहत मान्य नहीं है, क्योंकि इनमें कई घटक शामिल होते हैं और इन्हें पूर्ण रूप से ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ नहीं कहा जा सकता।
FSSAI ने यह भी बताया कि डाबर को पहले भी इस प्रकार के दावों को लेकर नोटिस जारी किया गया था। कंपनी को निर्देश दिया गया था कि वह ऐसे सभी भ्रामक दावों को तत्काल हटाए, लेकिन नियामक के अनुसार निर्धारित समय में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से अब सख्त कदम उठाते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।
‘100 प्रतिशत’ जैसे शब्द उपभोक्ताओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अधिकांश ग्राहक ऐसे दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रमाणित मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता में किसी भी प्रोसेस्ड या पैकेज्ड खाद्य उत्पाद में नमी, प्रसंस्करण प्रक्रिया, पैकेजिंग और अन्य कारकों के कारण ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ होने का दावा करना बेहद कठिन होता है।
FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और पैकेजिंग पूरी तरह पारदर्शी हों और उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार से भ्रमित न किया जाए। हाल के वर्षों में खाद्य उत्पादों के लेबल, स्वास्थ्य संबंधी दावों और ऑर्गेनिक प्रमाणन को लेकर नियामक लगातार सख्ती बढ़ा रहा है।
इस कार्रवाई का असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। संभावना है कि अन्य खाद्य कंपनियां भी अब अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन दावों की समीक्षा करेंगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की नियामकीय कार्रवाई से बचा जा सके। उपभोक्ता संगठनों ने भी FSSAI के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि खाद्य उत्पादों की खरीद के समय लोग पैकेज पर लिखे दावों पर भरोसा करते हैं। यदि ये दावे भ्रामक हों तो उपभोक्ता गलत जानकारी के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।
